ओडिशा में दो दलित व्यक्तियों के "उत्पीड़न" पर कांग्रेस ने जताया आक्रोश, जांच के लिए समिति गठित

पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हमलावरों का उद्देश्य गायों की रक्षा करना नहीं बल्कि पीड़ितों से जबरन वसूली करना था। एसपी ने कहा, “मामले में जांच जारी है और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस ने मंगलवार को ओडिशा के गंजाम जिले में गो-तस्करी के संदेह में दो दलित पुरुषों के साथ हुए कथित अमानवीय व्यवहार पर नाराजगी जताई और मामले की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया।

पुलिस के अनुसार, गो-तस्करी के आरोप में दो दलित पुरुषों के बाल जबरन मुंडवा दिए गए, उन्हें पीटा गया और घुटनों के बल रेंगने, घास खाने और नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में अब तक नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने सोमवार रात को इस घटना की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय समिति गठित की जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम करेंगे।

समिति के अन्य सदस्यों में ओपीसीसी के उपाध्यक्ष लालतेंदु महापात्र, विधायक रमेश जेना, महासचिव सुबर्णा नायक और सचिव तुलेश्वर नायक शामिल हैं।

घटना रविवार को धारकोट थाना क्षेत्र के अंतर्गत खरिगुमा गांव के जहादा में हुई।

पार्टी के एक नेता ने बताया, "समिति को गांव जाकर पीड़ितों से प्रत्यक्ष बातचीत कर रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस को तत्काल सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।"

घटना का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे राजनीतिक क्षेत्र में इसकी कड़ी आलोचना हुई।


पुलिस के अनुसार, पीड़ित बाबुला नायक (54) और बुलु नायक (42) सिंगीपुर गांव के निवासी हैं और वे हरियोर से अपने गांव लौटते समय एक वाहन में दो गाय और एक बछड़े को लेकर जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें कुछ स्वघोषित 'गौरक्षकों' ने खरिगुमा में रोक लिया और उन पर गो-तस्करी का आरोप लगाया।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, "भीड़ ने दोनों से 30,000 रुपये की मांग की। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया तो उन्हें पीटा गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्हें एक सैलून ले जाया गया, जहां उनके बाल मुंडवा दिए गए। बाद में उन्हें एक किलोमीटर तक घुटनों के बल रेंगने, घास खाने और नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया।"

किसी तरह से बच के निकलने के बाद दोनों पीड़ितों ने रविवार शाम को धारकोट थाने में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।

पीड़ितों के अनुसार, वे मवेशियों को बाबुला की बेटी की शादी में पारंपरिक भेंट के रूप में ले जा रहे थे।

अधिकारी ने बताया कि दो दलित व्यक्तियों के साथ मारपीट और उनका आंशिक रूप से सिर मुंडवाने के आरोप में नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गंजाम जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुवेंदु कुमार पात्रा ने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हमलावरों का उद्देश्य गायों की रक्षा करना नहीं बल्कि पीड़ितों से जबरन वसूली करना था। एसपी ने कहा, “मामले में जांच जारी है और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “लोगों में बेचैनी बढ़ती दिख रही है। ओडिशा में कानून व्यवस्था चरमरा गई है।”

पीटीआई के इनपुट के साथ

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