सीएपीएफ विधेयक: विपक्ष का मोदी सरकार पर हमला, कहा- हक को मारने के लिए सरकार कानून लेकर आई है
प्रमोद तिवारी ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने काफी विचार विमर्श करने के बाद जो निर्णय दिया था आज यह मोदी सरकार बहुमत के बल पर उसे रौंद रही है। वह जवान जो सीमाओं पर हमारी हिफाजत करती है, संसद, देश की रक्षा करती है आज उनके हक पर सरकार डाका डाल रही है।

ज्यसभा में बुधवार को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 की सराहना की और इसे लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार बताया, जबकि विपक्ष ने इसे ‘भेदभावपूर्ण’ और ‘संस्थागत स्वायत्तता के लिए खतरा’ करार दिया।विपक्षी सदस्यों ने विधेयक की कड़ी आलोचना की और इसे प्रवर समिति में भेजने पर जोर दिया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने काफी विचार विमर्श करने के बाद जो निर्णय दिया था आज यह मोदी सरकार बहुमत के बल पर उसे रौंद रही है। वह जवान, वह फोर्स जो हमारे लिए अपने प्राणों को न्योछावर करती है। सीमाओं पर हमारी हिफाजत करती है, संसद, देश की रक्षा करती है आज उनके हक पर सरकार डाका डाल रही है। जब इसपर कमेटी बनी तो CAPF के लोगों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला... जो विरोधी दल के लोग हैं उन्होंने वॉकआउट किया, क्योंकि जब आपको सुनना नहीं है, आप वह करने को अमादा हैं जो सुप्रीम कोर्ट भी नहीं चाहता तो उसके लिए हमने मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में वॉकआउट किया है।"
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, "संसद में जब हम खड़े होकर सवाल करते हैं तो हम जवाब की उम्मीद करते हैं... जो जवानों के साथ नाइंसाफी हो रही है वह लोगों को समझ आ रहा है... हम लोगों की आवाज़ उठाएंगे... जवाब नहीं मिलने पर हम बैठे रहें और उनकी झूठी बातें सुनते रहें ऐसा नहीं होगा इसलिए हमने वॉकआउट किया। मल्लिकार्जुन खरगे ने मुद्दों पर सवाल उठाया, एक का भी जवाब नहीं मिला।"
तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि यह विधेयक आईपीएसद अधिकारियों को सीएपीएफ में नेतृत्व पदों पर वर्चस्व देने वाला प्रणालीगत बदलाव है, जो काडर अधिकारियों की पदोन्नति को प्रभावित करेगा। उन्होंने कर्मियों की कठिन परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने के दौरान सुविधाओं की कमी का जिक्र किया।
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा, "दुख की बात है कि देश के 15 हज़ार किलोमीटर की रक्षा करने वाले हमारे जवान और CAPF के अधिकारियों के हक को मारने के लिए सरकार कानून लेकर आई है। यह 50 वर्षों की लड़ाई है। मुर्ली मनोहर जोशी, पी. चिदंबरम और तमाम अधिकारियों की कमेटी आई जिन्होंने यह रिपोर्ट दी कि CAPF के अधिकारियों को भी प्रमोशन मिलना चाहिए लेकिन सरकार ने यह काला कानून पास किया है। देश के 11 लाख CAPF जवान सरकार की तानाशाही देख रहे हैं और वक्त आने पर जवाब देंगे।"
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की डॉ फौजिया खान ने विधेयक को ‘‘कानून के बहाने न्यायिक बचाव’’ करार दिया और कहा कि यह विविध बलों पर ‘‘एक केंद्रीय कानून’’ थोपकर राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर करेगा। उन्होंने लंबित पदोन्नति और सीएपीएफ कर्मियों के व्यापक परामर्श की मांग की।