सीबीआई ने माना माल्या का लुकआउट नोटिस ‘उचित स्तर’ पर बदला गया, लेकिन इस स्तर में कौन है नहीं बताया

सीबीआई ने मान लिया है कि विजय माल्या के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर को बदलने का फैसला ‘उचित स्तर’ पर लिया गया था। लेकिन, सीबीआई ने इस ‘उचित स्तर’ को परिभाषित नहीं किया है। सीबीआई की यह सफाई कांग्रेस द्वारा इस मामले में गंभीर सवाल उठाने के बाद आई है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो या सीबीआई ने शनिवार को कहा कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ 'लुक आउट सर्कुलर नोटिस' में बदलाव करने का फैसला किसी एक अधिकारी ने 'अकेले' नहीं लिया, बल्कि यह फैसला 'उचित स्तर' पर लिया गया था। सीबीआई ने सफाई दी कि माल्या के खिलाफ इस सर्कुलर में बदलाव इसलिए किया गया, क्योंकि उसे गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने का उसके पास कोई पर्याप्त आधार नहीं था। सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने कहा, "कुछ आधारहीन आरोप कुछ खास लोगों ने एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी पर लगाए हैं। सीबीआई ने कई बार कहा है कि माल्या के विरुद्ध एलओसी में बदलाव करने का निर्णय उस समय इसलिए लिया गया, क्योंकि एजेंसी के पास उसे गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था।" उन्होंने कहा, "यह निर्णय एक प्रक्रिया के तहत ‘उचित स्तर’ पर लिया गया, न कि किसी अधिकारी ने लिया, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।"

यहां सवाल उठता है कि आखिर वह ‘ उचित स्तर’ क्या था? गौरतलब है कि विजय माल्या के मामले में कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रही है। शराब कारोबारी विजय माल्या ने दो दिन पहले लंदन में कहा था कि उन्होंने देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री को बताया था और उनसे मिल कर देनदारियों का सैटलमेंट करने की बात की थी। माल्या के इस सनसनीखेज़ खुलासे के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तुरंत एक बयान जारी कर कहा था कि उन्होंने 2014 के बाद से कभी विजय माल्या को मिलने का समय नहीं दिया। उन्होंने माना था कि संसद के सेंट्रल हॉल में चलते-चलते उनकी मुलाकात विजय माल्या से हुई थी।

लेकिन, वित्त मंत्री के इस बयान के पलटवार में कांग्रेस नेता पी एल पूनिया ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में खुलासा किया कि जेटली-माल्या की मुलाकात चलते-चलते नहीं, बल्कि काफी देर की थी। पूनिया ने कहा था कि पहले दोनों ने खड़े होकर अंतरंग बातचीत की और फिर सेंट्रल हॉल की बेंच पर बैठकर बातें कीं।

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इस खुलासे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जांच पूरी होने तक जेटली से इस्तीफा देने की मांग की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि विजय माल्या के खिलाफ पहले जो लुकआउट सर्कुलर था उसमें उसे हवाई अड्डे पर देखते ही हिरासत में लेने की बात थी, लेकिन इस सर्कुलर को बदलकर सिर्फ सूचित करने के लिए कह दिया गया।

इस आरोप के बाद शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष ने एक ट्वीट किया, जिसमें लिखा था कि, “सीबीआई के संयुक्त निदेशक ए के शर्मा ने माल्या के 'लुक आउट' नोटिस को कमजोर किया और माल्या को भागने की इजाजत दी। गुजरात काडर के अधिकारी शर्मा, सीबीआई में प्रधानमंत्री के चहेते हैं। यही अधिकारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भगाने की योजना के भी प्रभारी थे।“

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