यूपी में कोरोना विस्फोट, पहले दौर के जिलों में ही सबसे ज्यादा केस, क्या चुनावी रैलियों से पाबंदी हटाएगा आयोग!

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण में हाल के दिनों में बहुत तेजी आई है, और सबसे ज्यादा केस उन जिलों में मिले हैं जहां पहले दौर में 10 फरवरी को मतदान होना है। ऐसे चुनावी रैलियों पर लगी पाबंदी को क्या चुनाव आयोग आज होने वाली समीक्षा बैठक में हटाएगा?

प्रतीकात्मक फोटो
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नवजीवन डेस्क

क्या राजनीतिक दलों को चुनावी रैलियां और सभाएं करने की इजाजत मिलेगी? कोरोना की तीसरी लहर के चलते चुनावी रैलियों पर लगे प्रतिबंध की चुनाव आयोग आज समीक्षा करने वाला है। लेकिन बीते 3-5 दिनों में जो हालात बने हैं उसे देखते हुए इसकी संभावना कम ही नजर आती है।

चुनाव आयोग आज अपने उस फैसली की समीक्षा करेगा जिसके तहत चुनावी राज्यों में 15 जनवरी यानी आज तक के लिए चुनावी सभाओं और रैलियों पर पाबंदी लगाई गई थी। आयोग ने कहा था कि कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए ऐसी पाबंदी लगाई जा रही है। लेकिन बाकी राज्यों को छोड़ अगर सिर्फ उत्तर प्रदेश की ही बात करें तो देश की सबसे बड़ी आबाद वाले राज्य में तो कोरोना विस्फोट हो चुका है। अभी शुक्रवार को राज्य में 16 हजार से ज्यादा नए केस सामने आए।

उत्तर प्रदेश में बीते 6 दिनों के दौरान 70 हजार से ज्यादा नए केस सामने आए हैं, और एक्टिव केसों की संख्या 350 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है। वहीं प्रतिदिन एक्टिव पॉजिटिव केस की तादाद में भी 200 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

लेकिन सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति उन जिलों की है जहां पहले ही चरण में चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने जो कार्यक्रम घोषित किया है उसके मुताबिक पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में मतदान होना है। इनमें से 7 जिलों में स्थिति गंभीर नजर आ रही है। गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, मथुरा, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर ऐसे जिले हैं जहां 40 हजार से ज्यादा नए केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस बात की संभावना बेहद कम है कि कम से कम पहले दौर के लिए तो अभी जनसभाओं की अनुमति मिल पाएगी।


आज जब चुनाव आयोग प्रचार के तौर तरीकों पर फैसला लेने के लिए अपनी बैठक करेगा तो उसके लिए यह फैसला करना मुश्किल होगा क्योंकि बड़े राजनीतिक दलों को चुनावी रैलियों और सभाओं की अनुमति देने का अर्थ होगा भारी भीड़ का जमा होना और ऐसे में चुनावी रैलियां ही कोरोना की सुपर स्प्रेडर बन जाएंगी। ऐसे में लगता यही है कि उत्तर प्रदेश में इस बार चुनाव प्रचार वर्चुअल मोड में ही होगा।

बताते चलें कि चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 10 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में मतदान होगा। इनमें गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद, मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा शामिल हैं। इन जिलों की 58 विधानसभाओं में चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो चुकी है।

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