कांग्रेस ने अग्निपथ योजना पर मोदी सरकार को घेरा, बताया क्यों है देश की सुरक्षा प्रणाली के लिए खतरनाक

कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि मैं यही कहूंगा कि सरकार चेत जाए, वरना 2024 में आपसे लड़ाई लड़ने के लिए हम तो तैयार ही हैं, ये डेढ़ लाख बच्चे और बहुत सारे जो युवा, जिनका आपने सपना तोड़ा है, वो भी आपको इस दिल्ली की मगरूर सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे।

कांग्रेस ने अग्निपथ योजना पर मोदी सरकार को घेरा, बताया देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक
कांग्रेस ने अग्निपथ योजना पर मोदी सरकार को घेरा, बताया देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस ने मोदी सरकार की सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना पर फिर सवाल उठाते हुए इसे देश की सुरक्षा प्रणाली के लिए खतरनाक बताया है। अखिल भारतीय कांग्रेस पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) रोहित चौधरी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेस में कहा कि अग्निपथ योजना देश की सुरक्षा प्रणाली के लिए बेहद खतरनाक और घातक है। चौधरी ने कहा कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख एमएम नरवणे ने खुद अपनी किताब में लिखा है कि अग्निपथ स्कीम सेनाओं के लिए चौंकाने वाली योजना थी और उनकी मांगी हुई स्कीम नहीं थी।

कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि अग्निपथ स्कीम के दो बड़े पहलू हैं। पहला जून 2022 में स्कीम आने से पहले का है और दूसरा पहली योजना के लागू होने के बाद का है। चौधरी ने कहा कि अग्निपथ स्कीम आने से पहले करीब 1.5 लाख से ज्यादा युवा आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में चयनित किए गए थे लेकिन अग्निपथ स्कीम आने के बाद मोदी सरकार ने इनके सपनों को चूर-चूर कर दिया. 7,000 युवा एयरफोर्स में अपने जॉइनिंग लेटर का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें लेटर नहीं दिया गया। इसी तरह आर्मी में चयन का इंतेजार कर रहे 2,500 नर्सिंग असिस्टेंट को देश सेवा का मौका नहीं दिया गया। सबसे बड़ी बात, जो भर्तियां रद्द की गईं, उसमें आवेदकों से फॉर्म फीस के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा रुपये इकट्ठा किए गए। ये 100 करोड़ का ‘भर्ती घोटाला’ है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?


कर्नल चौधरी ने बताया कि बिहार के चंपारण से 1,100 किलोमीटर की लंबी यात्रा करके बच्चे यहां पहुंचे, जो पिछले दो साल से गुहार लगा रहे हैं कि हमें ज्वाइनिंग दी जाए, हमें बेरोजगारी नहीं चाहिए, हमें समाज में इज्जत चाहिए। हमें जब मालूम चला, तो हमारे नेता राहुल गांधी जी ने कहा कि ये तो बहुत गलत कर रही है मोदी सरकार हमारे युवाओं के साथ, हमारी सेना के साथ।तो उन्होंने इन बच्चों को बुलाया, इन बच्चों की पीड़ा सुनी, उनके माता-पिता से, उनसे बात सुनी। मालूम चला कि 64 बच्चे जो भर्ती हो चुके थे सेना में ज्वाइनिंग लेटर का इंतजार कर रहे थे, उन्होंने इस दौरान सुसाइड कर लिया। वे सरकार से गुहार लगा-लगा कर परेशान हो गए थे और देश सेवा के सपने के टूटने से दुखी थे, आहत थे। तो इन 64 बच्चों के सुसाइड का जिम्मेदार कौन है?

कर्नल रोहित चौधरी ने बताया कि हमने एक आरटीआई के जरिए सरकार से डेटा मांगा कि 2022 में कितने लोग भर्तियों में शामिल हुए और 2023 में कितने लोग भर्तियों में शामिल हुए थे। ये चौंका देने वाला डेटा है। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने जवाब में बताया है कि 2022 से लेकर और 2023, मार्च के बीच 34 लाख युवाओं ने भर्ती देखी, लेकिन 2023-24 के अंदर ये संख्या घटकर सिर्फ दस लाख रह जाती है। तो इसका मतलब कहीं ना कहीं ये अग्निपथ स्कीम और अग्निवीर, जो इसके तहत भर्ती किए जा रहे हैं, ये देश के युवाओं को पसंद नहीं है, देश के युवाओं के लिए सही नहीं है, देश की सेनाओं के लिए सही नहीं है। 34 लाख युवा जो 2022-23 में देश की सेना में आना चाहते थे, उनकी संख्या घटकर सिर्फ दस लाख रह गई। 24 लाख युवा जिनके देश सेवा के सपने को तोड़ा है इस मोदी सरकार ने, उसका जवाब देना पड़ेगा।

कर्नल चौधरी ने कहा कि इसका एक और पहलू है। पहले जब इनका कॉम्पिटीशन होता था तो हजारों की तादाद में लोग दौड़ लगाते थे, आगे के 40, 50 बच्चों को सिलेक्ट कर लिया जाता था। एक किलोमीटर और 600 मीटर की जो रेस होती है, उसके अंदर चार मिनट और 45 सेकंड के अंदर आना एक्सीलेंट होता है। पास तो साढ़े पांच मीनट तक होता है। साढ़े चार मिनट के अंदर युवा कॉम्पिटीशन की इतनी तैयारी करते हैं, साढ़े चार मिनट के अंदर दौड़ पूरी करके आ जाते थे, सैंकड़ों की तादाद में और उनमें से शुरू के 50-60 बच्चे लिए जाते थे। आज छह मीनट तक एनक्लोजर को खुला रखते हैं, ताकि कोई तो पहुंच जाए। कॉम्पिटीशन कम हो गया और जो क्वालिटी है, उसके अंदर कॉम्प्रोमाइज हुआ है, क्योंकि कम लोग भर्तियों में आ रहे हैं।


कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि मैं मोदी सरकार से पूछना चाहता हूं कि जो अग्निवीर भर्ती हो चुके हैं, उनको क्यों नहीं देश के सामने लाते? क्योंकि उनको डर है कि अग्निवीर अगर सबके सामने आए, तो इसकी बहुत सारी खामियां बताएंगे। वो ये भी बताएंगे कि देश की सेना के अंदर भेदभाव हो गया है। एक ही यूनिट में अग्निवीर और रेगुलर सैनिक साथ-साथ काम करते हैं। अग्निवीर को उनसे आधी तनख्वाह मिलती है। 21,000 रुपए तनख्वाह मिलती है। दिल्ली का जो मिनिमम वेज है, वो 22,000 रुपए का है। इंडिस्ट्रियल एक्ट के जरिए उनकी मिनिमम वेज डिफाइन होती है और हमारे सैनिक जिनके फंडामेंटल राइट्स को कर्ब कर दिया जाता है। आजादी बोलने की नहीं है, एक्सप्रेशन की नहीं है। बहुत सारे फंडामेंडल राइट कर्ब किए जाते हैं। उसको दिल्ली के मिनिमम वेज से कम दिया जाता है। कॉन्ट्रैक्ट का सैनिक देश को नहीं चाहिए।

रोहित चौधरी ने कहा कि मैं मोदी सरकार से साफ-साफ सवाल करना चाहता हूं, पूछना चाहता हूं कि 100 भर्तियां आर्मी, एयरफोर्स, जिसके तहत डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे सिलेक्ट किए गए थे, उनको ज्वाइनिंग क्यों नहीं दी गई? उनको तुरंत प्रभाव से ज्वाइनिंग दी जाए। भर्ती फीस के नाम पर जो 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का पैसा आपने इक्कट्ठा किया है, उसका देश को हिसाब दिया जाए, क्योंकि ना तो भर्ती हुई, ना फॉर्म फीस वापस हुई। बेरोजगारी, निराशा, अपमान साथ में मिला। मैं पूछना चाहूंगा कि 64 युवाओं के सुसाइड का जिम्मेदार कौन और इनके परिवार टूटने का, परिवार को जो अपने आस-पड़ोस से आत्मग्लानि और शर्म मिल रही है, उसका जिम्मेदार कौन?


कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि छह महीने की ट्रेनिंग, एक तिहाई ट्रेंड सोल्जर और चार साल में वापस आने वाला जवान देश की सुरक्षा नहीं कर सकता।ऑल वेदर सोल्जर बनाने के लिए 6 से 7 साल लगते हैं। आजकल टेक्नोलॉजी का जमाना है। आज से पांच या छह साल बाद हमारी सेना की जो संख्या है, वो एक तिहाई रह जाएगी। सेना में तकरीबन एक चौथाई, बची हुई सेना में एक चौथाई से ज्यादा अग्निवीर होंगे और हमारे मिसाइल का बटन दबाने के लिए भी सही तरीके से हमारे पास ट्रेंड सोल्जर नहीं होगा। इक्विपमेंट को मेंटेन करने के लिए हमारे पास सही सोल्जर नहीं होगा। हेलीकॉप्टर को, रेडार को मेंटेन करने के लिए हमारे पास सही सोल्जर नहीं होगा। जब एक जहाज या हेलीकॉप्टर को या एक टैंक को चलाया जाता है, उसके चलाने से पहले उसकी इंस्पेक्शन होती है। इसी तरह से मिसाइल को जब चलाया जाता है, उसकी इंस्पेक्शन होती है और कम से कम 15 से 20 लोग अलग-अलग इक्विपमेंट को पहले सर्टिफाई करते हैं, तभी वो चल सकता है, नहीं तो वो चल नहीं सकता। तो कौन सर्टिफाई करने के लिए ट्रेंड सोल्जर होगा, ये आपको सोचना है।

अंत में रोहित चौधरी ने कहा कि तो इसलिए आखिर में मैं यही कहूंगा कि सरकार चेत जाए, वरना 2024 में आपसे लड़ाई लड़ने के लिए हम तो तैयार ही हैं, वरना ये डेढ़ लाख बच्चे और बहुत सारे जो युवा, जिनका आपने सपना तोड़ा है, वो भी आपको इस दिल्ली की मगरूर सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे। अंत में ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ और इस न्याय की लड़ाई को 14 जनवरी से ‘भारत न्याय यात्रा’ में शामिल होकर हम सब लड़ने के लिए तैयार हैं।

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