चुनाव आयोग पर कांग्रेस का अब तक का सबसे बड़ा हमला, ECINET सॉफ्टवेयर की जानकारी छिपाने का लगाया आरोप!
जयराम रमेश ने मीडिया में आई एक खबर साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि ईसीआई ने यह बताने से इनकार कर दिया है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों में गलतियों व गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए किस सॉफ्टवेयर और उसके किस संस्करण का इस्तेमाल किया गया था।

चुनाव आयोग पर कांग्रेस का अब तक का सबसे बड़ा हमला, ECINet सॉफ्टवेयर की जानकारी छिपाने का लगाया आरोप!
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का बड़ा दावा- विवादित सॉफ्टवेयर की सच्चाई छुपा रहा है भारत निर्वाचन आयोग!
मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी..." कांग्रेस ने स्पेशल गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को बताया विनाशकारी!
कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग पर विवादित ईसीआईएनईटी सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह बार-बार यह जानकारी देने से इनकार कर रहा है, क्योंकि इससे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी की सच्चाई सामने आ जाएगी। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को विनाशकारी बताया।
विपक्षी पार्टी ने एक बार फिर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने मीडिया में आई एक खबर साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने यह बताने से इनकार कर दिया है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों में गलतियों व गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए किस सॉफ्टवेयर और उसके किस संस्करण का इस्तेमाल किया गया था।
खबर के मुताबिक आयोग ने कहा कि यह जानकारी गोपनीयता से जुड़ी है, इसलिए इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत साझा करने से छूट प्राप्त है।
जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा कि निर्वाचन आयोग विवादित ईसीआईएनईटी सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी छिपा रहा है।
उनके अनुसार, यह सॉफ्टवेयर विनाशकारी एसआईआर प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और इसका इस्तेमाल मतदाता सूचियों में केंद्रीकृत तरीके से गड़बड़ी करने के लिए किया गया है।
जयराम रमेश ने कहा, “आज एक प्रमुख राष्ट्रीय अखबार ने खुलासा किया कि निर्वाचन आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में एसआईआर में इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। अटपटे बहाने बनाकर आयोग ने न तो इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर का नाम बताया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। साथ ही, यह भी नहीं बताया गया है कि इसके लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं।”
उन्होंने कहा कि ईसीआई सॉफ्टवेयर और एआई के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता की कमी के कारण नागरिकों के बीच पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।
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