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मोदी-बीजेपी से नजदीकियों के चलते तमिलनाडु में एडीएमके का सफाया होगा, डीएमके-कांग्रेस की वापसी: सर्वे

तमिलनाडु में अगर आज चुनाव हों तो एडीएमके को प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी से नजदीकियों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और उसका सफाया हो सकता है। सर्वे में सामने आया है कि विधानसभा चुनाव में वह आखिरी नंबर पर रहेगी, तो लोकसभा चुनाव में उसे कम से कम 30 सीटों की नुकसान होगा।

फोटो : सोशल मीडिया

नवजीवन डेस्क

तमिलनाडु में अगर आज चुनाव हों तो किसके हिस्से में क्या आएगा? क्या एआईएडीएमके फिर से सत्ता पर काबिज होगी या फिर उसका सफाया होगा और डीएमकी की सत्ता में वापसी होगी? क्या कांग्रेस को कुछ फायदा होगा? क्या बीजेपी के हाथ कुछ लगेगा? और अगर लोकसभा का चुनाव भी आज ही हो जाए तो तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से किसे कितनी सीटें मिलेंगी? इन्हीं सब सवालों के जवाब दिए हैं तमिलनाडु के समाचार संस्थान स्पिक मीडिया नेटवर्क ने। रविवार को जारी “फेट ऑफ द नेशन” नाम के सर्वे में तमिलनाडु विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनाव का अनुमान लगाया गया है।

इस सर्वे में सामने आया है कि अगर आज चुनाव हुए तो विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके का सफाया हो जाएगा, और डीएमके के हाथों में सत्ता होगी, हालांकि उसकी सीटें बहुमत से कुछ कम रहेंगी। डीएमके की सहयोगी कांग्रेस की सीटें दोगुनी हो जाएंगी। डीएमके को होने वाले चुनावी फायदे के अनुमानों से राजनीतिक विश्लेषक आश्चर्यचकित नहीं हैं, क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति कुछ दशक से दो पार्टियों के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही है। एडीएमके को होने वाले नुकसान का कारण जयललिता की मौत और एक दशक तक शासन में रहने के कारण सत्ता विरोधी लहर भी हो सकती है।

इस सर्वे से जो चौंकाने वाले अनुमान सामने आए हैं, वह हैं शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन की पार्टी अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कषगम यानी एएमएमके भी एआईएडीएमके को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। एआईएडीएमके और एएमएमके दोनों ही जयललिता की विरासत पर अपना हक समझते हैं। हाल ही में दिनाकरन ने जयललिता की परंपरागत सीट आर के नगर से भारी जीत हासिल की है।

एआईएडीएमके को एक बात और नुकसान पहुंचा रही है, वह है तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलनीस्वामी और डिप्टी सीएम ओ पनीरसेल्वम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी से नजदीकियां। तमिलनाडु में बीजेपी का कोई नामलेवा तक नहीं है और इसका सबूत आर आर नगर उपचुनाव से भी मिला था जहां बीजेपी उम्मीदवार को नोटा से भी कम वोट मिले थे।

हालांकि 2014 की मोदी लहर में बीजेपी के पी राधाकृष्णन ने कन्याकुमारी से जीत हासिल की थी। तमिलनाडु में कमल खिलने के कारण ही राधाकृष्णन को मोदी सरकार को मंत्री बनाया गया था। लेकिन सर्वे बताता है कि 2019 में राधाकृष्णन भी सीट नहीं बचा पाएंगे और तमिलनाडु में बीजेपी की टैली फिर से जीरो हो जाएगी।

स्पिक मीडिया के अनुमान 
स्पिक मीडिया के अनुमान 
2017 की जगह 2016 पढ़ा जाए

सर्वे के अनुमान के मुताबिक एआईएडीएमके को ज्यादा से ज्यादा 7 सीटें मिल सकती हैं, जबकि 2014 में उसने 39 में से 37 सीटें जीती थीं। सर्वे में सामने आया है कि दिनाकरन की एएमएमके कम से कम 6 सीटें जीत सकती है जबकि डीएमके के हिस्से में करीब 24 आने की संभावना है।

यह सर्वे 5 मई से 6 जून के बीच किया गया। इस सर्वे के दौरान ही 22 मई को तुतिकोरिन में पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की जान गई थी। स्पिक का कहना है कि उसके 401 प्रशिक्षित सर्वेयर्स ने राज्य की 349 जगहों पर कम से कम 3000 लोगों से बातचीत की। सर्वे में तमिलनाडु की 234 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया।

इस सर्वे की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

विधानसभा चुनाव

  • डीएमके को 234 में से 114 सीटें मिल सकती है, कांग्रेस के हिस्से में 16 सीटें आएंगी
  • दिनाकरन की पार्टी एएमएमके 57 सीटों के साथ धमाकेदार एंट्री कर सकती है
  • एआईएडीएमके का सफाया हो जाएगा और वह 41 सीटों के साथ आखिरी नंबर पर आ जाएगी
  • बीजेपी का खाता भी नहीं खुलेगा
  • रजनीकांत की लोकप्रियता कमल हासन से ज्यादा है, लेकिन दोनों ही की पार्टियों को कोई सीट मिलने की संभावना नहीं है
  • नरेंद्र मोदी सरकार को तमिलनाडु के हितों की चिंता नहीं है

लोकसभा चुनाव

  • डीएमके के हिस्से में 39 में से 24 सीटें आएंगी
  • एआईएडीएमके की सीटें 37 से घटकर सिर्फ 7 हो सकती हैं
  • कांग्रेस एक सीट पर जीत हासिल कर सकती है
  • एएमएमके 7 सीटें जीत सकती है
  • बीजेपी के पी राधाकृष्णन कन्याकुमारी सीट हार सकते हैं

स्पिक मीडिया इससे पहले गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में एक्जिट पोल किए थे। गुजरात में स्पिक ने बीजेपी को 85 और कांग्रेस के लिए 76 सीटों का अनुमान लगाया था। आखिरी नतीजों में बीजेपी ने 99 और कांग्रेस ने 78 सीटें जीती थीं। इसी तरह कर्नाटक में स्पिक ने कांग्रेस के हिस्से में 101 और बीजेपी के खाते में 89 सीटें जाने का अनुमान लगाया था, वहीं जेडीएस के हिस्से में 26 सीटों का अनुमान था। आखिरी नतीजों में बीजेपी ने 104, कांग्रेस 78 और जेडीएस ने 36 सीटें जीती थीं।

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