बुलंदशहर हिंसाः आईजी के बयान से योगी सरकार की नीयत पर सवाल, कहा- इंस्पेक्टर की मौत नहीं, गोकशी की जांच जरूरी

बुलंदशहर में हुई हिंसा की जांच को लेकर योगी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूपी के आईजी राम कुमार का कहना है कि हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर की मौत से से ज्यादा गोकशी करने वालों का पता लगाना उनकी प्राथमिकता है।

By नवजीवन डेस्क

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सोमवार को हुई हिंसा की जांच को लेकर प्रदेश की योगी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। हिंसा में एक पुलिस इंस्पेक्टर समेत दो लोगों की मौत हो गई थी और थाना समेत कई वाहनों को जला दिया गया था। इस घटना के तीन दिन बाद अब यूपी पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप लग रहे हैं कि यूपी पुलिस हिंसा और पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या की जांच में ढिलाई बरत रही है और मामले को नया रुख देने के लिए कथित गोकशी की घटना पर अधिक फोकस कर रही है।

इस बात को खुद आईजी राम कुमार ने स्वीकारते हुए कहा है कि हिंसा और उसमें मारे गए लोगों से ज्यादा जरूरी है कि गोहत्या में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाए। एक न्यूज चैनल से बातचीत में आईजी ने साफ तौर पर कहा कि हिंसा के दौरान मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत पर कोई भी कार्रवाई फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर होगी। आईजी ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस की प्राथमिकता हिंसक वारदातों में शामिल लोगों को पकड़ने से ज्यादा गोहत्या करने वालों को बेनकाब करना है।

बुलंदशहर हिंसाः आईजी के  बयान से योगी सरकार की नीयत पर सवाल, कहा- इंस्पेक्टर की मौत नहीं,  गोकशी की जांच जरूरी

आईजी ने न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, “हम केवल सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई कर सकते हैं। अभी यह साफ नहीं है कि इंस्पेक्टर सुबोध या सुमित (हिंसा में मारा गया दूसरा शख्स) को गोली किसने मारी। हमें फॉरेंसिक जांच करनी है।” आईजी राम कुमार ने कहा, लेकिन गोहत्या के पीछे कौन है, इस साजिश के पीछे कौन है.. यह बड़ा सवाल है, ना कि बिना फॉरेंसिक सबूत के वीडियो में शामिल लोगों को पकड़ना।”

गौरतलब है कि प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हिंसा के बाद घटना की समीक्षा के लिए मंगलवार शाम को लखनऊ में आलाअधिकारियों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की थी। खबरों के अनुसार बैठक में सीएम योगी ने सभी अधिकारियों कोपूरे प्रदेश में अवैध बूचड़खानों और गोकशी की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया था। बैठक के बाद योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों के डीएम और एसपी को आदेश जारी कर गोहत्या करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फरमान दिया था। सबसे बड़ी बात है कि उस आदेश में एक बार भी गोहत्या के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात नहीं कही गई है। इसके अलावा ये भी बताया गया कि बैठक के दौरान योगी ने बुलंदशहर हिंसा में मारे गए पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के नाम का एक बार भी जिक्र तक नहीं किया।

ऐसे में सीएम योगी के रवैये और उनके फरमान जारी करने के बाद आईजी के बयान से बुलंदशहर हिंसा में जांच और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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