बिलकिस बानो केस: दोषियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, सरेंडर करने के लिए मांगी है मोहलत

गुजरात सरकार द्वारा इन 11 दोषियों को माफी के आधार पर समय से पहले रिहाई करते हुए इनको जेल से रिहा कर दिया था। इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन दोषियों को दो हफ्ते में जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिलकिस बानो मामले में सामूहिक बलात्कार और हत्या के 11 दोषियों की समयपूर्व रिहाई पर रोक लगाने के कुछ दिनों बाद, उनमें से तीन ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आवेदन दायर कर जेल अधि‍कारी के समक्ष आत्‍मसमर्पण करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की है। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

दरअसल, गुजरात सरकार द्वारा इन 11 दोषियों को माफी के आधार पर समय से पहले रिहाई करते हुए इनको जेल से रिहा कर दिया था। इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने इन दोषियों को दो हफ्ते में जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था।

अपने आवेदन में, एक दोषी ने अनुरोध किया कि उसके 88 वर्षीय बिस्तर पर पड़े पिता पूरी तरह से उस पर निर्भर हैं और उसकी 75 वर्षीय मां का स्वास्थ्य भी खराब है। इसके अलावा, उन्हें 'बवासीर' के इलाज के लिए ऑपरेशन भी कराना है।

आवेदन में कहा गया है, “प्रतिवादी (दोषी) और उसके परिवार द्वारा सामना की जा रही कठिनाइयों के मद्देनजर और न्याय के हित में, प्रतिवादी को संबंधित जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए चार सप्ताह का विस्तार दिया जाना चाहिए।”

एक अन्य दोषी मितेश चिमनलाल भट्ट ने कहा कि वह लगभग 62 साल के हैं और उन्‍होंने मोतियाबिंद के लिए आंख की सर्जरी कराई है। भट्ट ने अपने आवेदन में अनुरोध किया, "चूंकि आवेदक द्वारा उत्पादित शीतकालीन फसलें कटाई और अन्य प्रक्रियाओं के लिए तैयार हैं, इसलिए आवेदक को ऐसी कटाई और अन्य प्रक्रियाओं के लिए 5 से 6 सप्ताह की आवश्यकता है।"

इसी तरह, एक अन्य आवेदन में आत्मसमर्पण के लिए समय अवधि चार सप्ताह बढ़ाने की मांग करते हुए कहा गया है कि आवेदक का छोटा बेटा विवाह योग्य उम्र का है और वह यह जिम्मेदारी पूरा करना चाहते हैं।

अपने 8 जनवरी के आदेश में, दोषियों की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए याचिका को खारिज करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि छूट के आदेशों को रद्द कर दिया जाता है, तो "प्राकृतिक परिणाम भुगतने होंगे"। इसमें कहा गया है, '' कानून के शसन को देखते हुए हमने छूट के विवादित आदेश को रद्द कर दिया है, तो स्वाभाविक परिणाम सामने आने चाहिए।'' इसमें दोषियों को दो सप्ताह के भीतर संबंधित जेल अधिकारियों को रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है।

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