कांग्रेस का पेपर लीक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू, नेताओं ने अलग-अलग शहरों से उठाई प्रधान के इस्तीफे की मांग
प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार बच्चों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ की जवाबदेही से नहीं बच सकती।

कांग्रेस ने पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपने राष्ट्रव्यापी अभियान ‘छात्रों की गूंज’ का आज से आगाज किया। इसके तहत गुरुवार को 28 नेताओं ने देश के 28 शहरों में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
दिल्ली में गौरव गोगोई, भुवनेश्वर में पवन खेड़ा, पुणे में कन्हैया कुमार, जयपुर में अशोक तंवर, अहमदाबद में सतेज पाटिल, बेंगलुरू में वर्षा गायकवाड़ और कई अन्य नेताओं ने अलग-अलग शहरों में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार बच्चों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ की जवाबदेही से नहीं बच सकती।
गौरव गोगोई ने परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की बार-बार सामने आ रही घटनाओं को शिक्षा व्यवस्था की ‘‘बड़ी संस्थागत विफलता’’ करार देते हुए कहा कि इससे छात्रों का भरोसा टूट गया है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षाओं में व्यवधान की बार-बार होने वाली घटनाओं से छात्रों के बीच धारणा बन गई है कि यह समस्या कुछ व्यक्तियों की गलती नहीं, बल्कि ‘‘व्यवस्थागत’’ है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने ओडिशा के भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि 'मोदी सरकार के 10 साल में करीब 90 पेपर लीक हुए हैं। करोड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में झोंक दिया गया। नरेंद्र मोदी 'परीक्षा पे चर्चा' कर बच्चों को बताते हैं कि परीक्षा कैसे देनी है, लेकिन अपने मंत्रियों को नहीं समझाते कि परीक्षा कैसे करानी है। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें।
महाराष्ट्र के पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तहत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि 'कांग्रेस पार्टी सड़क से संसद तक छात्रों और युवाओं की लड़ाई लड़ेगी। पेपरलीक के चलते 21 छात्रों ने जान दी है और इस सबके लिए धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं और प्रधानमंत्री अपने एक मंत्री का इस्तीफा तक नहीं ले पा रहे हैं, आखिर शिक्षामंत्री के पास मोदी की कौन सी फाइल दबी है।'
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने गुरुवार को बेंगलुरु के क्वींस रोड स्थित कृषि प्रौद्योगिकी संस्थान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि यह अभियान केवल प्रश्नपत्र लीक की छिटपुट घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त गहरे संकट को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छात्र असफल नहीं हो रहे हैं बल्कि शिक्षा मंत्रालय और एनडीए सरकार असफल हो रही हैं। उनकी नाकामियों के कारण लाखों छात्र भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा अनियमितताओं और भ्रष्टाचार ने छात्रों का शिक्षा प्रणाली पर से भरोसा हिला दिया है।
जयपुर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने आरोप लगाया कि बार-बार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा, "परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता का मुद्दा बेहद गंभीर है। छात्रों के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। ऐसे मामलों में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।"
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद कर उनकी राय और सुझाव एकत्र करना है। उन्होंने कहा, "हम छात्रों और युवाओं से मिलकर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी उनकी समस्याओं और सुझावों को जानेंगे। उनकी आवाज को संकलित करके आगे बढ़ाया जाएगा।"
महाराष्ट्र के विधायक सतेज पाटिल ने अहमदाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि परीक्षा में बार-बार हुई गड़बड़ियों की वजह से छात्रों का भरोसा टूट चुका है और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। पाटिल ने कहा कि सालों की तैयारी के बाद लगभग 23 लाख छात्र नीट परीक्षा में शामिल हुए लेकिन आखिरकार सिर्फ दो लाख के करीब छात्र ही मेडिकल, दंत, आयुष और उससे जुड़े पाठ्यक्रम में दाखिला ले पाएंगे। उन्होंने कहा, "वे 130 करोड़ लोगों के देश को चलाने की बात करते हैं, लेकिन 23 लाख छात्रों के लिए ठीक से परीक्षा भी आयोजित नहीं कर पाते। यह परीक्षा बहुत मुश्किल है और वे इसे ठीक से आयोजित करने में नाकाम रहे हैं।" उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ पेपर लीक या दोबारा परीक्षा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने व्यवस्था पर से छात्रों के भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
इसी प्रकार देश के कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। ‘छात्रों की गूंज’ अभियान अगले 30 दिनों तक चलेगा। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों में संपर्क कार्यक्रम, टाउन हॉल बैठकें, नुक्कड़ सभाएं, जनसंवाद और पर्चा वितरण अभियान चलाए जाएंगे। यह अभियान 25 जून से 9 अगस्त तक 28 राज्यों और 28 प्रमुख शहरों में चलेगा। यह पहल कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा हाल ही में शिक्षा संबंधी मुद्दों और नीट तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित चिंताओं पर किए गए जनसंपर्क प्रयासों के बाद शुरू की गई है।
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