कनाडाई लेखिका ऐनी कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार, 'बेबाक और नए प्रयोग' के लिए सम्मान

उन्हें यह सम्मान उनके बेबाक और नए प्रयोगों के लिए मिला है। उन्होंने क्लासिकल परंपरा के साथ नए प्रयोग कर समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़े हैं। पूरे करियर के दौरान, कार्सन ने कविता, लेख लिखने के साथ अनुवाद और कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का काम भी किया है।

साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की खबर सुनते ही ऐनी कार्सन चौंक गईं
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ऐनी कार्सन को इस साल का साहित्य का नोबेल पुरस्कार

साहसी और अभिनव रचनाओं के लिए मिलेगा सम्मान

प्राचीन यूनानी साहित्य को रचनाओं का आधार बनाती हैं

शास्त्रीय यूनानी साहित्य की कई कृतियों का अनुवाद किया

इस साल के साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान आज हो गया। कनाडाई कवि और निबंधकार ऐनी कार्सन को इस साल के साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। नोबेल समिति के अनुसार, उन्हें यह पुरस्कार ‘‘उनकी साहसी और अभिनव रचनाओं के लिए दिया जाएगा, जो शास्त्रीय परंपरा के साथ चंचल संवाद में समकालीन साहित्य के लिए नए रूपों का सृजन करती हैं।’’

बेबाक और नए प्रयोगों के लिए मिला सम्मान

समिति के अनुसार, उन्हें यह पुरस्कार उनके "बेबाक और नए प्रयोगों" के लिए मिला है। उन्होंने क्लासिकल परंपरा के साथ नए प्रयोग कर समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़े हैं। अपने पूरे करियर के दौरान, ऐन कार्सन ने कविता लिखने के साथ-साथ अनुवाद का काम और अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का काम भी किया है। उनका लगभग सारा साहित्यिक काम शब्दों के प्रति एक भाषा-विशेषज्ञ के जुनून और नए अर्थों की तलाश करने वाले कवि के नजरिए के मेल पर केंद्रित रहा है। उन्होंने खुद माना है कि शब्दों की व्युत्पत्ति ही उनके सभी कामों की शुरुआती कड़ी रही है।

यूनानी और रोमन साहित्य के विषयों को बनाया आधार

टोरंटो में जन्मी 76 वर्षीय कार्सन प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्य के विषयों और कहानियों को अपनी रचनाओं का आधार बनाती हैं, जो अक्सर कविता, निबंध और कथा साहित्य के तत्वों का मिश्रण होती हैं। उनकी पुस्तकों में प्राचीन यूनानी साहित्य में इच्छा के सुख और दर्द पर आधारित नजरिया प्रस्तुत करने वाली ‘इरोज द बिटरस्वीट’, छंदबद्ध उपन्यास ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड’, कविता और गद्य का संग्रह ‘मेन इन द ऑफ ऑवर्स’ और मर्लिन मुनरो तथा ट्रॉय की हेलेन की तुलना करने वाली कृति ‘‘नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय’’ शामिल हैं।

कार्सन ने शास्त्रीय यूनानी साहित्य की ऐसी कृतियों का अनुवाद भी किया है, जिन्हें स्वीडिश अकादमी के अनुसार स्वयं में उनकी स्वतंत्र कृतियां माना जा सकता है। साहित्य समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने कहा, ‘‘उनकी लगभग पूरी साहित्यिक रचना, शब्दों के प्रति भाषाशास्त्री के जुनून और नए अर्थ के लिए कवि की तड़प के बीच के संगम पर केंद्रित रही है।’’ कार्सन ने कई उत्तर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में क्लासिक्स (शास्त्रीय साहित्य) पढ़ाया है और वह आइसलैंड में रह चुकी हैं, जहां उन्हें और उनके पति रॉबर्ट क्यूरी को 2022 में नागरिकता प्रदान की गई थी।


ग्रीक साहित्य के जरिए प्रेम और इच्छा का मर्म समझाया

ऐन कार्सन का जन्म 1950 में टोरंटो में हुआ। 1981 में क्लासिक्स विषय में ‘ओडी एट अमो एर्गो सम’ नाम से डॉक्टरेट थीसिस प्रकाशित की। नोबेल प्राइज के ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी जानकारी के मुताबिक, 1986 में प्रकाशित ‘इरोस द बिटरस्वीट’ को बेहतरीन लेखन पीस माना जाता है। इसमें उन्होंने प्राचीन ग्रीक साहित्य के जरिए प्रेम और इच्छा का मर्म समझाया। उनके मुताबिक, प्रेम में हर्ष और कष्ट दोनों शामिल हो सकते हैं।

कार्सन की खासियत अलग-अलग दौर के लेखकों को एक ही रचना में साथ मिलाकर रखना है। 1999 की ‘इकोनॉमी ऑफ द अनलॉस्ट’ में उन्होंने प्राचीन यूनानी कवि सिमोनाइड्स को आधुनिक कवि पॉल सेलान के साथ रखा। 2000 की ‘मेन इन द ऑफ आवर्स’ में उन्होंने प्राचीन इतिहासकार थ्यूसीडिडीज और आधुनिक लेखिका वर्जीनिया वूल्फ को जोड़ा। इस तरह उन्होंने पुराने और नए साहित्य के बीच नया पुल बनाने की कोशिश की।

दिसंबर में स्टॉकहोम में पुरस्कृत किया जाएगा

नोबेल पुरस्कार विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में पुरस्कृत किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 11.5 करोड़ रुपए है। इस पुरस्कार की खासियत की बात करें तो स्वीडिश अकादमी नोबेल के नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट कभी जारी नहीं करती। नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक छुपा कर रखी जाती। 2026 में किन लेखकों को नॉमिनेट किया गया है, इसकी पूरी जानकारी 2076 में जाहिर की जाएगी।

पिछले साल, हंगरी के लेखक लास्लो क्रास्नाहोरकाई ने साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीता था। इस साल के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत सोमवार हुई। चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार सोमवार को कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगेमन और जॉर्ज नागेल को देने की घोषणा की गई, जिन्होंने इस बात पर अनुसंधान किया है कि मस्तिष्क व्यक्तिगत तंत्रिका कोशिकाओं (नर्व सेल्स) की गतिविधियों को चालू या बंद करने के लिए किन प्रणालियों का उपयोग करता है।

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शुक्रवार को शांति और शनिवार को अर्थशास्त्र के नोबेल का ऐलान

मंगलवार को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई। बेल्जियम में जन्मे वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को ‘न्यूट्रिनो’ के एक दुर्लभ समूह से जुड़े रहस्य सुलझाने के उनके प्रयास के लिए 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। हेनरी बी कागन और केंसो सोआई को रासायनिक अणुओं में रहस्यमयी दर्पण छवियों (मिरर इमेज) को सुलझाने के उनके प्रयासों के लिए इस वर्ष का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा बुधवार को की गई।शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की जाएगी, जिसके बाद अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार के विजेता का नाम सोमवार को घोषित किया जाएगा।

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