बिना बहस कृषि कानूनों की वापसी पर भड़के चिदंबरम, सरकार पर कटाक्ष कर कहा-'चर्चा रहित’ संसदीय लोकतंत्र जिंदाबाद

ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, उन्होंने कहा: "संसद सत्र की पूर्व संध्या पर, प्रधानमंत्री ने किसी भी मुद्दे पर बहस करने की पेशकश की।" और पहले ही दिन कृषि बिल बिना किसी बहस के पारित हो गया। उन्होंने कहा एक बहस को नकारने का कृषि मंत्री का तर्क चौंकाने वाला था।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

संसद में बिना किसी बहस के कृषि कानून निरसन विधेयक पारित होने के एक दिन बाद, कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'लंबे समय तक बहस-रहित संसदीय लोकतंत्र जीवित रहे!' ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, उन्होंने कहा: "संसद सत्र की पूर्व संध्या पर, प्रधानमंत्री ने किसी भी मुद्दे पर बहस करने की पेशकश की।" और पहले ही दिन कृषि बिल बिना किसी बहस के पारित हो गया।

एक बहस को नकारने का कृषि मंत्री का तर्क चौंकाने वाला था, उन्होंने कहा, "जब सरकार और विपक्ष सहमत होते हैं तो बहस की कोई आवश्यकता नहीं होती है! उन्होंने कहा, "बिना किसी बहस के विधेयक को पारित कर दिया गया जब दोनों पक्ष सहमत नहीं थे, जो भी हो, कोई बहस नहीं हुई! लंबे समय तक बहस-रहित संसदीय लोकतंत्र जीवित रहे।"

इधर, राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने आज 12 सांसदों के निलंबन को रद्द करने के अनुरोध को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि सभापति को कार्रवाई करने का अधिकार है और सदन भी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले मानसून सत्र का कड़वा अनुभव आज भी हममें से अधिकांश लोगों को परेशान करता है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जिन 12 सदस्यों को निलंबित किया गया उन्हें वापस लेने के लिए आज हम अध्यक्ष महोदय से मिले और उनसे आग्रह किया गया। पिछले सत्र में जो घटना हुई थी फिर उसे उठाकर फिर से सदस्यों को निलंबित करना गैरक़ानूनी है और नियमों के खिलाफ है।” उधर, 12 सांसदों के निलंबन का असर संसद के दोनों सदनों में देखा गया। सभापति एम वेंकैया नायडू द्वारा 12 सांसदों के निलंबन रद्द करने की अपील खारिज किए जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा और लोगसभा से वॉकआउट किया।

कांग्रेस नेता अधीरंजन चौधरी ने कहा, “हमने राज्यसभा के उन 12 विपक्षी सदस्यों का समर्थन करने के लिए लोकसभा से वॉकआउट किया है, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है। मौजूदा शीतकालीन सत्र से निलंबन की कार्रवाई 'पूर्वव्यापी प्रभाव' की ओर इशारा करती है। माफी क्यों जारी की जानी चाहिए?” अधीरंजन चौधरी ने कहा, “रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट चल रहा है। सरकार का ये नया तरीका है। हमें डराने का, धमकाने का, हमें जो अपनी बात रखने का अवसर मिलता है उसे छीनने का नया तरीका है। यहां पर जमींदारी या राजा नहीं है कि हम बात-बात पर इनके पैर पकड़ें और माफी मांगें। यह जबरदस्ती क्यों माफी मंगवाना चाहते हैं। इसे हम बहुमत की बाहुबली कह सकते हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।” 12 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द करने की मांग को लेकर विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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