'अग्निपथ योजना' पर कांग्रेस ने जताई आशंका, कहा- योजना को स्थगित कर सैन्य अफसरों से सलाह-मश्विरे के बाद बने खाका

देश के तमाम हिस्सों में मोदी सरकार की अग्निपथ योजना का विरोध हो रहा है। युवा सड़कों पर हैं इसे 'नो रैंक, नो पेंशन' योजना कह रहे हैं। ऐसे में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार से इस योजना को स्थगित करने का आग्रह करते हुए कहा है कि सैन्य अफसरों से सलाह के बाद सेना में भर्ती का खाका बनाया जाना चाहिए।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस पार्टी ने एक बयान जारी कर मोदी सरकार की अग्निपथ योजना को देश के युवाओं के साथ छलावा बताया है। कांग्रेस ने कहा, “जिस तरह सेना के तीनों अंगों में 46,000 जवानों की भर्ती के लिए केंद्र ने अग्निपथ योजना का ऐलान किया है, वह बेहद चिंता की बात है। अग्निपथ योजना विवादास्पद है और इसके कई जोखिम हैं जो दीर्घावधि में सैन्य बलों की बरसों पुरानी परंपरा और नैतिकता के खिलाफ हैं। इस योजना से स्पष्ट नहीं है कि जिन जवानों की भर्ती की जाएगी उन्हें सही तरह प्रशिक्षण दिया जा सकेगा और देश की रक्षा के लिए उत्साहित किया जा सकेगा।”

कांग्रेस ने कहा कि, “इस योजना को लेकर सेना के रिटायर्ड अफसरों ने अपनी आपत्ति और आशंकाएं जाहिर की है। इन पूर्व सैनिकों इस योजना का विरोध किया है और हमें लगता है कि जो अफसर अभी सेवा में हैं उनके मन में भी इस तरह की आशंकाएं हैं।”

शॉर्ट ट्रेनिंग, शॉर्ट सर्विस

कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि, “हमारी पहली चिंता यह है कि अग्निपथ योजना के तहत जवानों को सिर्फ 6 महीने की ट्रेनिंग जी जाएगी और फिर वे अगले 42 महीनों तक नौकरी करेंगे और इनमें से 75 फीसदी को नौकरी से निकाल दिया जाएगा। हमारी मानना है कि सरकार ने इस योजना के जरिए सेना की ट्रेनिंग का मजाक बनाया है। साथ ही इन अर्ध प्रशिक्षित और अर्ध उत्साहित युवाओं को पहले सेना में भर्ती किया जाएगा और फिर उन्हें एक हताश और निराश जवान की तरह समाज में छोड़ दिया जाएगा।”

कांग्रेस ने कहा कि इसके अलावा इस योजना के तहत भर्ती होने वाली जवानों की उम्र साढ़े सत्रह साल से 21 साल के बीच रखे जाने पर भी सवाल उठते हैं। इस आयु वर्ग के युवाओं को भर्ती किए जाने से युवाओं की एक बड़ी संख्या को सेना में असली भर्ती से महरूम कर दिया जाएगा।


कांग्रेस ने कहा कि इस योजना का जो उद्देश्य बताया गया है वह तर्क काफी कमजोर और संदिग्ध है। सिर्फ 6 महीने की मामूली ट्रेनिंग और सिर्फ 42 महीने की कम अवधि की नौकरी सेना की गुणवत्ता, दक्षता और प्रभावशीलता पर विपरीत असर डाल सकती है।

सैन्य अधिकारियों की चेतावनी सुनो सरकार

कांग्रेस ने सरकार से आग्रह किया है कि उसे पूर्व और सेवारत सैन्य अधिकारियों द्वारा जताई जा रही आशंकाओं और चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि, “कई प्रतिष्ठित रक्षा अधिकारियों ने बताया है कि एक लड़ाकू सैनिक को अपनी यूनिट पर गर्व होना चाहिए; अपने देश और साथियों के लिए अपनी जान देने को तैयार होना चाहिए; जोखिम से बचना नहीं चाहिए; और नेतृत्व का प्रदर्शन करने में सक्षम होना चाहिए। उन्हें डर है कि योजना के तहत इनमें से सेना का हर एक उद्देश्य खतरे में पड़ जाएगा।“

कांग्रेस ने इस बात को रेखांकित किया है कि गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा इन जवानों को सेवा बाद दिए वाले मौकों को लेकर की गई घोषणाएं बाद में सामने आई हैं जो तीर कमान से निकलने के बाद की प्रतिक्रिया है। इससे जाहिर होता है कि अग्निपत योजना को हड़बड़ी में बिना सोचे-समझे सामने रख दिया गया है। कांग्रेस ने कहा कि होना तो यह चाहिए था कि भर्ती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लाया जाता और एक पायलट स्कीम के तहत इसे लागू कर देखा जाता कि यह कितना कामयाब होता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।

तमाम विशेषज्ञों ने सेना में कम भर्ती की समस्या सुलझाने के लिए कई वैकल्पिक तरीके सुझाए हैं। लेकिन ऐसा लगता नहीं कि सरकार ने इनमें से किसी भी विकल्प पर विचार किया है।

इस योजना को स्थगित करो, सलाह-मश्विरा करो

हमारी सीमाओं की स्थिति के मद्देनजर यह जरूरी है कि हमारे जवान ऐसे हों जो युवा हों, अच्छी तरह प्रशिक्षित हों, प्रोत्साहित हों, खुश हों, अपने काम से संतुष्ट हों और अपने भविष्य को लेकर निश्चिंत हों। लेकिन अग्निपथ योजना इसमें से किसी भी उद्देश्य की पूर्ति करती नहीं दिखती।

कांग्रेस ने कहा कि, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस योजना की खामियों के बारे में देश को चेताएं। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि इस योजना को वापस ले, इस विषय में सेना के पूर्व और मौजूदा विशेषज्ञों और अधिकारियों से सलाह-मश्विरा करे, सेना की गुणवत्ता, क्षमता और आर्थिक पहलुओं पर कोई समझौता न हो।”

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