छत्तीसगढ़ की BJP सरकार में महिलाओं के रोजगार पर 'ताला'! अधर में कांग्रेस कार्यकाल में शुरू की गई वर्मी कंपोस्ट खाद योजना

वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण का काम बंद होने से इसका सीधा असर महिलाओं पर पड़ा है। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण का काम महिला स्व सहायता समूह के द्वारा गौठानों में किया जाता था।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जो योजनाएं शुरू की गई थीं वह अब अधर में लटकती नजर आ रही हैं। अधर में लटकी योजनाओं में राजीव गांधी किसान न्याय योजना अहम है। इस योजना के तहत गौठानों में वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण का काम शुरू किया गया था। जो अब पूरी तरह से ठप हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 270 मेंकरीब 10 हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद बिक्री के अभाव में पड़ा हुआ है। अब इसकी बिक्री होगी भी या नहीं इस पर संशय है।

वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण का काम बंद होने से इसका सीधा असर महिलाओं पर पड़ा है। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण का काम महिला स्व सहायता समूह के द्वारा गौठानों में किया जाता था। महिलाओं को इस योजना से अच्छी कमाई होती थी। लेकिन काम बंद होने से महिलाओं की रोजी-रोटी पर सीधे असर पड़ेगा।

'एबीपी न्यूज़ लाइव' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बस्तर जिले में पिछले 4 सालों में करीब 6 करोड़ से ज्यादा का वर्मी कंपोस्ट खाद, स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बेचा था। लेकिन अब गौठानों में खाद बनाया ही नहीं जा रहा है और ना ही यहां बनकर तैयार की हुई खाद की बिक्री को लेकर प्रशासन कोई कदम उठा रहा है। आरोप है कि इस मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारी कोई उचित जवाब भी नहीं दे रहे हैं।

साल 2020 में इस योजना की शुरूआत की गई थी। तब से अब तक महिला समूह द्वारा 78 हजार 570 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई गई। 10 रुपए प्रति किलो के रेट पर करीब 6 करोड़ रुपए का खाद बेचा भी गया। हाल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद खाद के उत्पादन और बिक्री में कमी होने लगी। अब कंपोस्ट खाद बेचने की योजना पूरी तरह से अधर में लटक गई है।

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