बिहार: तेजस्वी यादव का हमला, कहा- सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले साल में पांच महीने का समय बर्बाद कर दिया

तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि काम रहित एनडीए सरकार 5 महीने 7 दिन से खाली बैठकर झूठ, फरेब, प्रपंच और पाखंड का वाद्ययंत्र बजा रही है।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने पहले साल में पांच महीने और सात दिन का समय बर्बाद कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार गणतंत्र का गला घोंटकर तंत्र-यंत्र और षड्यंत्र से बनाई गई है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि काम रहित एनडीए सरकार 5 महीने 7 दिन से खाली बैठकर झूठ, फरेब, प्रपंच और पाखंड का वाद्ययंत्र बजा रही है। नई सरकार बिना किसी स्पष्ट दिशा, दीर्घकालिक योजना, बिना विजन, बिना रोडमैप, बिना ब्लूप्रिंट, बिना विस्तृत कार्ययोजना और बगैर किसी टाइमलाइन के अपने कार्यकाल के प्रथम वर्ष का 43.29 प्रतिशत समय आज तक व्यर्थ कर चुकी है।


तेजस्वी यादव ने कहा कि वैसे भी नए वजीर के पास कितनी गहराई (डेप्थ), रीजनिंग और नॉलेज है, यह तो संपूर्ण बिहार जानता है। उन्होंने एक प्रेस बयान जारी कर कहा, "विगत 23 सप्ताह में इस नई सरकार ने कोई एक नया कार्य नहीं किया, सिवाय वही घिसी-पिटी पुरातन बातें और झूठ परोसने के। बिहार में महीनों से कोई कैबिनेट बैठक नहीं हुई और अब नई सरकार के नए मुखिया भी एक महीने तक अपना कैबिनेट नहीं गठित कर पाएंगे, क्योंकि अब बिहार, बिहार से नहीं बल्कि दो गुजराती बंधुओं के रिमोट से चलता है।

उन्होंने कहा कि थक-हार कर जब कुछ नहीं करने को शेष रहेगा, तब फुर्सत के वक्त बिहार के बारे में सोचा जाएगा, तब तक सिलेक्टेड सीएम इधर-उधर घूमकर रील बनवाकर टाइम पास करते रहेंगे।

उन्होंने आगे लिखा कि बिहारवासी आज पश्चाताप के आंसू बहा रहे हैं, क्योंकि अभी तक बिहार को बिहारियों ने अपने स्वाभिमान, गरिमा, परिश्रम और आत्मसम्मान से चलाया है, लेकिन राजनीतिक जीवन की अंतिम अवस्था में कुर्सी से लिपटे रहने की तड़प में एनडीए के मौकापरस्त, कमजोर और डरपोक नेताओं ने सुख-सुविधा के लालच में देश की सबसे अधिक 60 प्रतिशत युवा आबादी वाले बिहार राज्य की अस्मिता के साथ सौदा कर लिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इनकी भोगविलासिता का भुगतान अब बिहार के बेरोजगार युवाओं, छात्रों और मेहनतकश नागरिकों को करना पड़ रहा है।

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