राम मंदिर परिसर में काम करने वाले सभी लोगों के ‘कॉल रिकॉर्ड’ की जांच हो, बीजेपी से निकलेंगे संबंध: अखिलेश यादव

एसपी प्रमुख ने बीजेपी पर चुनावी फायदे को धार्मिक मूल्यों से ऊपर रखने का आरोप लगाया और ट्रस्ट को भंग करने और इस्तीफा देने वाले इसके पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर से पूर्व में किये गये कार्यों की न्यायिक जांच की भी मांग की।

राम मंदिर परिसर में काम करने वाले सभी लोगों के ‘कॉल रिकॉर्ड’ की जांच हो, बीजेपी से निकलेंगे संबंध: अखिलेश यादव
i

समाजवादी पार्टी (एसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में हमला जारी रखते हुए गुरुवार को परिसर में काम करने वाले सभी लोगों के ‘कॉल डिटेल रिकॉर्ड’ (सीडीआर) की जांच किए जाने की मांग की और दावा किया कि इनमें से 99.9 प्रतिशत लोगों के बीजेपी से संबंध पाए जाएंगे।

उन्होंने बीजेपी पर चुनावी फायदे को धार्मिक मूल्यों से ऊपर रखने का आरोप लगाया और यह भी दावा किया कि अगर यह जांच हो जाए तो बीजेपी में भगदड़ मच जाएगी। एसपी प्रमुख ने बाद में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और इस्तीफा देने वाले इसके पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर से पूर्व में किये गये कार्यों की न्यायिक जांच की भी मांग की।

अखिलेश यादव ने संवाददाताओं से कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) द्वारा जांच किए जाने का मुद्दा हर घर में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मंदिर परिसर में काम करने वाले सभी लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच होनी चाहिए। जैसे ही सीडीआर की जांच होगी, उनमें से 99.9 प्रतिशत लोग बीजेपी के ही निकलेंगे। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि तब बीजेपी के भीतर कैसी भगदड़ मचेगी। पार्टी छोड़ने का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका है और कई लोग हमसे संपर्क भी करने लगे हैं।’’

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर चुनावी सुविधा के लिए अपनी विचारधारा तक बदल डालने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘बीजेपी वोटों के लिए अपने विचार बदल लेती है। उनके लिए धर्म से ज्यादा पैसा जरूरी है। हमने देखा है कि अयोध्या में क्या हुआ है। जिन लोगों ने जिम्मेदारी सौंपी थी, वे कहीं नजर नहीं आ रहे हैं, जबकि जिन्हें जिम्मेदारी दी गई थी, वे सवालों का सामना कर रहे हैं। वे लोग कहां हैं जिन्होंने (राम मंदिर में) जिम्मेदारियां दी थीं?’’


राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटना से दुनियाभर में सनातन धर्म के अनुयायी चिंतित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा सनातन समाज चिंतित है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता है, लेकिन बीजेपी ने अपने राजनीतिक हितों के लिए उन आदर्शों को तोड़-मरोड़ दिया है।’’

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘सनातन धर्म में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे को चुराने से बड़ा कोई पाप नहीं है। उन्होंने बहुत बड़ा पाप किया है। सनातन धर्म को मानने वाले लोग आस्था के मामलों को लेकर बहुत भावुक होते हैं।’’

एसपी प्रमुख ने बीजेपी नेता और सांसद निशिकांत दुबे द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाया और पूछा कि एसपी कार्यकर्ताओं द्वारा दुबे के खिलाफ तहरीर दिए जाने के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद के खिलाफ कोई प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा, ‘‘पक्ष के तो मुकदमे दर्ज हो रहे हैं लेकिन विपक्ष के मुकदमे दर्ज नहीं किए जा रहे।’’दुबे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया था कि अखिलेश यादव के संबंध चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव से हैं।

बाद में, अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का नाम लिये बगैर उन पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व में इन दोनों के हस्ताक्षर से हुए सभी भूमि सौदों और अन्य कार्यों के लिए न्यायिक जांच बैठाई जाए।


अखिलेश यादव ने एसआईटी की रिपोर्ट के औचित्य पर सवाल उठाते हुए किसी का नाम लिये बगैर कहा, ‘‘जिसका नाम अंतरिम रिपोर्ट में नहीं है, उसका अंतिम में कैसे होगा। जिसके ऊपर फोड़ा ठीकरा, वो तो रिपोर्ट के हिसाब से काफी ठीक रहा। अगर सीडीआर निकाली जाए तो पता चलेगा सबसे ज़्यादा फोन बीजेपी के लोगों के ही आए हैं जो बीजेपी छोड़कर इधर आना चाहते हैं। जनता ने भाजपाइयों की नाकाबंदी कर दी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग दूर से बैठकर आरोप लगा रहे हैं, लगता है उनकी भी इस महाकांड में हिस्सेदारी है। उनकी आमदनी की नहर बंद हो गई है, इसीलिए छटपटा रहे हैं।’’

अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए पोस्ट में कहा, ‘‘सिर्फ खांचा नहीं, पूरा ढांचा बदलना चाहिए। पूरा ट्रस्ट भंग होना चाहिए। सज़ा सिर्फ़ घोड़े या लगाम को नहीं, कोचवान को भी मिलनी चाहिए। जिम्मेदारी सिर्फ उसकी नहीं जिसको दी गई, बल्कि जिसने जिम्मेदारी दी उसकी भी तय होनी चाहिए।’’

उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा पूर्व में किये गये कार्यों की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा, ‘‘केवल इस्तीफे की लीपा-पोती से काम नहीं चलेगा। जो लोग हटे हैं, उनके हस्ताक्षर से हुए सभी भू-सौदों और अन्य कार्यों के लिए न्यायिक जांच बैठाई जाए। इस्तीफा बच निकलने का रास्ता नहीं बनना चाहिए।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आपस में ‘निष्कलंक’ होने की क्लीन चिट देने का खेल बंद हो। उन्होंने दावा किया, ‘‘भ्रष्ट लोगों का काला सच सामने आ चुका है। बीजेपी में भगदड़ मच गई है। जो बीजेपी का साथी, वो रामघाती।’’ इससे पहले, अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की और दावा किया कि धर्मगुरु ने गायों की सुरक्षा के मुद्दे पर चिंता जताई है।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए