यूपीः उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, योगी से ज्यादा पार्टी की चली

दो लोकसभा सीटों के उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार से सकते में आई यूपी की योगी सरकार ने प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। हालांकि, इस फेरबदल में पार्टी नेतृत्व की भूमिका साफ नजर आ रही है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद प्रदेश की अफसरशाही में बड़ा फेरबदल किया है। उपचुनाव के नतीजे आने के बाद लगातार दो दिनों तक मंथन के बाद योगी आदित्यनाथ ने 16 मार्च की देर रात प्रदेश के 16 जिलों के डीएम समेत 37 आईएएस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी कर दिया। इसमें गोरखपुर सहित 16 जिलों के डीएम और वाराणसी सहित चार मंडलों के आयुक्तों का तबादला किया गया है। हटाए गए जिलाधिकारियों में बलिया, गोरखपुर, आजमगढ़, बरेली, महाराजगंज, चंदौली, बलरामपुर, महाराजगंज, पीलीभीत, अलीगढ़, भदोही, अमरोहा, सीतापुर, सोनभद्र, हाथरस, हापुड़ के जिलाधिकारी शामिल हैं।

लेकिन इस तबादले में ब्राह्मण वर्ग से आने वाले अधिकारियों का विशेष ध्यान रखा गया है। जानकारों का कहना है कि इससे साफ संकेत मिलता है कि इस तबादले में सरकार से ज्यादा पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की चली है। योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से गाहे-बगाहे मीडिया में ये खबरें आती रही हैं कि प्रदेश के ब्राह्मण योगी सरकार से नाराज चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय सहित प्रदेश के कई बड़े बीजेपी नेता योगी सरकार की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे थे। पहले भी कई मौकों पर प्रदेश नेतृत्व और योगी आदित्यनाथ के बीच विवादों की खबरें आती रही हैं। हालांकि, अधिकारियों के तबादले में जातीय समीकरण का भी पूरा ख्याल रखने की कोशिश की गई है। लेकिन स्पष्ट तौर पर क्षत्रिय दबदबा कम होता नजर आ रहा है।

वहीं इस नये तबादले में 14 मार्च को उपचुनाव की मतगणना के दौरान पक्षपात करने के आरोपी गोरखपुर डीएम को पदोन्नति देते हुए उन्हें देवीपाटन का मंडलायुक्त बना दिया गया है। गोरखपुर डीएम रहे राजीव रौतेला मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं और उन्हें सीएम योगी का बेहद करीबी माना जाता है। रौतेला को इससे पहले जनवरी में ही विशेष सचिव स्तर से सचिव एवं आयुक्त स्तर पर पदोन्नति मिल गई थी, लेकिन फिर भी उन्हें कई कारणों का बहाना बनाकर उपचुनाव तक गोरखपुर में ही तैनात रखा गया। इस बात की पुष्टी मतगणना के दिन गोरखपुर में हुए हंगामे से हो जाती है। उपचुनाव की मतगणना में रौतेला की भूमिका पर विपक्ष ने सड़क से लेकर विधानसभा तक सवाल उठाए। यहां तक कि सत्तारूढ़ दल बीजेपी के कई स्थानीय नेताओं की ओर से भी रौतेला की कार्यशैली पर ऊंगली उठाई जा चुकी है।

उत्तराखंड के मूल निवासी राजीव रौतेला पहले भी कई बार विवादों में आ चुके हैं। पिछले साल गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से नवजात बच्चों की मौत के समय भी रौतेला वहीं तैनात थे, लेकिन तमाम दबावों के बावजूद योगी सरकार ने उन्हें नहीं हटाया। इसके अलावा इससे पहले रामपुर में तैनाती के दौरान अवैध खनन से जुड़े मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी उनके खिलाफ सख्त आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रौतेला को निलंबित करने का आदेश दिया था। लेकिन योगी सरकार ने अदालत के आदेश की अनदेखी करते हुए न सिर्फ रौतेला के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उन्हें गोरखपुर में ही तैनात रखा। इन सबके बावजूद वह मंडलायुक्त जैसी सम्मानजनक पोस्टिंग पाने में सफल रहे हैं।

वहीं बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह का भी तबादला कर दिया गया है। सिंह अगले डेढ़ महीने में रिटायर होने वाले हैं। उन्हें कृषि उत्पादन में विशेष सचिव बनाया गया है। राघवेंद्र ने कासगंज दंगे के दौरान फेसबुक पर एक टिप्पणी की थी, जिसे सरकार ने आपत्तिजनक मानते हुए जवाब-तलब किया था। उनके स्थान पर महाराजगंज के डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को बरेली का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

प्रशासनिक फेरबदल के तहत के विजयेंद्र पांडियन गोरखपुर के नए डीएम बनाए गए हैं। महराजगंज के डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को बरेली का डीएम बनाया गया है। अलीगढ़ के डीएम हृषिकेश भास्कर यशोद को अंतर्राज्यीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र जाने के लिए कार्यमुक्त किया गया है। पीलीभीत की डीएम शीतल वर्मा को सीतापुर, हाथरस के डीएम अमित कुमार सिंह को सोनभद्र, अमरोहा के डीएम नवनीत सिंह चहल को चंदौली, चंदौली के डीएम हेमंत कुमार को अमरोहा, सोनभद्र के डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय को हापुड़, हापुड़ के डीएम कृष्ण करुणेश को बलरामपुर, भदोही के विशाख जी को चित्रकूट, चित्रकूट के डीएम शिवाकांत द्विवेदी को आजमगढ़ और आजमगढ़ के डीएम चंद्रभूषण सिंह को अलीगढ़ के डीएम के पद पर नई तैनाती मिली है।

इस तबादले की खास बात ये है कि 16 में से दस जिलों के डीएम अपनी कलेक्टरी बचाने में सफल रहे हैं। उन्हें दूसरे जिलों में तैनात किया गया है।

शासन स्तर पर अपने कार्यों से सरकार की किरकिरी करा रहे अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन तथा रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मुकुल सिंघल से आवास विभाग छीन लिया गया है। सिंघल मुख्य सचिव तक के निर्देशों की लगातार अनदेखी कर रहे थे। सिंघल से आवास विभाग लेकर कम महत्व वाले रेशम, हथकरघा व वस्त्रोद्योग जैसे विभागों तक सीमित कर दिया है।

वहीं राज्य शासन स्तर पर हुए फेरबदल में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे राजीव कपूर को चेयरमैन, पिकप के पद पर तैनात किया गया है। वहीं, इन्वेस्टर्स समिट के दौरान अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त डा. अनूप चंद्र पांडेय तथा अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक सिन्हा के बीच मतभेद आम लोगों में चर्चा का विषय बन गई थी। शासन ने आलोक सिन्हा को औद्योगिक विकास विभाग से हटाकर अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर एवं मनोरंजन कर बना दिया है। यह विभाग भी काफी महत्वपूर्ण है। अनूप चंद्र पाण्डेय को वर्तमान पद के साथ अपर प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास औऱ अवस्थापना का भी कार्यभार दिया गया है। अपर मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी को वाणिज्य कर एवं मनोरंजन कर विभाग से हटाते हुए, उनके वर्तमान पद श्रम एवं सेवायोजन पद पर बनाए रखा गया है।

वाराणसी के मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण अब प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन होंगे। इस पद पर तैनात मुकुल सिंघल को हटा दिया गया है। वह अपर मुख्य सचिव रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग बने रहेंगे। आलोक टंडन को अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा एवं प्रबंध निदेशक नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन के पद के साथ स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली और मुख्य कार्यपालक अधिकारी ग्रेटर नोएडा के पद का अतिरिक्त पदभार दिया गया है। सहारनपुर के मंडलायुक्त दीपक कुमार अब वाराणसी के मंडलायुक्त होंगे। सचिव सिंचाई और जल संसाधन चंद्र प्रकाश त्रिपाठी अब सहारनपुर के मंडलायुक्त होंगे। आजमगढ़ के मंडलायुक्त के रविंद्र नायक के अब कानपुर में आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग पद पर तैनात किया गया है। इस पद पर तैनात रणवीर प्रसाद को कार्यमुक्त कर दिया गया है। वह प्रबंध निदेशक यूपीएसआईडीसी का काम संभालते रहेंगे।

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