मोदी के मुस्लिम विरोधी भाषणों पर मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान- "हमने जानबूझकर दोनों तरफ के नेताओं को कुछ नहीं कहा"

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मुसलमानों को लेकर भाषण दे रहे थे, तो इस पर आयोग ने कार्रवाई क्यों नहीं की। इस पर राजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा फैसला लिया।

सोमवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार (फोटो : विपिन)
सोमवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार (फोटो : विपिन)
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नवजीवन डेस्क

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर देश की दो बड़ी पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस के दो-दो शीर्ष नेताओं के बयानों पर किसी किस्म की रोकटोक नहीं लगाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामलों पर विस्तार से चर्चा करने के बाद तय किया गया था कि बीजेपी को नरेंद्र मोदी और अमित शाह और कांग्रेस के राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को किसी किस्म की ‘फटकार’ नहीं लगाई जाएगी। राजीव कुमार ने यह बात सोमवार को दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस के बाद वेबसाइट स्क्रॉल से बात करते हुए कही। स्क्रॉल का सवाल था कि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मुसलमानों को लेकर भाषण दे रहे थे, तो इस पर आयोग ने कार्रवाई क्यों नहीं की। इस पर राजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा फैसला लिया।

राजीव कुमार ने कहा, “हमने जानबूझकर फैसला किया - यह इतना बड़ा देश है - कि हमने दोनों पार्टियों के शीर्ष दो लोगों को नहीं छुआ। हमने दोनों पार्टियों के अध्यक्षों को समान रूप नोटिस दिया।" उन्होंने कहा कि, "आखिर हमने दो को इस तरफ और दो को उस तरफ क्यों छोड़ा? तो इस विशाल देश में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की भी कुछ जिम्मेदारी है। हमने उन्हें उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई।"

ध्यान दिला दें कि 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में चुनावी भाषण में दावा किया था कि कांग्रेस का घोषणापत्र कहता है कि वह लोगों की संपत्ति छीनकर घुसपैठियों और उन लोगों को दे देगी जिनके अधिक बच्चे होते हैं। याद रहे कि यहां संदर्भ मुस्लिम समुदाय से था। इसी भाषण में मोदी ने यह भी दावा किया था कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के गले का मंगलसूत्र छीनकर मुस्लिमों को बांट देगी।

इस भाषण के खिलाफ कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। लेकिन आयोग ने इन शिकायतों पर सिर्फ इतना किया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा को नोटिस भेजकर निर्देश दिया कि वे अपने सभी स्टार प्रचारकों को समझा दें कि वे अपने भाषणों में चुनाव आचार संहिता का पालन करें। नोटिस में नरेंद्र मोदी का नाम नहीं था।

लेकिन आयोग का यह नोटिस बेअसर रहा। 30 अप्रैल को ही प्रधानमंत्री ने तेलंगाना में कहा, ‘जब तक मोदी जिंदा है, वह भारतीय संविधान से एससी-एसटी और ओबोसी को मिले आरक्षण को मुसलमानों को किसी कीमत पर नहीं देने देंगे।’

इसके बाद 7 मई को मध्य प्रदेश में मोदी ने कहा कि, कांग्रेस की मंशा तो खेलों में भी अल्पंख्यकों को प्राथमिकता देने की है और वह धर्म के आधार पर तय करेगी कि क्रिकेट टीम में कौन खेले।


इन सारे सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग ने मोदी को नोटिस इसलिए नहीं दिया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिनमें चुनाव आयोग को मोदी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा, “वे लोग दो बार कोर्ट गए। कोर्ट के आदेश में लिखा है यह। एक बार दिल्ली हाईकोर्ट और एक बार सुप्रीम कोर्ट। बात यह है कि जब किसी बात पर फैसला हो गया तो उसे आप बार-बार नहीं दोहरा सकते।”

बता दें कि 14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत दायर याचिका पर कहा था कि याचिकाकर्ता को इस मामले में पहले चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए। लेकिन राजीव कुमार ने इतना जरूर कहा कि इन नेताओं को आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों की याद दिलाई गई थी।

यह पूछे जाने पर कि हेट स्पीच के आरोपी नेताओं के बजाए पार्टी अध्यक्षों को दिशा निर्देश भेजने का क्या प्रभाव रहा, उन्होंने कहा, “तो? पार्टी अध्यक्ष की फिर क्या हैसियत है? पार्टी अध्यक्षों को निर्देश देने के कारण ही दूसरी कतार के 80 फीसदी नेताओं ने फिर कुछ नहीं कहा।” दूसरी कतार के नेताओं से तात्पर्य पर राजीव कुमार ने कहा कि उनका मतलब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सर्मा, यूपी के सीएम आदित्यनाथ, केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से है।

स्क्रॉल ने लिखा है कि राजीव कुमार के दावों के विपरीत हिमंत बिस्वा सर्मा जोकि बीजेपी के स्टार प्रचारक है उन्होंने बार-बार मुस्लिम विरोधी भाषण दिए और यहां तक कहा कि असम के 1.25 करोड़ लोग बांग्लादेश से आए घुसपैठिए हैं। इसी तरह योगी आदित्यनाथ और अनुराग ठाकुर को भी आयोग नहीं रोक पाया। आदित्यनाथ ने यूपी की एक रैली में कहा था, “यह चुनाव राम भक्तों और राम द्रोहियों के बीच है...।” लेकिन आयोग ने उन्हें कोई नोटिस नहीं भेजा।

लेकिन राजीव कुमार ने स्क्रॉल से बातचीत में कहा कि आयोग ने “दूसरी तरफ के भी ऐसे ही मामलों को भी नहीं छुआ...।” उनका तात्पर्य विपक्षी दलों से था। उन्होंने कहा, “शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति को भी तो जिम्मेदार होने की एहसास दिलाने के लिए जगह देनी चाहिए।” उन्होंने कहा “अगर जयराम रमेश कुछ कहते हैं तो वे उच्च पद पर बैठे हैं, उन्हें जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। आप कब अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।”


ध्यान रहे कि चुनाव आयोग  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दिए निर्देश में कहा था कि वे अपनी पार्टी के स्टार प्रचारकों को समझाएं कि वे ऐसी बातें न करें कि संविधान बदल दिया जाएगा और न ही रक्षा बलों से जुड़े मामलों को प्रचार में उठाएं। इस बाबत विपक्षी दलों ने कहा था कि उन्हें सरकार की सैन्य भर्ची योजना अग्निवीर की आलोचना करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

विदित हो कि इस चुनाव में चुनाव आयोग की प्रभावशीलता और निष्पक्षता दोनों पर ही सवाल उठे हैं। बीजेपी नेताओं को नफरती भाषणों पर आयोग की निष्क्रियता, संभल और बीड में वोटरों को धमकाने, मतदान प्रतिशत के आंकड़ों में भारी बदलवा और समय से पूर्ण आंकड़े जारी न किए जाने को लेकर आयोग की आलोचना होती रही है।

यहां यह भी गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 16 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस के बाद सोमवार (3 जून को) को प्रेस कांफ्रेंस की है यानी पूरे 10 सप्ताह के बाद। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ क्योंकि पूर्व में हर मतदान के बाद आयोग प्रेस कांफ्रेंस करता रहा है।

(यह स्टोरी scroll.in पर पहले प्रकाशित हुई है, जिसे एडीआर के जगदीप चोकर ने शेयर किया है)

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