बड़ी खबर LIVE: नेपाल बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 155 के पार, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लोग अभी भी लापता

नेपाल में आए फ्लैश फ्लड में करीब 155 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 750 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

फोटो: PTI
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अचानक आई बाढ़ से कैलाश पर्वत के रास्ते बंद होने के कारण आंध्र प्रदेश के तीर्थयात्री तिब्बत में फंसे

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिला स्थित अदोनी के एक तीर्थयात्री ने बुधवार को बताया कि चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से सड़कें क्षतिग्रस्त होने और रास्ते बंद हो जाने के कारण आंध्र प्रदेश के कई तीर्थयात्री डारचेन और उसके आसपास के इलाकों में फंस गए हैं।

निवर्ति रंगनाथ शास्त्री, जो इस समय अपने परिवार के साथ डारचेन में हैं, ने बताया कि उस इलाके में तेलुगु बोलने वाले तीर्थयात्रियों के कई समूह मौजूद हैं लेकिन आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों से आए तीर्थयात्रियों की सटीक संख्या का पता नहीं चल सका। शास्त्री ने बताया, ‘‘इस इलाके में ईशा फाउंडेशन से जुड़े समूह भी मौजूद हैं। हर समूह में कम से कम 150 सदस्य हैं और ऐसे करीब 15 समूह वहां मौजूद हैं।’’

नेपाल बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 155 के पार, 750 से अधिक लोग अभी भी लापता

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस भीषण फ्लैश फ्लड में करीब 155 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है

बाढ़ की चपेट में आने से परिवहन और संचार व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बाढ़ के तेज बहाव में बह गए, जिससे कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था. इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली. इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से हिमनद फटा होगा और उसके कारण बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों के अनुसार, भोटे कोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने से रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के रास्ते त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई।

इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत अन्य जिलों तक पहुंच गया. इससे काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाके प्रभावित हुए

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