CDS बिपिन रावत का कर्नाटक में कोडागु के साथ था खास जुड़ाव, जानें इसके पीछे की पूरी कहानी

कोडागु बहादुर भारतीय सेना के सैनिकों की भूमि है। भारतीय सेना के सभी प्रमुखों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन रावत की जगह के साथ विशेष संबंध थे।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) दिवंगत जनरल बिपिन रावत, जिनकी भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई, ने कर्नाटक के कोडागु जिले के साथ एक विशेष बंधन (जुड़ाव) साझा किया था, जिसे सेना के जनरलों की भूमि माना जाता है। फील्ड मार्शल करियप्पा और जनरल थिमैया फोरम के संयोजक सेवानिवृत्त मेजर जनरल बिदंडा अयप्पा नानजप्पा ने याद करते हुए कहा कि दिवंगत सीडीएस रावत के मन में फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा और जनरल थिमैया के लिए बेहद सम्मान था। उन्होंने याद करते हुए कहा, "सीडीएस रावत ने चार बार कोडागु का दौरा किया था। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जनरल थिमैया संग्रहालय का उद्घाटन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।"

उन्होंने कहा, "वह 2016 में दक्षिणी कमान गोल्फ टूर्नामेंट के लिए आए थे, जब वह एक सेना कमांडर थे। दोपहर के भोजन के दौरान, उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह सेना प्रमुख को कोडागु लाएंगे। 2017 में दक्षिणी सेना कमांडर होने के नाते वह वादे के मुताबिक थल सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग के साथ आए थे। फिर, उन्होंने दिवंगत जनरल थिमैया संग्रहालय का दौरा किया और वित्तीय सहायता भी दी।"

नानजप्पा ने आगे कहा, "बाद में, हमने रावत से अनुरोध किया कि नई दिल्ली में दिल्ली परेड ग्राउंड का नाम फील्ड मार्शल करियप्पा के नाम पर रखा जाए और वहां एक प्रतिमा भी स्थापित की जाए और उसका अनावरण किया जाए। यह 30 अगस्त तक कर दिया गया था। इसमें उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। बाद में वह सीडीएस बन गए।"


उन्होंने कहा, "हमने सीडीएस रावत को कोडागु के गोनिकोप्पल शहर में करियप्पा और थिमैया की प्रतिमाओं के अनावरण के लिए फिर से आमंत्रित किया। फोरम के अनुरोध पर वह खुशी-खुशी आए और प्रतिमाओं का अनावरण किया।"

रावत को फिर से भारत के राष्ट्रपति, जो भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ हैं, को जनरल थिमैया संग्रहालय के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा, "स्वर्गीय रावत ने हमें कहा था कि जब सब कुछ तैयार हो जाए तो इस संबंध में एक पत्र लिखा जाए। जब हमने उन्हें इस संबंध में एक पत्र लिखा, तो 24 घंटे के भीतर भारत के राष्ट्रपति से पुष्टि के साथ उन्होंने हमें जवाब दिया।"

वह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ आए थे। जब वह आए तो उन्होंने हमारे लिए एक उपहार रखा था। उन्होंने कहा, "यह लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल छिब्बर को लिखे गए पत्र की एक प्रति थी। पत्र में लिखा गया था कि जनरल थिमैया को वर्ष 1961 में सीडीएस बनाया जाना चाहिए।"

नानजप्पा ने कहा, "रावत ने कोडागु के साथ एक विशेष प्यार और बंधन साझा किया था। उनके पिता ने गोरखा रेजिमेंट में सेवा की। कोडागु के लेफ्टिनेंट जनरल सोमन्ना ने भी उस रेजिमेंट में सेवा की। रावत ने कोडागु में सोमन्ना के घर का दौरा किया था। उनके पिता और जनरल बी. सी. नंदा (जो कोडागु से संबंध रखते हैं) अच्छे दोस्त थे। रावत भी नंदा के करीबी थे।"


उन्होंने आगे याद करते हुए कहा, "स्वर्गीय रावत अकादमी से पास आउट हुए थे, तीन साल बाद मैं पास आउट हो गया। वह मेरे प्रति बहुत स्नेही थे, उन्होंने हमारी मदद की।"

कोडागु बहादुर भारतीय सेना के सैनिकों की भूमि है। भारतीय सेना के सभी प्रमुखों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन रावत की जगह के साथ विशेष संबंध थे। उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि यह दो देशों द्वारा एक साजिश है। ताइवान के सेना प्रमुख भी एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए थे। विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। हमारे देश के राजनेता हमारे दुश्मन देश में जाते हैं और उनके साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करते हैं। फिर ये चीजें होना तो तय है। हमें लगता है कि यह एक साजिश है।"

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