मोदी सरकार में चीन बना भारतीय बाजार में बादशाह, 60 फीसदी बड़े स्टार्टअप्स में ड्रैगन की बड़ी हिस्सेदारी

साल 2014 में भारत की कंपनियों में चीन की कंपनियों का 51 मिलियन डॉलर निवेश था। लेकिन 2019 में बढ़कर यह निवेश 1230 मिलियन डॉलर हो गया। यानी 2014 से 2019 के बीच चीन ने भारतीय स्टार्टअप्स में कुल 5.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया। और ये सब मोदी सरकार के दौर में हुआ।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध के बीच 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। एलएसी के करीब दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। वहीं देश के अंदर भी चीन के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर है। विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा लोग चीन को सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए सारे आर्थिक संबंध भी तोड़ने की मांग कर रहे हैं।

लेकिन इन सब गहमागहमी के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह संभव है? और क्या मोदी सरकार में ऐसा हो सकता है? क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5-6 सालों में जब से मोदी सरकार आई है, तब से भारतीय कंपनियों में चीन के पैसा लगाने की रफ्तार लगातार बढ़ी है। चीन की एक-दो नहीं, कई बड़ी कंपनियों ने भारत में लगातार बड़ा निवेश किया है और यह लगाता जारी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2014 में भारत की कंपनियों में चीन की कंपनियों ने 51 मिलियन डॉलर निवेश किया था। लेकिन 2019 में बढ़कर यह निवेश 1230 मिलियन डॉलर हो गया। यानी 2014 से 2019 के बीच चीन ने भारतीय स्टार्टअप्स में कुल 5.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। पिछले 7 साल के दौरान 2017 में चीन ने भारत में सबसे ज्यादा 1666 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। चीन की जिन प्रमुख कपंनियों ने भारत में निवेश किया उनमें अलीबाबा, टेंशेट और टीआर कैपिटल सहित कई दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

इसके अलावा भारत की 30 यूनिकॉर्न, यानी एक अरब डॉलर (करीब 7600 करोड़ रुपए) या उससे अधिक वैल्यू वाली कंपनियों में से 18 में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है। यूनिकॉर्न एक निजी स्टार्टअप कंपनी को कहते हैं जिसकी वैल्यूएशन एक अरब डॉलर या उससे अधिक होती है। मुंबई स्थित थिंक टैंक 'गेटवे हाउस' के अनुसार भारत में ई-कॉमर्स, फिनटेक, मीडिया/सोशल मीडिया, एग्रीकल्चर सर्विसेज और लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाओं में ऐसी 75 कंपनियां हैं, जिनमें चीन का भारी निवेश है। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी क्षेत्र में ज्यादा निवेश के कारण चीन ने भारतीय बाजार पर कब्जा जमा लिया है।

स्मार्टफोन बाजार की बात करें तो इसमें चीन की अकेले 70% से ज्यादा हिस्सेदारी है। भारत में स्मार्टफोन का बाजार करीब 2 लाख करोड़ रुपए का है और चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों ने इस पर अपनी पकड़ बना ली है। ओप्पो, श्याओमी और रेडमी जैसे चाइनीज ब्रैंड ने 70% से ज्यादा मोबाइल मार्केट पर कब्जा कर रका है। इसी तरह 25 हजार करोड़ के भारतीय टेलीविजन मार्केट में भी चीनी कंपनियों का 45% तक कब्जा है।

यह तो केवल बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स में हिस्सेदारी का आंकड़ा है। इसके अलावा तमाम छोटे कलपुर्जे से लेकर तमाम उत्पादन के लिए हर तरह के कच्चे माल के लिए भारतीय उद्योग जगत चीन पर ही निर्भर है। और ये सब कुछ मोदी सरकार के दौर में हुआ। मोदी सरकार ने एक तरह से भारतीय बाजार में चीन की पूरी तरह पैठ जमवा दी है। अब ऐसे में तनाव बढ़ने से नुकसान तो दोनों देशों को होगा, लेकिन भारत पर अधिक असर पड़ सकता है।

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