निकोबार प्रोजेक्ट पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, 'विनाश की ओर बढ़ रहा है द्वीप, तबाह हो जाएंगे प्रवाल'
जयराम रमेश ने कहा, ‘‘ग्रेट निकोबार की गलाथिया खाड़ी में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह को लेकर इस बात का पूरा अंदेशा है कि यह ‘मोदानी’ साम्राज्य का हिस्सा बनेगा। यह पारिस्थितिकीय तबाही का वह कदम है, जिससे बड़ी संख्या में प्रवाल कॉलोनियों का विनाश होगा।’’

कांग्रेस ने बुधवार को ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर फिर से निशाना साधा और कहा कि गलाथिया खाड़ी में प्रस्तावित ‘ट्रांसशिपमेंट’ बंदरगाह ‘पारिस्थितिकीय तबाही’ होगा तथा इससे बड़ी संख्या में प्रवाल (कोरल) कॉलोनियों का भी विनाश होगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के तहत गलाथिया खाड़ी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह स्थल के आसपास प्रभावित होने वाली 16,000 से अधिक प्रवाल कॉलोनियों के स्थानांतरण के लिए भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) जल्द ही अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के पर्यावरण एवं वन विभाग से मंजूरी मांगेगा।
प्रवाल कॉलोनियां समुद्र के भीतर रहने वाले 'पॉलिप्स' नामक छोटे-छोटे जीवों के समूह होते हैं। लाखों-करोड़ों की संख्या में एक साथ जुड़कर रहने वाले ये जीव अपने चारों ओर कैल्शियम कार्बोनेट का एक कठोर आवरण बनाते हैं।
जयराम रमेश ने कहा, ‘‘ग्रेट निकोबार की गलाथिया खाड़ी में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह को लेकर इस बात का पूरा अंदेशा है कि यह ‘मोदानी’ साम्राज्य का हिस्सा बनेगा। यह पारिस्थितिकीय तबाही का वह कदम है, जिससे बड़ी संख्या में प्रवाल कॉलोनियों का विनाश होगा।’’
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा, ‘‘दुनिया में कहीं भी इतने बड़े पैमाने पर प्रस्तावित स्थानांतरण, शमन उपाय के रूप में सफल नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों को अपनी वैज्ञानिक मान्यताओं पर कायम रहने का साहस दिखाना चाहिए, न कि अपने राजनीतिक आकाओं के दबाव में इस परियोजना को आगे बढ़ाना चाहिए।’’
जयराम रमेश की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब कुछ दिन पहले उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ‘आईएनएस बाज’ के रनवे के पूर्ण विस्तार के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।
कांग्रेस नेता ने इस पत्र की प्रति केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को भी भेजी थी।
सरकार की योजना ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह (आईसीटीपी), एक नागरिक-सह-नौसैनिक हवाई अड्डा, एक टाउनशिप और एक विद्युत संयंत्र विकसित करने की है।
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