बिहार: जब गांव, घर, खेत पानी में डूबे, तो सड़क किनारे बनने लगे आशियाने, स्थानीय लोगों के छलके दर्द...

आशा के पास रहने को घर तो दूर जमीन भी नहीं है। सरकारी जमीन जो रेलवे के लाइन के पास है उसी में अपनी झोपड़ी बनाकर सपरिवार गुजारा करती है। जब बाढ़ का पानी झोपड़ी में घुस जाता है तो इनका ठिकाना सड़क के किनारे होता है।

फोटो: IANS
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मनोज पाठक, IANS

मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड के मिठनसराय के रहने वाले लालबाबू साहनी मुजफ्फरपुर-दरभंगा मुख्य मार्ग के किनारे तंबू बना रहे हैं। बरसात के मौसम में तीन से चार महीने इनका ठिकाना यहीं रहेगा। इनके परिवार के सदस्यों की संख्या आठ है। इनके गांव का घर, खेत सबकुछ बाढ़ के पानी में डूब गया। जब इनके रहने का भी ठिकाना नहीं रहा, तो ये सड़क पर आ गए।

वैसे, लालबाबू साहनी का एक मात्र ऐसा परिवार नहीं जिसका बाढ़ की वजह से ठिकाना बदल गया हो। ऐसे कई परिवार हैं जो अब सड़कों के किनारे तंबू लगाकर जीवन गुजार रहे हैं। लालबाबू कहते हैं कि गंडक नदी के जलस्तर में वृद्घि होने से परेशानी बढ़ जाती है।

साहनी ने बताया, "मेरे परिवार में बच्चे और सभी मिलाकर 8 सदस्य हैं। किसी तरह ठेला गाड़ी चलाकर पेट भरते हैं। इस साल जुलाई महीने में ही घर में पानी घुस गया। घर में रखी अनाज पानी में बह गया। खेत में मक्का लगा रखा था वह भी डूब गया। अब सपरिवार सड़क पर तंबू बनाकर रहेंगे।"

सड़क पर आसरा लिए आशा देवी बताती हैं कि ससुर हरि साह और पति राजेश साह एक मोटर गैरेज में हेल्पर का काम करते हैं, जिससे मेरा परिवार का भरण पोषण होता है।


आशा के पास रहने को घर तो दूर जमीन भी नहीं है। सरकारी जमीन जो रेलवे के लाइन के पास है उसी में अपनी झोपड़ी बनाकर सपरिवार गुजारा करती है। जब बाढ़ का पानी झोपड़ी में घुस जाता है तो इनका ठिकाना सड़क के किनारे होता है।

आशा कहती हैं, " जब हमलोगों का सारा कुछ डूब जाता है और सड़कों पर आ जाते हैं तब दो-चार दिनों के बाद दो वक्त का खाने का उपाय अधिकारी कर देते हैं, लेकिन कोई ठोस बंदोवस्त। आखिर हम गरीब जाएं तो कहां जाएं?"

इधर, मुकुल साहनी की शिकायत है कि सड़क किनारे रहने वाले लोगों के लिए सरकारी स्तर से अब तक रहने के लिए प्लास्टिक तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि शौचालय और पीने का पानी भी नदारद है। रात में परिवार के सदस्य जागकर रहते हैं कि कहीं कुछ घटना दुर्घटना ना हो जाए।

कांटी अंचल के अंचलाधिकारी शिव शंकर गुप्ता बताते हैं कि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद सामुदायिक किचन संचालन के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि 4 पंचायतों के कई गांव में बूढ़ी गंडक नदी के पानी से लोग बेघर हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव का परिचालन प्रारंभ कर दिया गया है।


इधर, मुजफ्फरपुर (पश्चिम) के अनुमंडल अधिकारी अनिल कुमार दास ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि बाढ़ प्रभावित लोग का हरसंभव ख्याल रखें और जरूरी कदम उठाएं।

उन्होंने दावा करते हुए कहा, "गुरुवार को सामुदायिक शौचालय और पीने के पानी की मुकम्मल व्यवस्था करा दी जाएगी। सााथ ही साथ लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।

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