छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला अस्पताल में इंसानियत शर्मसार! मासूम ने मां की गोद में ही तोड़ा दम, नहीं मिली एंबुलेंस

रात हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन ने रात होने के बावजूद भी मृत बच्चे और परिजनों को एंबुलेंस से उनके घर तक छोड़ने की जहमत तक नहीं उठाई। बड़ी मुश्किल से शव को घर छोड़ने के लिए एंबुलेंस की मदद मिल पाई।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के लिए एंबुलेंस नहीं मिलने पर यहां एक 9 महीने के बच्चे ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत के बाद मां शव को लेकर काफी देर तक बिलखती रही। आलम यह है कि बच्चे के शव को घर ले जाने के लिए अस्पातल के अधिकारियों ने एंबुलेंस मुहैया नहीं करवाया। काफी मशक्कत के बाद शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मिली।

पूरा मामला क्या है?

नारायणपुर जिले के बाहकेर गांव का यह दंपति अपने 9 महीने के बीमार बच्चे को लेकर पहले छोटे डोंगर उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। यहां से डॉक्टर ने बच्चे को जिला अस्पताल नारायणपुर रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन बच्चे को लेकर शनिवार देर शाम जिला अस्पताल नारायणपुर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, यहां पहले डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति सामान्य बताते हुए बच्चे की हालत को खतरे से बाहर बताया।

परिजनों के मुताबिक, कुछ देर बाद अचानक डॉक्टरों ने बच्चे को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करने की बात कही। बच्चे के माता-पिता घबरा गए और उन्होंने अपने बच्चे को निजी अस्पताल ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से एंबुलेंस की मांग की। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस की मदद नहीं दी। यही नहीं अस्पताल प्रबंधन ने कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें अस्पताल से जाने के लिए कह दिया। परिजन अपने बच्चे को दूसरे अस्पताल में मोटरसाइकिल से ले जाने वाले थे, इसी दौरान अस्पताल के दरवाजे पर ही बच्चे ने मांग की गोद में दम तोड़ दिया।


बड़ी मुश्किल से शव को घर छोड़ने के लिए मिली एंबुलेंस

रात हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन ने रात होने के बावजूद भी मृत बच्चे और परिजनों को एंबुलेंस से उनके घर तक छोड़ने की जहमत तक नहीं उठाई। जैसे यह खबर स्थानीय मीडियाकर्मियों को लगी वह मौके पर पहुंचे और प्रभारी कलेक्टर को घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद प्रभारी कलेक्टर जितेंद्र कुर्रे ने मौके पर तहसीलदार को भेजा।

तहसीलदार के दखल के बाद अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस की मदद दी। इसके बाद दंपति मृत बच्चे को लेकर अपने घर पहुंचा। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है।

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