स्विस बैंक में भारतीयों के कालेधन में तीन गुना बढ़ोत्तरी, कांग्रेस ने बताया 'मोदीनॉमिक्स', मांगा सरकार से जवाब

कांग्रेस में स्विस बैंक के ताजा आंकड़ों पर पूछा कि मोदी सरकार उन लोगों के नाम का खुलासा क्यों नहीं कर रही, जिन्होंने पिछले साल स्विस बैंक में पैसा जमा कराया। जब 97 प्रतिशत भारतीय और ज्यादा गरीब हो गए, तो ये वो कौन लोग हैं, जो ‘आपदा में अवसर’ खोज रहे हैं?

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस के प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस कर बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि साल 2020 में भारतीयों ने 2019 की तुलना में स्विस बैंक में 286 प्रतिशत अधिक धनराशि जमा की है, जो पिछले 13 सालों में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि साल 2020 में भारतीय नागरिकों और फर्म्स द्वारा स्विस बैंकों में जमा की जाने वाली धनराशि के आंकड़े स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) ने जारी कर दिए हैं, जिससे पता चलता है कि 2020 में भारतीयों द्वारा वहां जमा पैसों की राशि में तकरीबन तीन गुने की वृद्धि हुई है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अमीरों और गरीबों के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है। एक तरफ, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, लगभग 97 फीसदी भारतीय पिछले साल और ज्यादा गरीब हो गए। तो दूसरी तरफ 2020 में स्विस बैंकों में जमा कराई गई धनराशि के आंकड़े कहानी का दूसरा पहलू प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार उन लोगों के नामों का खुलासा क्यों नहीं कर रही, जिन्होंने पिछले साल स्विस बैंकों में अपना पैसा जमा कराया? जहां 97 प्रतिशत भारतीय और ज्यादा गरीब हो गए, तो ये वो कौन लोग हैं, जो ‘आपदा में अवसर’ खोज रहे हैं?

प्रो. गौरव वल्लभ कहा कि 2014 में सत्ता में आने से पहले बीजेपी ने दावा किया था कि भारतीयों ने 250 बिलियन डॉलर (17.5 लाख करोड़ रु.) अकेले स्विट्जरलैंड के बैंकों में छिपाया हुआ है। बीजेपी ने यह वादा भी किया था कि वो विदेशी बैंकों में छिपाए गए इस काले धन को वापस लेकर आएगी और हर भारतीय को उसके खाते में 15 लाख रुपये मिलेंगे। पिछले 7 सालों में, मोदी सरकार ने केवल खोखले दावे किए हैं, और यह ‘बातों में महारत, काम में नदारद’ सरकार बन गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पिछले 7 साल में मोदी सरकार का जो इकोनॉमिक मॉडल देश के सामने आ रहा है, उसमें तीन लो हैं, तो तीन हाई हैं। जीडीपी लो है, मांग लो है और इन्वेस्टमेंट अर्थात नया निवेश लो है। और हाई क्या–क्या है– फॉरेन डिपोजिट, बेरोजगारी और महंगाई। तो ये मोदी नॉमिक्स है, जिसमें जिन चीजों को लो होना चाहिए, वो हाई हैं और जिन चीजों को हाई होना चाहिए, वो लो हैं।


उन्होंने कहा कि हम 2020 की बात कर रहे हैं, ये वही साल है, जहां 97 प्रतिशत देश के लोगों की आय कम हुई है। इस दौरान इसी साल स्विस बैंक में भारतीयों का जो पैसा बढ़ा है, उसमें साल 2019 से 286 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। स्विस बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2019 में भारतीयों के प्रति जो लायबिलिटी थी वो 892 मिलियन स्विस फ्रैंक की थी। यह 2020 में बढ़कर 2,553 मिलियन स्विस फ्रैंक अर्थात् 7,200 करोड़ भारतीय रुपए से बढ़कर ये 20,706 करोड़ रुपए हो गया है।

गौरव बल्लभ ने कहा कि हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि इसमें कौन लोग हैं, ये किनका पैसा है, 7 साल में आप कितना पैसा लाए। मोदी सरकार उन लोगों के नामों का खुलासा क्यों नहीं कर रही, जिन्होंने पिछले साल स्विस बैंकों में अपना पैसा जमा कराया? जहां 97 प्रतिशत भारतीय और ज्यादा गरीब हो गए, तो ये वो कौन लोग हैं, जो ‘आपदा में अवसर’ खोज रहे हैं? 2014 में बड़े-बड़े वादों के बूते सरकार बनाने के बाद मोदी सरकार ने काला धन वापस लाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए और पिछले 7 सालों में कितना-कितना काला धन और किस-किस देश से वापस लाया गया? मोदी सरकार ने विदेशी खातों में काला धन छिपाए जाने से रोकने के लिए क्या उपाय किए?

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हम ये मांग करते हैं कि देश के सामने वाइट पेपर रखा जाए, जिसमें ये बताया जाए कि पिछले 7 सालों में कितना ब्लैक मनी विदेशों से भारत सरकार ने कलेक्ट किया और कौन-कौन वो लोग हैं, जिनसे कलेक्ट किया, क्योंकि बीजेपी ने स्वयं एक आंकड़े में ये माना कि सिर्फ स्विट्जरलैंड में भारतीयों का साढ़े 17 लाख करोड़ रुपए है, तो उसमें से कितना पैसा देश में वापस आया? क्योंकि बात हुई थी 15 लाख रुपए हर हिंदुस्तान के व्यक्ति के खाते में डालने की, बात हुई थी कि 250 बिलियन डॉलर स्विट्जरलैंड से वापस लाने की, तो कितना पैसा वापस आया और 15 लाख रुपए का जो पहला इंस्टॉलमेंट है, वो देश के हर व्यक्ति के खाते में कब तक जाएगा?

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