कांग्रेस ने की 8 जनवरी से 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की घोषणा, 25 फरवरी तक गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक होंगे कार्यक्रम
कांग्रेस पार्टी 8 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करेगी, जिसका उद्देश्य मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल करना, नए VB ग्राम जी अधिनियम को चुनौती देना और पंचायतों के अधिकार को सुरक्षित रखना है। पार्टी ने इसकी घोषणा की है।

कांग्रेस पार्टी ने शनिवार (3 जनवरी 2026) को कहा कि वह आगामी 8 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत करेगी, जिसके तहत ग्राम स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई कार्यक्रम करने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में चार बड़ी सभाएं आयोजित की जाएंगी। पार्टी का यह अभियान 25 फरवरी तक जारी रहेगा।
कांग्रसे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गेन एक्स हैडल पर पोस्ट किया, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने स्पष्ट और स्पष्ट रूप से तीन मांगें रखीं हैं-
VB ग्राम जी अधिनियम (VB GRAM G Act) को वापस लिया जाए।
मनरेगा (MGNREGA) को अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल किया जाए।
काम का अधिकार और पंचायतों का अधिकार बहाल किया जाए।
इसीलिए हमने देशव्यापी “मनरेगा बचाओ संग्राम” की शुरुआत की है-
मनरेगा कोई चैरिटी नहीं है। यह एक कानूनी गारंटी है। करोड़ों गरीब लोगों को अपने गांवों में रोजगार मिला; मनरेगा ने भूख और मजबूरी में पलायन को कम किया, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाई और महिलाओं की आर्थिक गरिमा को मजबूत किया।"
खड़गे ने आगे कहा, "VB ग्राम जी अधिनियम इस अधिकार को खत्म करने के लिए बनाया गया है। कांग्रेस इसका विरोध करती है क्योंकि-
काम अब हर जगह का गारंटीड अधिकार नहीं रहेगा, केवल चुनी हुई पंचायतों में अनुमति के रूप में मिलेगा।
बजट सीमित होंगे, इसलिए संकट के समय भी पैसे खत्म होते ही काम समाप्त हो जाएगा।
दिल्ली केंद्र सरकार फंड और कार्यों का निर्णय लेगी, जिससे ग्राम सभा और पंचायतें अप्रासंगिक हो जाएंगी।
60 दिन का वर्क ब्लैकआउट, पीक संकट के समय काम से इनकार को कानूनी मान्यता देगा।
मजदूरी असुरक्षित और दबाने योग्य हो जाएगी, अब यह संरक्षित अधिकार नहीं रहेगा।
राज्यों को 40 प्रतिशत फंड देना होगा, जिससे संघवाद कमजोर होगा और गरीब राज्यों को नुकसान होगा।
तकनीक जैसे बायोमेट्रिक और ऐप आधारित बाधाओं के जरिए कामगारों को बाहर रखा जाएगा।
गांव की संपत्तियों की जगह ठेकेदार शैली की परियोजनाएं आएंगी।
मनरेगा पर हमला करना करोड़ों कामगारों और उनके संवैधानिक अधिकारों पर हमला करना है। हम हर पंचायत से संसद तक, शांतिपूर्वक और दृढ़ता से, इसका विरोध करेंगे।"
मनरेगा बहाल करना है 'संग्राम' का उद्देश्य
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उसके इस ‘‘संग्राम’’ का मकसद यह है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बहाल हो और नए कानून को वापस लिया जाए।
मनरेगा के स्थान पर नया कानून और उसकी आलोचना
प्रेस को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मनरेगा के स्थान पर बनाए गए विकसित ‘भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सिर्फ ‘‘विनाश भारत’’ और योजना के केंद्रीकरण की गारंटी दी गई है।
पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर केंद्रित अभियान
उन्होंने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ दिल्ली केंद्रित नहीं, बल्कि पंचायत, प्रखंड और जिला केंद्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
नीति निर्धारक बैठक में निर्णय
बीते 27 दिसंबर को पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में मनरेगा के पक्ष में अभियान शुरू करने का फैसला किया गया था।
अभियान की शुरुआत और सरकारी आलोचना
वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कार्य समिति की बैठक में फैसला किया गया था कि मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू किया जाएगा।’’
उन्होंने दावा किया कि नया कानून इस तरह से बनाया गया है ताकि मनरेगा को खत्म किया जा सके।
विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम की आलोचना
वेणुगोपाल ने कहा कि कोविड और कई दूसरे संकटों के समय मनरेगा एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर सामने आया था। उनके मुताबिक, ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सबकुछ केंद्र सरकार तय करेगी और गांव में रहने वालों को इसकी मार झेलनी पड़ेगी।
वेणुगोपाल ने कहा कि नए कानून के तहत कार्य दिवस को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की बात की गई है, लेकिन यह दावा बकवास है क्योंकि केंद्र के हिस्से में धन आवंटन का अनुपात 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।
योजना का केंद्रीकरण और विरोध
जयराम रमेश ने कहा कि यह ‘‘संग्राम’’ आठ जनवरी से शुरू होगा और 25 फरवरी तक चलेगा। उन्होंने कहा कि जी राम जी अधिनियम की एकमात्र गारंटी योजना का केंद्रीकरण है।
रमेश ने कहा, ‘‘हमारी सिर्फ यही मांग है कि मनरेगा को बहाल किया जाए और नए कानून को वापस लिया जाए।’’
अन्य विपक्षी दलों और समाजिक संगठनों का समर्थन
उन्होंने कहा कि इस ‘‘संग्राम’’ के साथ दूसरे विपक्षी दलों और समाजिक संगठनों को जोड़ा जाएगा।
रमेश ने दावा किया कि इस संग्राम का निष्कर्ष वही होगा जो तीन ‘‘काले’’ कृषि कानूनों के समय आंदोलन की सफलता के रूप में हुआ था जब सरकार को वो कानून वापस लेने पड़े थे।
संसद में विधेयक की मंजूरी
संसद ने विपक्ष के हंगामे के बीच बीते 18 दिसंबर को ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद अब यह अधिनियम बन चुका है। यह 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा।
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