कोरोना ने लाखों मुसलमानों के काबा के दीदार का सपना तोड़ा, हज कमेटी ने रद्द की इस साल की हज यात्रा
सऊदी अरब से अब तक कोई जवाब नहीं मिलने पर जायरीनों को पूरा रिफंड लौटाने के भारतीय हज कमेटी के फैसले के बाद भारतीय मुसलमानों के लिए इस साल की हज यात्रा महज एक सपना भर बनकर रह गया है। इससे पहले इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे कई देश भी स्वेच्छा से इस साल की हज यात्रा को रद्द कर चुके हैं।

भारतीय हज कमेटी द्वारा 2020 हज के लिए पूरा रिफंड लौटाने का ऐलान किये जाने के साथ ही हजारों मुस्लिम जायरीनों का इस साल हज करने का सपना टूट गया है। हालांकि, सऊदी अरब सरकार की ओर से आगामी हज याात्रा को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। लेकिन दुनिया पर छाए कोरोना संकट के बीच सऊदी सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर भारतीय हज कमेटी ने इस साल की हज यात्रा को रद्द करने का फैसला लेते हुए जायरीनों की हज फीस लौटाने का ऐलान कर दिया है।

महाराष्ट्र से इस साल हज यात्रा के लिए लगभग 10,500 मुस्लिमों का चयन किया गया था। महाराष्ट्र राज्य हज समिति के अध्यक्ष जामिया सिद्दीकी ने कहा, "मार्च में भारत में लॉकडाउन लगाए जाने से पहले, सऊदी अरब सरकार ने हज 2020 की तैयारियों को अस्थायी रूप से रोकने के लिए हमें सूचित किया था और उसके बाद इस बारे में कोई सूचना नहीं है। यह हज यात्रा नहीं होने को स्पष्ट कर देता है।"
जायरीनों को पूरा रिफंड लौटाने के भारतीय हज कमेटी के फैसले और सऊदी अरब से आगे कोई निर्देश नहीं आने के कारण, उन्हें लगता है कि हज 2020 मुसलमानों के लिए महज एक इच्छा भर बनकर रह सकता है, लेकिन किसी को भी इसके लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
जामिया सिद्दीकी ने कहा, "यह कोविड-19 महामारी की वजह से है। लेकिन, हमें लगता है कि जायरीनों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए। हमने केंद्र को पत्र लिखकर मांग की है कि इस साल चयनित लोगों को अगले साल जाने के लिए अनुमति दी जाए। अगर केंद्र रिफंड दे रहा है, तो यह पर्याप्त मुआवजे के साथ होना चाहिए।" साथ ही उन्होंने सवाल किया कि सऊदी अरब सरकार की ओर से 13 मार्च को भेजी गई सूचना के बाद जब हज 2020 पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया था, तो फिर भी हज समिति ने शुल्क संग्रह जारी क्यों रखा?
इस साल, भारत से अनुमानित 200,000 मुस्लिम हज करने की योजना बना रहे थे, जिसमें विभिन्न राज्यों की हज समितियों के माध्यम से 125,000 से अधिक और बाकी लगभग 47,000 निजी हज टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा करने की योजना बना रहे थे। 'इंडियन हज और उमरा टूर ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के अध्यक्ष सैयद ए.आर. मिल्ली ने कहा कि मुआवजे की मांग अनुचित है, लेकिन उन्होंने 2021 के हज सीजन के लिए इस साल के जायरीनों की सूची को आगे बढ़ाने की मांग का समर्थन किया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीम खान ने इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि लोग वर्षों से आवेदन करते हैं, इसलिए इस साल 2020 के लिए चुने गए लोगों को मुश्किल से मिलने वाले इस अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को उन्हें 2021 में हज पर भेजने के लिए विचार करना चाहिए।
हज समितियों के माध्यम से जाने वाले जायरीन 201,000 रुपये का भुगतान करते हैं। ग्रीन श्रेणी के लोग 2.90 लाख रुपये का भुगतान करते हैं। वहीं ए आर मिल्ली ने बताया कि निजी हज टूर ऑपरेटरों के जरिये हज यात्रा करने वालों को आवेदन के लिए गोल्ड, सिल्वर या ब्रॉन्ज श्रेणी के आधार पर 3.50 लाख रुपये से 12 लाख रुपये के बीच भुगतान करना होता है।
गौरतलब है कि इस साल मई में, बहुप्रतीक्षित रमजान उमरा को पहली बार निलंबित किया गया, जिससे दुनिया भर के लगभग 30 लाख जायरीन निराश हैं, जिसमें अकेले भारत से करीब 500,000 लोग शामिल हैं। बता दें कि इससे पहले इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे कई देशों द्वारा भी स्वेच्छा से इस साल की हज यात्रा को रद्द किया जा चुका है।
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Published: 06 Jun 2020, 7:22 PM
