अलोकतांत्रिक और संविधान के प्रावधानों की गलत व्याख्या करके जम्मू-कश्मीर को किया गया खंडित: कांग्रेस कार्यसमिति

कांग्रेस कार्यसमिति ने जम्मू-कश्मीर के विभाजन और धारा 370 को खत्म किए जाने को अलोकतांत्रिक, एकतरफा और संविधान के प्रावधान की गलत व्याख्या करके लिया गया फैसला बताते हुए मोदी सरकार की निंदा की है।

फोटो : @INCIndia
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा है कि मोदी सरकार ने एकतरफा, गैरजिम्मेदाराना ढंग और पूर्णतः अलोकतांत्रिक तरीके से संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और संविधान के प्रावधानों की गलत व्याख्या करके जम्मू-कश्मीर राज्य को खंडित करने का काम किया है। कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके लिए मोदी सरकार की निंदा का प्रस्ताव पारित किया है।

मंगलवार शाम दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद एक प्रस्ताव में कांग्रेस ने कहा कि, “मोदी सरकार ने कश्मीर के मामले में संवैधानिक कानून, लोकतांत्रिक प्रक्रिया, राज्यों के अधिकार, संसदीय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक शासन के प्रत्येक सिद्धांत का उल्लंघन किया।”

प्रस्ताव में कहा गया कि, “धारा 370 की परिकल्पना पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल और बी आर आंबेडकर ने एन गोपालस्वामी आयंगर और वी पी मेनन के साथ मिलकर तैयार की थी। अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर राज्य और भारत सरकार के बीच सेतु का काम किया था। सभी समुदायों के परामर्श और उन्हें विश्वास में लेकर इसमें संशोधन किया जाना चाहिए था।”

कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा कि बीजेपी सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में और मंगलवार को लोकसभा में जो कार्य किया उसके विषम निहितार्थ हैं और यह भारत के राज्यों का संघ होने के मूल विचार पर सवालिया निशान लगाता है।

कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा कि भारत के साथ जम्मू-कश्मीर का एकीकरण अपरिवर्तनीय और अंतिम है। कार्यसमिति ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े सारे मामले भारत के आंतरिक मुद्दे हैं और इसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बरदाश्त नहीं किया जाएगा।

कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता राहुल गांधी ने की। इस बैठक में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कार्यसमिति के दूसरे सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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