राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर कांग्रेस ने BJP-RSS को घेरा, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में बीजेपी-आरएसएस के लोगों ने चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद-निर्माण में घोटाले कर अक्षम्य महापाप किया है। इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी खतरनाक मिलीभगत के संकेत दे रही है।

राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर कांग्रेस ने BJP-RSS को घेरा, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की
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राम मंदिर के चंदा चोरी के खिलाफ कांग्रेस के जनजागरण अभियान के तहत शुक्रवार को देश के कई शहरों में कांग्रेस नेताओं ने चढ़ावा चोरी को लेकर बीजेपी और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल आर्थिक गड़बड़ी का नहीं बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में बीजेपी-आरएसएस के लोगों ने चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद-निर्माण में घोटाले कर अक्षम्य महापाप किया है। इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी खतरनाक मिलीभगत के संकेत दे रही है। देश उनसे जवाबदेही चाहता है, लेकिन वह हर बार की तरह मौन साधे हुए हैं। इस मुद्दे को लेकर आज कांग्रेस नेताओं ने आठ पत्रकार वार्ताएं कीं। इस अभियान के तहत 12 जुलाई तक देशभर में 50 से ज्यादा पत्रकार वार्ताएं कर बीजेपी-आरएसएस को जवाबदेही के लिए मजबूर किया जाएगा।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के साथ प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान राम केवल हिंदुओं के आराध्य नहीं हैं बल्कि विभिन्न धर्मों के संतों और महात्मा गांधी जैसे नेताओं के भी आदर्श रहे हैं। मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी "महापाप" है और इसकी नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी बीजेपी और आरएसएस को लेनी चाहिए क्योंकि ट्रस्ट के संचालन में उनके करीबी लोग शामिल रहे हैं।

श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राम मंदिर की आधारशिला रखने, उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा का श्रेय लिया था, इसलिए अब अनियमितताओं पर उनकी चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा गठित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर रखा गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। श्रीनेत ने दावा किया कि 40 दिनों के भीतर मंदिर का चढ़ावा 70 बार कथित रूप से चोरी हुआ। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि "मुंह में राम और बगल में छुरी" जैसी स्थिति पैदा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वयं को हिंदुत्व का रक्षक बताने वाले लोगों ने ही भगवान राम के नाम पर लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई है।


चंडीगढ़ में ही हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष के साथ प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि जब तक राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की बात सामने नहीं आई थी, तब तक हर रोज 16-18 लाख रुपए दान के रूप में जमा होते थे। लेकिन जैसे ही मंदिर में चोरी का खुलासा हुआ, उस दिन से रोजाना 24-26 लाख रुपए दान के रूप में जमा होने लगे। यानी- हर दिन दान में करीब ₹10 लाख का हेरफेर किया जाता था। इसलिए हमारी मांग है: राम मंदिर के वर्तमान ट्रस्ट को हटाकर नया ट्रस्ट बनाया जाए। चंपत राय को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस मामले की जांच हो।

उत्तर प्रदेश के कांग्रेस नेताओं के साथ कानपुर में इस मुद्दे पर प्रेसवार्ता करते हुए पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने कहा कि भगवान के नाम पर राजनीति करने वालों से मैं जानना चाहता हूं- देश के बड़े मंदिरों और ट्रस्टों पर आरएसएस-बीजेपी और कॉरपोरेट का राज क्यों हैं? इसलिए हमारे सवाल हैं- जब राम मंदिर के ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में हुआ, तो चढ़ावा चोरी की जवाबदेही कौन लेगा? अगर सब कुछ सही था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा क्यों दिया? प्रधानमंत्री इस पूरे मामले पर मौन क्यों हैं? जब पूरा ट्रस्ट इसमें लिप्त है तो सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों हो रही है?


मध्य प्रदेश के इंदौर में भी कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस कर राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर बीजेपी-आरएसएस को घेरा। मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि हमारी सनातन परंपरा में किसी भी मंदिर के शिलान्यास और प्राण प्रतिष्ठा में साधु-संतों को बुलाया जाता है। लेकिन बीजेपी ने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपूर्ण राम मंदिर के कार्यक्रमों में साधु-संतों का अपमान किया और सारा श्रेय नरेंद्र मोदी ने लेकर सनातन परंपरा को रौंद दिया। अब जब राम मंदिर में आस्था से खिलवाड़ का इतना बड़ा मामला सामने आया है, तो पीएम मोदी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं। पूरे मामले की कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच होनी चाहिए।

तमिलनाडु के कोयंबटोर में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता पल्लम राजू ने कहा कि राम जन्मभूमि मुद्दे से शुरू होकर, बीजेपी ने भगवान राम का राजनीतिक इस्तेमाल किया है। पूरा कंस्ट्रक्शन, ट्रस्टी की नियुक्ति और कंस्ट्रक्शन का नेतृत्व कौन करेगा, यह सब प्रधानमंत्री ने तय किया था। मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा भी प्रधानमंत्री ने ही की थी।

उन्होंने कहा कि जिस ट्रस्ट को प्रधानमंत्री ने खुद चुना था, उसने बहुत सारा पैसा गबन कर लिया है। जब इतना बड़ा मुद्दा सामने आया है, तो प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? वह इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? वह अब लाखों राम भक्तों की आस्था का सम्मान क्यों नहीं कर रहे हैं?


कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने जम्मू-कश्मीर में प्रेसवार्ता में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने राम मंदिर का क्रेडिट लेने में नरेंद्र मोदी आगे रहे, प्राण प्रतिष्ठा में भी सारा फोकस खुद पर रखवाया.. लेकिन जब चढ़ावा चोरी का महापाप हुआ तो छोटे कर्मचारियों को आगे कर, खुद पीछे हो गए। भगवान राम के मंदिर में हुई चोरी से हिंदुओं का मन आक्रोशित है। ये सीधे तौर पर हमारी आस्था पर डकैती है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सांसद दीपेंदर हुड्डा ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना ने देशभर को दुख पहुंचाया है और आज देश ही नहीं, विदेश में रहने वाले भारतीय भी चिंतित हैं। मैं हरियाणा से आता हूं, जहां लोग दिन की शुरुआत ही "राम-राम" कहने से करते हैं। राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार चोरी की गई और ऐसा कर चोरों ने गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया। सवाल है- चोरों को किसका संरक्षण प्राप्त था और उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? अगर राम मंदिर से जुड़ा सारा श्रेय नरेंद्र मोदी ने लिया तो इस लूट पर वे चुप क्यों हैं और इसकी जवाबदेही किसकी है?


बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के मामले पर कांग्रेस ने आज से देश भर में जनजागरण अभियान शुरू किया कि है। इस अभियान के तहत कांग्रेस नेता देश के 50 शहरों में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस करेंगे और बीजेपी-आरएसएस की पोल खोलने के साथ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस महाघोटाले की जांच की मांग करेंगे।

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