यूपी पीसीएस अधिकारी की आत्महत्या में अधिकारियों-कर्मचारियों पर केस, प्रियंका गांधी ने की थी न्याय की मांग

मणिमंजरी राय के भाई की शिकायत पर पुलिस ने मनियार नगर पंचायत अध्यक्ष भीम गुप्ता, टैक्स क्लर्क विनोद सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर अखिलेश, कार्यकारी अधिकारी, सिकंदरपुर संजय राव, एक ड्राइवर और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

उत्तर प्रदेश के बलिया में मंगलवार को पीसीएस अधिकारी मणिमंजरी राय (30) द्वारा अपने घर में फांसी लगाने के मामले में पुलिस ने मनियार नगर पंचायत अध्यक्ष समेत कई और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोतवाली इंस्पेक्टर विपिन सिंह ने बताया कि मृतक अधिकारी के भाई विजयानंद राय ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आईपीसी की धारा 306 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

मणिमंजरी राय के भाई की शिकायत पर पुलिस ने मनियार नगर पंचायत (एमएनपी) के अध्यक्ष भीम गुप्ता, टैक्स क्लर्क विनोद सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर अखिलेश, कार्यकारी अधिकारी, सिकंदरपुर संजय राव, एक ड्राइवर और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

मणिमंजरी राय की आत्महत्या की खबर आने पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी दुख जताया था। उन्होंने ट्वीट कर मणिमंजरी राय के लिए न्याय की मांग की थी। उन्होंने ट्वीट में लिखा, “बलिया में तैनात गाजीपुर निवासी युवा अधिकारी मणिमंजरी के बारे में दुखद समाचार मिला। खबरों के अनुसार उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। मणिमंजरी के परिवार को न्याय मिले इसके लिए, सभी तथ्यों का सामने आना और निष्पक्ष जांच बहुत जरूरी है।”

बता दें कि गाजीपुर की रहने वाली मणिमंजरी राय को साल 2018 में बलिया में मनियारी नगर पंचायत के कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। यह उनकी पहली पोस्टिंग थी। मणिमंजरी राय मंगलवार को अपने आवास पर फांसी पर लटकी पाई गई थीं। उनके भाई विजयानंद राय ने आरोप लगाया है कि एमएनपी अध्यक्ष भीम गुप्ता, कुछ ठेकेदार और कार्यालय के कर्मचारी मणिमंजरी राय पर दबाव डाल रहे थे कि वह विकास कार्यों और भुगतानों के आवंटन में अनुचित तरीका अपनाएं।

विजयानंद राय ने आरोप लगाया, "मेरी बहन ने उनका विरोध किया, ये लोग उससे नाखुश थे। दबाव महसूस होने के कारण मणिमंजरी ने जिलाधिकारी से मुलाकात की और उनसे खुद को जिला मुख्यालय से जोड़ने का अनुरोध किया। हालांकि, जब उसने तीन महीने के बाद फिर से चार्ज संभाला, तो उसे पता चला कि उसके फर्जी हस्ताक्षर कर कई भुगतान किए गए थे।"

राय ने आगे कहा, "दो करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी किया जाना था, लेकिन एमएनपी बोर्ड ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित नहीं किया और टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी। हालांकि, अध्यक्ष ने 35 कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए और उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना उनके निष्पादन का आदेश दें। इनमें से 18 प्रस्ताव एक ही ठेकेदार को दिया गया था।"

मणिमंजरी राय के भाई के अनुसार जब उसने इस संबंध में जिलाधिकारी हरि प्रताप शाही से शिकायत की, तो कार्यकारी अधिकारी, सिकंदरपुर संजय राव ने भी अध्यक्ष के पक्ष में उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अधिकारी के भाई ने आगे आरोप लगाया कि अध्यक्ष और उनके लोगों के साथ मणिमंजरी का ड्राइवर भी मिला हुआ था। मणिमंजरी पर दबाव बनाने के लिए कई अज्ञात कॉल भी किए गए। उन्होंने कहा, "चेयरमैन और उनके गुर्गों ने उस पर अत्यधिक दबाव डाला। उसे अत्यधिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, इसी कारण वह आत्महत्या के लिए मजबूर हुई।"

दिवंगत अधिकारी मणिमंजरी राय के भाई ने अपनी बहन को आत्महत्या के लिए उकसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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