चंदा चोरी: चंपत राय-अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर सस्पेंस, VHP ने भी किया इनकार, अधिकारियों का दावा- दबाव अब भी बरकरार

विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने पुष्टि की कि अयोध्या में संगठन के कुछ वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उस बैठक में क्या चर्चा हुई या कोई निर्णय लिया गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

फोटो: सोशल मीडिया
i

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले के बीच शुक्रवार खबर आई थी कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन अब इस तरह की खबरों को नकारा जा रहा है। कहा जा रहा है कि विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने भी इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि अभी तक हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने स्पष्ट कहा कि संगठन को इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

उधर, खबर ये भी है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में की गई गंभीर टिप्पणियों और सिफारिशों के बाद दोनों पदाधिकारियों पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा है। हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अब भी चंपत राय का नाम महासचिव और अनिल मिश्रा का नाम ट्रस्टी के रूप में दर्ज है।

इस्तीफे की जानकारी नहीं- VHP

इस बीच, विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने पुष्टि की कि अयोध्या में संगठन के कुछ वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उस बैठक में क्या चर्चा हुई या कोई निर्णय लिया गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। वहीं, ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने भी किसी इस्तीफे की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे कुछ लोग तब तक संतुष्ट नहीं होंगे, जब तक चंपत राय का इस्तीफा नहीं हो जाता।

इस्तीफे से समाधान नहीं होगा-राजीव शुक्ला

एक और जहां कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि केवल चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा देने से पूरे मामले का समाधान नहीं होगा। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय का कहना है कि वह अब तक हुई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है और केवल इस्तीफा नहीं, बल्कि एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी भी होनी चाहिए।

अधिकारियों ने ये भी बताया है कि, छह दिनों तक चली जांच के बाद एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के बाद यह संकेत भी मिले कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा" वाली नीति के चलते मामले में कार्रवाई का दबाव बढ़ा है। इसी क्रम में एफआईआर में नामजद आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस्तीफे की चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया।

7 जून को मामले की हुई थी शुरुआत

आपको बता दें, इस पूरे मामले की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इसके बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया। जांच दल ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। 25 जून की रात इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई और 26 जून को अयोध्या पुलिस ने एफआईआर में नामजद आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए