किसान आंदोलन: पंजाब का मिनी पिंड बना सिंघु और टिकरी बॉर्डर! अब प्रदर्शन स्थल पर बनने लगे ईंट वाले घर

किसानों का कहना है कि दिल्ली की इस गर्मी और धूप हमारे टेंट के तिरपालों को भी पिघला देगी। ऐसे में हमने ईंट के घर बनाने शुरू कर दिए हैं। जो किसानों का पक्का रैन बसेरा होगा। मकानों के निर्माण के लिए पंजाब से राजमिस्त्री को बुलाया गया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मोदी सरकार द्वारा जबरन लागू किए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसानों 105 से ज्यादा दिनों से डटे हुए हैं। इनते दिनों से जारी आंदोलन की वजह से अब सिंघु और टिकरी बॉर्डर को अब मिनी पिंड भी कहा जाने लगा है। किसान जहां विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वहां सैलून, जिम के बाद अब पक्के ईंट वाले घर भी बनने शुरू हो गए हैं। सिंघु सीमा पर विरोध स्थल से आगे बढ़ने पर इन घरों को आसानी से देखा जा सकता है।

एक हिंदी वेबसाइट के मुताबिक किसानों का कहना है कि किसान आंदोलन की शुरुआत में वो ट्रैक्टरों से जुड़ी ट्रॉलियों में रहे रहे थे। बाद में दिल्ली कड़कड़ाती ठंड में उन्होंने टेंट में रहने का सहारा लिया। किसानों का कहना है कि लेकिन दिल्ली की इस गर्मी और धूप हमारे टेंट के तिरपालों को भी पिघला देगी। ऐसे में हमने ईंट के घर बनाने शुरू कर दिए हैं। जो किसानों का पक्का रैन बसेरा होगा। आपको बता दें, सिंघु बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल किसानों ने ईंटों और सीमेंट से घर बनाए हैं। घर को ऐसी झोपड़ी बनाई जा रही है, जिसके ऊपर पराली की छत बिछाई गई है। ताकी किसानों को गर्मी में राहत मिल सके। किसानों का कहना है कि यह एक वातानुकूल झोपड़ी जैसी होगी। इसकी दीवारें ईंट की हैं, लेकिन छत पराली की होगी।

आईएएनएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि मकानों के निर्माण के लिए पंजाब से राजमिस्त्री को बुलाया गया है। संयुक्ता किसान मोर्चा के मीडिया सेल का काम देखने वाले करमजीत सिंह ने कहा, शुक्रवार (12 मार्च) को पंजाब के किसान नेताओं ने सिंघू सीमा पर पक्के घरों के निर्माण पर चर्चा की। बैठक में सीमा पर किसानों को चिलचिलाती गर्मी से बचाने के तरीकों के बारे में बताया गया। सभी सीमा चार घर बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या बढ़ने की संभावना है। करमजीत सिंह ने कहा, रात में मच्छर और दिन में चिलचिलाती धूप की वजह से किसानों को बचाने के लिए निर्माण का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा, अगर आंदोलन को और लंबा किया जाता है, तो हमारी तैयारियों को मजबूत रहना होगा। अमृतसर से आए गुरमीत सिंह ने बताया कि सिंघु बॉर्डर पर बड़ी संख्या में में दिन-रात ट्रैक्टरों के माध्यम से पंजाब और हरियाणा के कई शहरों से ईंट और सीमेंट मंगवाने का काम किया जा रहा है।

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