लखीमपुर हिंसा: राष्ट्रपति से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, राहुल बोले- मंत्री हटें, SC के जजों की निगरानी में हो जांच

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस घटना के तथ्यों से जुड़ा एक ज्ञापन भी राष्ट्रपति को सौंपा। कांग्रेस के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी के अलावा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे।

फोटो: विपिन
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को लेकर आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस घटना के तथ्यों से जुड़ा एक ज्ञापन भी राष्ट्रपति को सौंपा। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी के अलावा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे।

अगर पिता मंत्री हैं तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी: राहुल गांधी

मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पीड़ित चाहते हैं कि उन्हें इंसाफ मिले। उन्होंने कहा कि जिसने हत्या की है उस व्यक्ति कि पिता हिन्दुस्तान के गृह मंत्री हैं, इसीलिए जब तक वह मंत्री हैं सही न्याय नहीं मिल सकता। राहुल ने कहा कि हमने ये बात राष्ट्रपति को भी बताई है।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह एक परिवार की नहीं बल्कि हिन्दुस्तान की आवाज है। राहुल ने कहा कि अगर पिता मंत्री है तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी? राहुल गांधी ने आगे कहा कि हमने राष्ट्रपति से कहा कि मंत्री को उनके पद से हटाया जाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के 2 सीटिंग जज को इस मामले की जांच करनी चाहिए।

'राष्ट्रपति ने हमें आश्वासन दिया है कि वह आज ही सरकार से इस मामले पर चर्चा करेंगे'

वहीं इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मीडिया को संबोधित किया। प्रियंका गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति ने हमें आश्वासन दिया है कि वह आज ही सरकार से इस मामले पर चर्चा करेंगे। वहीं कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमने राष्ट्रपति को लखीमपुर खीरी कांड के संबंध में सारी जानकारी दी। हमारी 2 मांगें हैं- मौजूदा जजों से स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और गृह राज्य मंत्री (अजय मिश्रा टेनी) को या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या बर्खास्त कर देना चाहिए। न्याय तभी संभव होगा।

ज्ञापन में क्या है?

  • कांग्रेस ने कहा है कि किसान विरोधी कानूनों को लेकर देश की राजधानी की सीमा पर लाखों किसान साल भर से धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही है। कई किसानों की अब तक मौत भी हो गई है। लेकिन सरकार तीन कृषि कानूनों को रद्द करने को तैयार नहीं है। इन सबके बीच सरकार किसानों से बात तक नहीं कर रही।

  • कांग्रेस ने कहा कि 27 अक्टूबर को जब कृषि कानूनों के विरोध में भारत बंद का ऐलान किया गया था। उस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री टेनी ने किसानों को सबक सिखाने की बात कही थी। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है।

  • ज्ञापन में कांग्रेस ने लखीमपुर हिंसा का भी जिक्र किया है। कांग्रेस ने कहा है कि 3 अक्टूबर को जब किसान शांति पूर्ण तरीके से अपना धरना प्रदर्शन कर रहे थे। उस समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के काफिले की कार ने किसानों को रौंद दिया। इस दौरान मंत्री का बेटा भी उस कार पर मौजूद था।

  • इतना होने के बाद भी योगी सरकार ने आरोपियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज तक नहीं की। जब कांग्रेस ने विरोध किया तब जाकर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई। और मंत्री के आरोपी बेटे को हिरासत में लिया गया

  • कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस की मांग है कि सबसे पहले गृह राज्य मंत्री (अजय मिश्रा टेनी) को या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या बर्खास्त कर देना चाहिए। इसके साथ ही लखीमपुर हिंसा की जांच मौजूदा जजों से कराने की मांग की है।

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