छात्रों की गूंजः राहुल गांधी ने मनुस्मृति पर साधा निशाना, बोले- महिलाओं का अपना अस्तित्व, वे भारत की सबसे बड़ी ताकत

राहुल गांधी ने स्क्रीन पर पीएम मोदी के कुछ भाषण, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियां, बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर की टिप्पणी का वीडियो चलवाया और कहा कि महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है।

छात्रों की गूंजः राहुल गांधी ने मनुस्मृति पर बोला हमला, बोले- महिलाओं का अपना अस्तित्व, वे भारत की सबसे बड़ी ताकत
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में कांग्रेस के युवा संपर्क कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को संबोधित किया। लड़कियों पर केंद्रित पुणे के इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं का अपनी अस्तित्व है और उनकी पहचान को उनके पिता, पति या बेटों के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति के उस नियम को शर्मनाक बताया, जिसके अनुसार महिला को जीवन के हर चरण में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहना चाहिए।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इस शाम के पीछे का आइडिया है "पिंजरे को तोड़ो।" अगर इस शाम से मैं आपको एक बात याद दिलाना चाहता हूँ, तो वो ये है: आप में से हर कोई इस दुनिया में यूनिक है। आप यूनिक हैं। आप स्पेशल हैं। आप एक इंडिविजुअल हैं। और आपके पास अपनी ज़िंदगी के लिए अपना सपना, अपना विज़न है।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? मैं इस बारे में बहुत साफ़ हूँ कि भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है। भारत की सबसे बड़ी ताकत यहां की 70 करोड़ महिलायें है। ये 70 करोड़ अनोखी यात्राएँ, अनोखी कल्पनाएँ और अनोखे सपने हैं जिन्हें भारत की महिलाएँ जी रही हैं। महिलाएँ, स्वभाव से, पुरुषों की तुलना में ज़्यादा संवेदनशील, ज़्यादा कोमल, ज़्यादा दयालु और ज़्यादा आगे की सोचने वाली होती हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि जब भी मैं पुरुषों से बात करता हूं, तो पाता हूं कि औरतों को अक्सर सिर्फ तीन खानों में रखा जाता है: बेटी, पत्नी, या माँ। इनमें से किसी भी पहचान में कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन ये तुम्हारी अकेली पहचान नहीं हो सकतीं। औरतें प्रोफ़ेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर, एंटरप्रेन्योर और भी बहुत कुछ होती हैं। फिर भी अक्सर, उनकी पहचान सिर्फ़ मर्द के साथ उनके रिश्ते से ही तय होती है।


राहुल गांधी ने कहा, ‘‘मैं यहां मनुस्मृति का जिक्र करना चाहूंगा, जिसमें कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन रहना चाहिए, जवानी में वह अपने पति के अधीन होती है और जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों के अधीन होती है। महिला को कभी भी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए। ये शब्द शर्मनाक हैं। ये शब्द नहीं कहे जाने चाहिए। लेकिन मेरा मानना है कि इस देश की सबसे बड़ी ताकत यह है कि हमारी औरतें आज़ाद हों, अपने लिए खड़ी हों, और खुद पर विश्वास करें। तुम्हारे अपने पिता, भाई, पति, या बेटे के साथ रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन तुम उनकी नहीं हो। तुम अपनी हो।

राहुल गांधी ने कहा कि समाज महिलाओं को कंट्रोल करने की कोशिश करता है। और इस कंट्रोल के चार तरीके हैं: हिंसा, बेइज्ज़ती, समय और कंट्रोल। यह ज़ुल्म चिंता के रूप में छिपा होता है: "हमें आपकी बहुत चिंता है। इसलिए हमें आपको कंट्रोल करने की ज़रूरत है।" उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है। इस हिंसा के तीन तरीके हैं:

शारीरिक हिंसाः सालाना 4.5 लाख बेटियों की भ्रूण हत्या। 80% महिलाओं के साथ उत्पीड़न। 29% महिलाओं के साथ शारीरिक हिंसा और 6% महिलाओं के साथ बलात्कार होते हैं।

अवसर हिंसाः 50% महिलाओं को सुरक्षा के नाम पर शिक्षा या काम से रिजेक्शन झेलना पड़ता है।

वित्तीय हिंसाः सुरक्षित यात्रा के नाम पर सालाना 17,500 रुपए का अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश में महिलाओं को कंट्रोल करने के तरीके समझिए। Mobility: 60% महिलाएं घर से अकेले बाहर नहीं जा सकती। पसंद: 45% महिलाएं शादी/घर की जिम्मेदारी के चलते कॉलेज या करियर छोड़ जाती हैं। आर्थिकः 8% महिलाओं के पास ही जमीन का मालिकाना हक है।

राहुल गांधी ने कहा कि हमारे देश में अपमान कई तरीके का हैः समाज में शर्म के कारण यौन हिंसा के 99% मामले रिपोर्ट ही नहीं होते। काम करने के लिए 84% महिलाओं को घर से परमिशन लेनी पड़ती है। काम में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 25% कम सैलरी मिलती है और आसानी से प्रमोशन नहीं मिलता।


राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ टाइम को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एक लड़की या महिला घर में औसतन 5.5 घंटे काम करती है, जबकि उसी घर में लड़के/पुरुष सिर्फ 30 मिनट काम में हाथ बंटाते हैं। रात में घर वापस आने का समय लड़कियों या महिलाओं के लिए 8 बजे तय होता है, जबकि लड़कों के मामले में ऐसा नहीं है। लड़के नौकरी के लिए कई बार परीक्षाएं दे सकते हैं, लेकिन लड़कियों को ज्यादा मौके नहीं दिए जाते और उनसे कहा जाता है- अब शादी की उम्र हो गई है!

राहुल गांधी ने स्क्रीन पर पीएम मोदी के कुछ भाषण, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियां, बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर की टिप्पणी का वीडियो चलवाया और कहा कि महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है। उन्होंने कहा कि ये लोग चाहते हैं कि लड़कियां/महिलाएं पिंजरे में बंद रहें। लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि सम्मान सभी का हो।

कार्यक्रम में कई लड़कियों और महिलाओं ने स्टेड पर आकर अपनी बात रखी। इनमें भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौर भी थीं। नेहा ने कहा कि मैं सरकार से उन तमाम मुद्दों पर सवाल पूछती हूं, जो सरकार को पसंद नहीं आते। इसके बदले मुझे ढेर सारी गालियां और केस झेलनी पड़ती हैं। लोकतंत्र में अगर हम अपने प्रधानमंत्री से सवाल नहीं पूछ सकते, तो फिर यह कैसी आज़ादी और कैसा लोकतंत्र है? मुझे लगता है कि एक महिला के लिए समाज में अपनी पहचान बनाना और सामाजिक मुद्दों पर मुखर होकर बोलना बेहद मुश्किल है। जैसे ही कोई महिला अपनी आवाज उठाती है, उसके सवालों का जवाब देने के बजाय उसे 'चरित्र का सर्टिफिकेट' दे दिया जाता है। इस दौरान नेहा ने स्टेज पर कुछ गाने भी सुनाए।


एक स्थानीय कॉलेज के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवतियां मौजूद थीं। कार्यक्रम के दौरान बीच-बीच में कई लड़कियों ने मंच पर आकर अपने अनुभव साझा किए और अपने मुद्दे उठाए। इस दौरान महाराष्ट्र की एक आदिवासी लड़की ने आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा उठाया। वहीं एक कॉलेज की छात्रा ने कॉलेज में पेपर लीक का मुद्दा उठाया। अंत में राहुल गांधी ने मंच पर लड़कियों के साथ फोटो भी खिंचवाई।

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