बीजेपी की करतूतों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस, महासचिवों, प्रदेश अध्यक्षों की बैठक में फैसला

इस अभियान का पूरा कार्यक्रम अगले कुछ दिनों में जारी कर दिया जाएगा। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस अभियान का मुख्य मकसद इन विषयों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जवाबदेह ठहराना है।

बीजेपी की करतूतों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस, महासचिवों, प्रदेश अध्यक्षों की बैठक में फैसला
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कांग्रेस ने गुरुवार को सभी प्रदेश अध्यक्षों, महासचिवों और प्रभारियों की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए मध्य प्रदेश से पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने, नीट पेपर लीक, महंगाई और बेरोजगारी समेत बीजेपी की कारगुजारियों के खिलाफ जल्द ही राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया। इस अभियान का पूरा कार्यक्रम अगले कुछ दिनों में जारी कर दिया जाएगा। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस अभियान का मुख्य मकसद इन विषयों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जवाबदेह ठहराना है।

कांग्रेस नेतृत्व की पार्टी के सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और राज्य इकाइयों के अध्यक्षों के साथ बैठक में राष्ट्रव्यापी अभियान का निर्णय लिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी, जयराम रमेश समेत सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

बैठक के बाद संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "मध्य प्रदेश और झारखंड के राज्यसभा चुनावों में जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था। झारखंड में बीजेपी समर्थित कॉर्पोरेट उम्मीदवार का नामांकन कई विसंगतियों के बावजूद स्वीकार कर लिया गया।" उन्होंने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की दयनीय स्थिति का परिचायक है। उन्होंने दावा किया कि यह 'सीट चोरी' है।

वेणुगोपाल ने कहा कि आज की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई और फैसला हुआ कि इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेंगे। उनका कहना था कि बैठक में महंगाई और बेरोजगारी पर भी चर्चा की गई। वेणुगोपाल ने कहा कि नीट और सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली से बहुत सारे परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि अगले दो-तीन महीने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया जाएगा।


वेणुगोपाल ने कहा, पार्टी पूरे भारत में एक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने जा रही है। यह सिर्फ़ नेशनल लेवल पर ही नहीं, बल्कि स्टेट, डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक लेवल पर भी होगा। जहां भी लोगों को मुश्किलें आ रही हैं, कांग्रेस पार्टी वहां जाएगी, उनकी भावनाएं शेयर करेगी और उनके लिए लड़ेगी। सिर्फ़ पुराने तरीकों से ही नहीं, हम उन लोगों के पास जाएंगे जो परेशान हैं, जो दर्द में हैं। हम ज़्यादा से ज़्यादा आंदोलन के ज़रिए उनका दर्द बांटने और उनकी आवाज़ को नेशनल लेवल तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस के हर नेता और वर्कर को सड़कों पर उतरना चाहिए। हम अगले दो से पांच दिनों में प्रोग्राम की डिटेल्स बना लेंगे।

वेणुगोपाल ने कहा कि हमारी मीटिंग में देश के मौजूदा पॉलिटिकल हालात, खासकर आर्थिक संकट पर बात हुई। पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की कीमतें दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। लोग बहुत परेशान हैं, लेकिन सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया है। बेरोज़गारी अपने पीक पर है। पूरा MSME सेक्टर पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। युवा अपने भविष्य को लेकर बहुत परेशान हैं। रोज़गार नहीं है।

कांग्रेस नेता ने कहा, नीट और सीबीएसई एग्जाम के मुद्दों की वजह से स्टूडेंट्स बहुत खतरनाक स्थिति में हैं। सरकार इनमें से किसी भी मुद्दे के लिए कोई नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं ले रही है। हमें कब तक एजुकेशन मिनिस्टर का इस्तीफ़ा मांगना होगा? देश में हालात इतने खतरनाक हैं कि एक तरफ डेमोक्रेसी नहीं है और दूसरी तरफ आम लोग अपनी रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कांग्रेस हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगी जो पीड़ित है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होगा कि इन विषयों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जवाबदेही तय हो।


हालिया विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस महासचिवों एवं प्रभारियों की संयुक्त रूप से यह बैठक पहली बार हुई है। इससे पहले, खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज देश के सामने महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियां हैं। नीट, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों ने करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों का विश्वास हिलाया है। राहुल गांधी स्वयं प्रभावित छात्रों और युवाओं से मिले हैं तथा उनकी आवाज़ को देश के सामने मजबूती से रखा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज दुर्भाग्य से हम देखते हैं कि जिन संस्थाओं और व्यवस्थाओं को बनाने में दशकों लगे, उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी केवल राजनीतिक संघर्ष की नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा की भी है।’’

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