IDBI बैंक बिक्री के प्रस्ताव की हो जेपीसी जांच, कांग्रेस ने उठाए मुनाफे वाली बैंक के विनिवेश के तर्क पर सवाल

कांग्रेस ने आईडीबीआई बैंक के लिए दूसरे बोलीदाता की पहचान उजागर करने की मांग की है। साथ ही बैंक के वैल्युएशन में बदलाव पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि बैंक को मोदी-समर्थक कॉर्पोरेट समूह को बेचा जा रहा है।

सांकेतिक तस्वीर
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  • आईडीबीआई बैंक की बिक्री पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

  • बिक्री प्रस्ताव की जेपीसी जांच की मांग

  • फेयरफैक्स के चेयरमैन की पीएम मोदी से नजदीकी का आरोप

  • फेयरफैक्स की वित्तीय क्षमता पर सवाल

आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर मुनाफे वाली सरकारी बैंक को बेचने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले की संयुक्त ससंदीय समिती (जेपीसी) जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि आडीबीआई बैंक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नजदीकी माने जाने वाले फेयरफैक्स समूह को बेचा जा रहा है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि आईडीबीआई बैंक की बिक्री कर सरकार स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि फेयरफैक्स होल्डिंग्स के चेयरमैन सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुला समर्थन करते रहे हैं।

सोमवार को दिल्ली में एक प्रेस कान्फ्रेंस में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि आईडीबीआई बैंक की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के समय हुई थी और इसका उद्देश्य औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता देना था। गोहिल ने कहा कि इस बैंक का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।

गोहिल ने इस प्रस्तावित सौदे पर कुछ तीखे सवाल सामने रखे हैं। उन्होंने ये मांगे सरकार के सामने रखी हैं:

  • विदेशी कंपनियों को IDBI बैंक बेचे जाने पर रोक लगे

  • JPC के जरिए इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए

  • IDBI बैंक से जुड़ी दोनों वैल्यूएशन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

  • ऑफर बिड खोलने के बाद वैल्यूएशन किसके कहने पर बदला गया

  • बिड होने के बाद इनकम टैक्स सेटल करने के निर्णय का जवाब मिले

  • IDBI बैंक की बिड के दूसरे Bidder का नाम सार्वजनिक हो

  • Fairfax कितने पैसे, कहां से दे रहा है- उसे सार्वजनिक किया जाए

  • RBI के नियम को ताक पर रख, Fairfax को रियायत क्यों दी गई, इसका जवाब दिया जाए।

गोहिल ने प्रेस कान्फ्रेंस में पूर्व वित्त मंत्री जसवंत सिंह का एक पुराना वीडियो क्लिप भी चलाकर दिखाया। 2003 में जसवंत सिंह वित्तीय मामलों पर संसद की स्थाई समिति के चेयरमैन थे। जसवंत सिंह ने अगस्त 2003 में राज्यसभा और लोकसभा में अपने भाषण में संसद को आश्वासन दिया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकारी हिस्सेदारी को 51 फीसदी से कम नहीं किया जाएगा।

गोहिल ने कहा, “जसवंत सिंह ने संसद से वादा किया था कि किसी भी परिस्थिति में आईडीबीआई बैंक में सरकारी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं की जाएगी। लेकिन भगवान राम के नाम पर चंदा हासिल करने वाली बीजेपी इस वादे को तोड़कर आईडीबीआई बैंक को बेचना चाहती है।”

इस विनिवेश के तर्क पर सवाल उठाते हुए गोहिल ने बैंक के मुनाफे को सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब बैंक मुनाफे में चल रहा है और वित्तीय तौर पर मजबूत है तो इसे बेचने का क्या औचित्य है।


आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 2026 के बीच आईडीबीआई की कुल वित्तीय लाभ 30,105 करोड़ रहा है। गोहिल ने कहा कि आईडीबीआई बैंक प्रति कर्मचारी लाभ के मामले में शीर्ष वित्तीय संस्थाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि आडीबीआई की प्रति कर्मचारी वित्तीय लाभ 49.8 लाख रुपए है। गोहिल ने कहा कि, “ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि आखिर जो बैंक मोटा मुनाफा कमा रहा है उसे बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है?”

गोहिल ने आरोप लगाया कि जहां तक फैयरफैक्स का सवाल है तो उसकी वित्तीय क्षमता स्वतंत्र रूप से आईडीबीआई बैंक अधिग्रहण करने की नहीं है और इस अधिग्रहण के लिए बैंक के ही वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

एक खोजी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए गोहिल ने फैयरफैक्स चेयरमैन प्रेम वत्स और प्रेसीडेंड पीटर क्लार्क के बीच हुई बातचीत का हवाला दिया जिसमें बैंक अधिग्रहण के लिए पैसे जुटाने की बात की जा रही है। जिस रिपोर्ट का गोहिल ने जिक्र किया उसके मुताबिक फैयरफैक्स के प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि आईडीबीआई बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और इसके अधिग्रहण के लिए पैसे का भुगतान किस्तों में किया जाएगा। साथ ही शुरुआती भुगताने के तौर पर एक छोटी रकम दी जाएगी और बाद में आईडीबीआई से ही बाकी किस्तों का भुगतान होगा।

कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ वत्स की नजदीकियों को भी उजागर किया। उन्होंने 2017 के 'वाइब्रेंट गुजरात' शिखर सम्मेलन का जिक्र किया, जहां वत्स ने मोदी की जमकर तारीफ की थी और उनकी तुलना सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री ली कुआन यू से की थी—जिन्हें सिंगापुर को एक वैश्विक आर्थिक केंद्र में बदलने का श्रेय दिया जाता है। गोहिल ने कहा कि, "शायद इसी तारीफ की वजह से आईडीबीई बैंक को प्रेम वत्स को बेचा जा रहा है।" उन्होंने इस प्रस्तावित सौदे में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया।

प्रेस कान्फ्रेंस में जेपीसी जांच की मांग के अलावा, कांग्रेस ने कई अन्य मांगें भी रखीं। शक्ति सिंह गोहिल ने आईडीबीआ बैंक को विदेशी कंपनियों को बेचने के प्रस्तावित कदम को तुरंत रोकने और इस सौदे से जुड़ी दोनों वैल्यूएशन रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। गोहिल ने सवाल उठाया कि किन परिस्थितियों में वैल्यूएशन को बदला गया, और जानना चाहा कि किसके निर्देश पर यह बदलाव किया गया। उन्होंने विनिवेश प्रक्रिया में शामिल दूसरे बोलीदाता की पहचान उजागर करने की भी मांग की।

कांग्रेस ने बैंक के विनिवेश के लिए बोली प्रक्रिया के बाद आयकर मामले को सुलझाने के फैसले पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। साथ ही, यह सवाल भी उठाया है कि क्या इस कदम का प्रस्तावित सौदे के मूल्यांकन या उसकी शर्तों पर कोई असर पड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रस्तावित बिक्री से पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पार्टी ने जोर देकर कहा है कि पूरी प्रक्रिया की जांच एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जानी चाहिए।