ललन शेख मौत मामले में CBI ने 4 अधिकारियों को किया सस्पेंड, घटना के वक्त कैंप ऑफिस में थे मौजूद

सूत्रों के मुताबिक, निलंबित अधिकारियों में उपाधीक्षक विलास बाला मडघुत, इंस्पेक्टर राहुल प्रियोडोरशी के साथ-साथ दो कांस्टेबल भी शामिल हैं। जब घटना हुई थी, तब केंद्रीय एजेंसी के ये चारों कर्मचारी 12 दिसंबर की शाम रामपुरहाट स्थित कैंप कार्यालय में मौजूद थे।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में बोगतुई नरसंहार के आरोपी ललन शेख की हिरासत में रहस्यमय तरीके से मौत के मामले में सीबीआई ने एक आंतरिक जांच के बाद अपने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जो रामपुरहाट में एजेंसी के उस कैंप कार्यालय में मौजूद थे, जहां पिछले साल 12 दिसंबर को शेख की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी। ललन शेख पिछले साल मार्च में बोगतुई नरसंहार में 9 लोगों की मौत का मुख्य आरोपी था।

सूत्रों ने कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में चारों अधिकारियों को निलंबित किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, निलंबित किए गए अधिकारियों में उपाधीक्षक विलास बाला मडघुत, इंस्पेक्टर राहुल प्रियोडोरशी के साथ-साथ दो अन्य कांस्टेबल भी शामिल हैं। जब घटना हुई थी, तब केंद्रीय एजेंसी के ये चार कर्मचारी 12 दिसंबर की शाम रामपुरहाट स्थित कैंप कार्यालय में मौजूद थे।


हालांकि, आंतरिक जांच के बाद, सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के मवेशी-तस्करी घोटाले के लिए एजेंसी के जांच अधिकारी सुशांत भट्टाचार्य को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन बाद में बीरभूम जिला पुलिस द्वारा ललन शेख की मौत पर एफआईआर में उनका नाम लिया गया था। जिसमें फिलहाल पश्चिम बंगाल पुलिस का आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) जांच कर रहा है।

सीबीआई सूत्रों ने आगे कहा कि निलंबित किए गए चार अधिकारियों के स्थान पर दूसरे अफसरों की व्यवस्था की जा चुकी है। सीबीआई सूत्रों ने कहा कि निलंबन एक मानक संचालन प्रक्रिया है। आमतौर पर, हिरासत में मौत के ऐसे मामलों में, जब आंतरिक जांच की जाती है तो संबंधित हिरासत के लिए जिम्मेदार लोग निलंबित रहते हैं। मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट को भी अवगत करा दिया गया है क्योंकि वहां ललन शेख की हिरासत में मौत का मामला चल रहा है।


इससे पहले 11 जनवरी को न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ललन शेख की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर संदेह व्यक्त किया था और संबंधित टिप्पणियों के लिए उसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली और कोलकाता में एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल दोनों को फॉरवर्ड किया था। सीबीआई ने पहले ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में राज्य पुलिस की एफआईआर को चुनौती दी हैा।

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