LJP पर कब्जे की लड़ाई पहुंची चुनाव आयोग, चिराग ने कहा- मिलेगा साबित करने का मौका

चिराग पासवान ने कहा कि कुछ लोगों को पार्टी से निलंबित किया गया है। ये लोग कहीं न कहीं पार्टी के नाम पर दावा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसीलिए हम चुनाव आयोग से मिलने के लिए आए थे। आयोग ने आश्वासन दिया है कि हमें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

फोटोः विपिन
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नवजीवन डेस्क

बिहार के दिवंगत कद्दवार नेता रामविलास पासवान की बनाई पार्टी एलजेपी पर कब्जे के लिए उनके बेटे और भाई के बीच जारी लड़ाई अब दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग में पहुंच गई है। शुक्रवार को चिराग पासवान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। मुलाकात के बाद चिराग ने कहा कि चुनाव आयोग ने हमें आश्वासन दिया है कि अगर कोई एलजेपी के नाम पर दावा साबित करने की कोशिश करता है, तो हमें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

इस दौरान चिराग पासवान ने कहा कि 2019 में मुझे 5 साल के लिए एलजेपी का अध्यक्ष चुना गया था। चिराग ने बताया कि कुछ लोगों को पार्टी से निलंबित किया गया है, जिनमें 5 सांसद, 2 प्रदेश अध्यक्ष, एक राष्ट्रीय महासचिव और एक पार्टी के प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग कहीं न कहीं पार्टी के नाम पर दावा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसीलिए हम चुनाव आयोग से मिलने के लिए आए।

चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस को एक दिन पहले उनके गुट द्वारा पार्टी अध्यक्ष चुने जाने को खारिज करते हुए कहा कि पटना में आयोजित बैठक पूरी तरह असंवैधानिक थी और इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों का कोरम यानी न्यूनतम उपस्थिति भी नहीं थी। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पारस के नेतृत्व वाले गुट को उसकी बैठकों में पार्टी का चिह्न और झंडे का इस्तेमाल करने से रोकने की मांग की है।


इसके एक दिन पहले चिराग के चाचा और एलजेपी के सांसद पशुपति कुमार पारस के गुट ने पटना में उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया है। पारस ने चार सांसदों के साथ मिलकर हाल ही में पार्टी में तख्तापलट करते हुए अपने भतीजे चिराग पासवान को लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया था। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने भी पारस के एलजेपी संसदीय दल के नेता के तौर पर मान्यता दे दी थी। इसके बाद बागी गुट ने चिराग को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटाकर पारस को अध्यक्ष घोषित कर दिया था।

अपनी पार्टी में विभाजन के लिए चिराग पासवान ने जनता दल (यूनाइटेड) को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही उन्होंने खुद को ‘शेर का बेटा’ बताते हुए कहा कि वह अपने पिता रामविलास पासवान द्वारा स्थापित पार्टी के लिए लड़ेंगे। वहीं चाचा पशुपति कुमार पारस ने चिराग पासवान पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए खुद को पार्टी के संसदीय दल का नेता चुने जाने को पार्टी के संविधान के अनुरूप बताया है।


फिलहाल एलजेपी की यह लड़ाई जारी रहने की संभावना है। अब सभी की निगाहें चिराग पासवान द्वारा 20 जुलाई को दिल्ली में बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पर टिकी हैं कि उसमें कितने लोग आते हैं और क्या निर्णय होचा है। इस बीच चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति पारस को लोकसभा में पार्टी के नेता के तौर पर मान्यता दिए जाने का विरोध करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है, जिसमें इसे एलजेपी के संविधान के खिलाफ बताया है।

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