राफेल पर सीएजी रिपोर्ट: कीमत को लेकर झूठी साबित हो गई मोदी सरकार, पहली खेप आने में भी लगेगा वक्त

राफेल पर सीएजी रिपोर्ट सामने आ गई है। हालांकि इस रिपोर्ट में सीएजी ने बहुत कुछ छिपा लिया है, फिर भी राफेल विमान की कीमतों को लेकर मोदी सरकार के झूठ का खुलासा तो हो गया है।

फोटो : Getty Images
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों का जो सौदा किया है वह यूपीए सरकार के दौर में प्रस्तावित सौदे से 2.8 फीसदी सस्ता है। कुल मिलाकर सारा मीडिया और बीजेपी नेता यही लब्बोलुबाब निकाल रहे हैं राफेल सौदे पर सीएजी रिपोर्ट का। लेकिन हकीकत यह है कि सीएजी ने विमान की कीमतों, विमान मिलने में लगने वाले समय और संप्रभु गारंटी न मिलने के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। कीमतों के मामले में ही सीएजी ने मोदी सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया है कि राफेल सौदा पहले के मुकाबले 9 से 20 फीसदी सस्ता किया गया है।

सीएजी की यह रिपोर्ट मंगलवार को राज्यसभा में पेश की गई। लेकिन इस चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट में राफेल सौदे के सबसे अहम और विवादित बिंदु, कीमतों का जिक्र नहीं है। रक्षा मंत्रालय की दलील है कि इस जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। दरअसल सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यहां-तहां राफेल कीमतों का जिक्र किया है, लेकिन सिर्फ प्रतीकात्मक संकेतों का इस्तेमाल करते हुए कीमतों को छिपा लिया गया है। संभवत: इतिहास में ऐसा पहला मौका है जब सीएजी ने किसी मामले में कीमतों को छिपाया है।

कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने पहले ही सीएजी की रिपोर्ट को यह कहकर खारिज कर दिया है कि सीएजी राजीव महर्षि चूंकि राफेल सौदे के समय वित्त सचिव थे, और इस सौदे की प्रक्रिया में शामिल थे, इसलिए उनसे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

सीएजी ने रिपोर्ट में लिखा है कि बेसिक एयरक्राफ्ट (बिना रक्षा उपकरणों का लड़ाकू विमान) की कीमत वही है जो यूपीए शासन के दौर में प्रस्तावित थी। सीएजी ने वर्तमान 36 विमानों की सौदे को यूपीए दौर के 126 विमानों प्रस्तावित सौदे से तुलना की है, और कहा है कि विमानों में जो विशेष रक्षा उपकरण आदि लगाए गए हैं, उनकी कीमत यूपीए शासन के मुकाबले 17.08 फीसदी कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने कोई 13 विशेष बदलाव भारत की जरूरतों के हिसाब से विमान में कराए हैं और इन अपग्रेड और बदलावों को सस्ते में हासिल किया है।

साथ ही सीएजी ने बताया है कि जिन पहलुओं पर अधिक पैसा खर्च हुआ है या महंगे पड़े हैं उनमें इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज और विमान की क्षमता से संबंधित साजो-सामान शामिल हैं।

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2015 में रक्षा मंत्रालय की टीम ने यूपीए सरकार के दौर के 126 विमानों के प्रस्तावित सौदे को इस आधार पर रद्द करने की सिफारिश की थी कि दसॉल्ट एविएशन लोएस्ट बिडर (सबसे कम बोली लगाने वाला आपूर्तिकर्ता) नहीं था और यूरोपियन एयरोनॉटिक डिफेंस एंड स्पेस कंपनी जैसी दूसरी कंपनियां निविदा (टेंडर) की शर्तों को पूरा नहीं करती थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वायुसेना ने एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट (गुणवत्ता आधारित आवश्यकताएं) को सही तरह परिभाषित नहीं किया था, इसलिए कोई भी कंपनी मानकों पर खरी नहीं उतरी।

कांग्रेस ने सीएजी की इस रिपोर्ट को धोखा करार देते हुए कहा है कि ऐसी रिपोर्ट किस काम की जिसमें कीमतों को छिपा लिया गया हो। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सिलसिलेवार इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया रखी। उन्होंने कहा:

  • रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 19 अगस्त 2018 को कहा था कि मोदी सरकार ने 36 राफेल विमान यूपीए के दौर में प्रस्तावित 126 विमानों के मुकाबले 9 फीसदी कम कीमत पर खरीदे हैं।
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 29 अगस्त 2018 को कहा कि मोदी सरकार ने यह विमान 20 फीसदी कम कीमत पर खरीदे हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री ने 3 जनवरी 2019 को और रक्षा मंत्री ने 4 सितंबर 2019 को संसद में दोहराया कि मोदी सरकार ने इन विमानों को 9 से 20 फीसदी कम कीमत पर खरीदा है।

सुरजेवाला ने कहा कि, भले सीएजी रिपोर्ट एक धोखा है, फिर भी अपनी रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 130 पर क्लॉज़ सी में सीएजी ने कहा कि विमान 2.86 फीसदी कम कीमत पर खरीदे गए हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह आंकड़ा भी झूठा और फर्जी है। सुरजेवाला ने कहा कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ अहम बिंदुओं को शामिल नहीं किया है।

उन्होंने बताया कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट के पार्ट बी में पैरा 2.3 में कहा है कि दसॉल्ट एविएशन ने 2007 के प्रस्तावित सौदे में परफार्मेंस गारंटी और वारंटी की पेशकश की थी और इसकी कीमत पूरे सौदे का 10 फीसदी थी। उन्होंने कहा कि द हिंदू अखबार के मुताबिक सौदा करने वाली टीम ने जो असहमति पत्र लिखा उसमें इस बैंक गारंटी का मूल्य करीब 574 मिलियन यूरो था। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इससे दसॉल्ट एविएशन को फायदा हुआ। लेकिन इस कीमत को विमानों की कीमत में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा 126 विमानों के लिए भारत की जरूरतों के मुताबिक विशेष उपकरण लगाने और तकनीक हस्तांतरण की कीमत 1400 मिलियन यूरो या 11.11 मिलियन यूरो प्रति विमान थी। जबकि सिर्फ 36 विमानों के लिए इस कीमत को बढ़ाकर 1300 मिलियन यूरो या 36.11 मिलियन यूरो प्रति विमान कर दिया गया। लेकिन सीएजी ने कीमतों में इस 300 गुना बढ़ोत्तरी को अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया।

सुरजेवाला ने कहा कि सीएजी ने इस सौदे के इस पहलू को भी माना है कि 36 राफेल विमा मिलने में काफी देरी होगी। सीएजी ने रिपोर्ट में कहा है कि दसॉल्ट के पास फिलहाल 83 विमान बनाने का बैकलॉग है। यानी उसे पहले के ऑर्डर के विमान पहले देने हैं। उसकी क्षमता11 विमान प्रति वर्ष है, ऐसे में भारत को मिलने वाले विमानों में देरी होगी।

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