नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंचे कांग्रेस नेता, प्रवेश नहीं मिलने पर धरने पर बैठे
वेणुगोपाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग को बिना किसी देरी के इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अगर वे हमें बुधवार सुबह मिलने का समय देते हैं, तो हम तब तक इंतजार करने के लिए तैयार हैं। अन्यथा, हम सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ देर शाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता निर्वाचन आयोग पहुंचे, जहां प्रवेश की इजाजत नहीं मिलने पर वे आयोग के बाहर ही धरने पर बैठ गए। काफी देर तक गहमागहमी के बाद दो नेताओं को अंदर जाने की इजाजत मिली, जिसके बाद केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल ने अंदर जाकर आयोग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
भोपाल में निर्वाचन अधिकारी द्वारा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किये जाने की खबर आते ही कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश, वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल, सचिन पायलट और कई अन्य नेता मंगलवार देर शाम चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। काफी देर की कोशिशों के बाद भी जब कांग्रेस नेताओं को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, तो आयोग के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए।इसके कुछ देर बाद आयोग की ओर से पार्टी के दो नेताओं को ज्ञापन सौंपने की अनुमति मिली और फिर वेणुगोपाल और बघेल ने अंदर जाकर ज्ञापन सौंपा।
केसी वेणुगोपाल ने कहा, "मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया। यह सूचना मिलने के 30 मिनट के भीतर, हमने निर्वाचन आयोग को एक पत्र भेजकर मिलने के लिए समय की मांग की। इसके बाद हम सीधे भारत के निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन सौंपने के लिए यहां पहुंचे, लेकिन अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।"
उन्होंने कहा, "हम इस देश के जिम्मेदार नेता और जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। हमें सूचना मिली कि एक या दो नेताओं को कार्यालय में ज्ञापन देने की अनुमति मिल सकती है। इसके बाद मैंने और बघेल जी ने ज्ञापन सौंपा।" कांग्रेस नेता ने कहा, "हालांकि, हमें अपना पक्ष रखने और दलील रखने के लिए निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रत्यक्ष सुनवाई की आवश्यकता है।"
वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह लोकतंत्र की हत्या का स्पष्ट मामला है। उन्होंने कहा, "अगर इस देश में लोकतंत्र का थोड़ा सा भी अंश बचा है तो निर्वाचन आयोग को बिना किसी देरी के इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अगर वे हमें बुधवार सुबह मिलने का समय देते हैं, तो हम तब तक इंतजार करने के लिए तैयार हैं। अन्यथा, हम सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे।"
इससे पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज कर दिया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। वेणुगोपाल ने कहा कि जब तक कांग्रेस नेताओं को आयोग के भीतर जाने की इजाजत नहीं मिलती, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने सवाल किया, "इस देश में क्या हो रहा है? क्या यह बनाना रिपब्लिक है? हमें न्याय चाहिए, कानूनी कदम उठाएंगे, हम अदालत भी जाएंगे।" उन्होंने दावा किया कि बिना किसी कारण के नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया है।
वहीं, सचिन पायलट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है, कोई आरोप पत्र नहीं है, किसी मामले में सजा नहीं हुई है, इसके बावजूद एक नोटिस मिलने का हवाला देकर नामांकन खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे जरूर कोई षड्यंत्र है, इस पर निर्वाचन आयोग को ध्यान देना चाहिए। पायलट ने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि एक राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन बिना किसी कारण के खारिज कर दिया गया।
इससे पहले, केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को खारिज करना बीजेपी द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है। उनके नामांकन में किसी भी त्रुटि या कोई जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण है और कांग्रेस से एक सीट छीनने का एक हताशा भरा प्रयास है।"
उन्होंने कहा, "जब उन्हें एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका नामांकन खारिज करवा दिया।" वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह संविधान और लोकतंत्र के प्रति भाजपा की खोखली प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वह हर कदम पर किसी न किसी तरह "वोट चोरी" पर आमादा है। कांग्रेस नेता ने कहा, "हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे, और इसके खिलाफ कानूनी तरीके से और सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।"
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