पैंगोंग झील के पास चीन बिछा रहा ऑप्टिकल फाइबर का जाल, सैटेलाइट तस्वीरों से खुली पोल

ऑप्टिकल फाइबर केबल से सेना के बीच संचार सुरक्षित होने के साथ-साथ तस्वीरें और कई तरह के दस्तावेज जैसे अहम डाटा भी भेजे जा सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञ के अनुसार अगर आप रेडियो पर बोलते हैं तो इसे पकड़ा जा सकता है, लेकिन ऑप्टिकल फाइबर केबल से संवाद सुरक्षित है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

भारत की तमाम कोशिशो के बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है, बल्कि अब और भी खतरनाक मंसूबे पर काम कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन लद्दाख में पैंगोंग झील के आसपास के इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रहा है। विदेशी न्यूज एजेंसी के अनुसार चीन के इस चाल की पोल सैटेलाइट तस्वीरों से खुली है, जिसके बाद भारतीय अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। खास बात ये है कि यह खुलासा ऐसे समय हुआ है, जब चीन पर भारत के प्रधानमंत्री से लेकर कई बड़े नेताओं की जासूसी का खुलासा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन एलएसी पर तैनात अपने जवानों के साथ बेहतर और सुरक्षित संवाद स्थापित करने के लिए पैंगोंग झील इलाके में तेजी से ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रहा है। यह खबर भारत के दो अधिकारियों के हवाले से सामने आई है, जिसके मुताबिक भारत के साथ लगे हिमालय के सीमावर्ती इलाकों में चीन ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क बिछा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए उच्चस्तरीय बातचीत जारी होने के बावजूद चीन की सेना वहां खुदाई में जुटी हुई है। हाल ही में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिण में चीन की इस हरकत को देखा गया है। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन का यह प्रयास सीमा पर तैनात अपने जवानों के बीच सुरक्षित संवाद व्यवस्था स्थापित करने के लिए है। फिलहाल चीन के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ओर से सेनाओं में कोई कमी नहीं की गई है और पहले की तरह ही तनाव बरकरार है। लद्दाख के प्रमुख शहर लेह में सुबह से ही लड़ाकू विमानों का शोर शुरू हो जाता है। खबर के अनुसार एक अधिकारी ने पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सबसे बड़ी चिंता ये है कि “उन्होंने हाई-स्पीड कम्युनिकेशन के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाए हैं।” उन्होंने कहा कि वे खतरनाक गति से ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रहे हैं। उनका इशारा उस जगह की तरफ था जहां दोनों देशों के जवान एक-दूसरे से कुछ सौ मीटर की दूरी पर तैनात हैं।

एक अन्य अधिकारी ने रिपोर्ट में बताया कि करीब एक महीने पहले भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी क्षेत्र में इसी तरह के केबल बिछाए जाने को लेकर अलर्ट किया था। अधिकारी ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों में ऊंचाई पर स्थित मरुस्थल में रेत में असामान्य लाइनें नजर आने के बाद इसके बारे में अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक केबल बिछाने की बात रक्षा एक्सपर्ट ने भी मानी है और विदेशी खुफिया एजेंसियों ने भी इसकी पुष्टि की है।

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मिलिट्री इंटेलिजेंस के एक पूर्व अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि ऑप्टिकल फाइबर केबल से सेना के बीच संचार सुरक्षित होने के साथ-साथ तस्वीरें और कई तरह के दस्तावेज जैसे अहम डाटा भी भेजे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप रेडियो पर बोलते हैं तो इसे पकड़ा जा सकता है, लेकिन ऑप्टिकल फाइबर केबल से संवाद सुरक्षित है।

Published: 14 Sep 2020, 10:17 PM
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