कोरोना लॉकडाउन: दिहाड़ी मजदूरों पर टूटा मुसीबतों का पहाड़, काम बंद, सैकड़ों किलोमीटर के सफर पर घर पैदल ही निकले

दिहाड़ी मजदूर दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर अपने घर पैदल जाते हुए दिखाई दिए। लॉकडाउन की वजह ट्रेन और बस सेवा बंद है। अपने घर पैदल जाते हुए एक मजदूर ने कहा कि 250-300 किलोमीटर दूर मेरा गांव है, वहां जा रहा हूं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देश भर में जारी लॉकडाउन के बीच दिहाड़ी मजदूरों की हालत बिगड़ी जा रही है। काम बंद है। ऐसे मजदूरों को खाने के लाले पड़ गए हैं। यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अलग-अलग शहरों से दिहाड़ी मजदूर यातायात सेवा बंद होने के बावजूद सैकड़ों किलोमीटर के सफर पर अपने घर के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं।

ऐसे ही कुछ दिहाड़ी मजदूर दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर अपने घर पैदल जाते हुए दिखाई दिए। लॉकडाउन की वजह ट्रेन और बस सेवा बंद है। अपने घर पैदल जाते हुए एक मजदूर ने कहा कि 250-300 किलोमीटर दूर मेरा गांव है, वहां जा रहा हूं। मजदूर ने कहा कि अगर साधन मिला तो उससे जाएंगे, नहीं तो पैदल ही चले जाएंगे।

देश में कोरना वायरस के संकट के बीच लगातार इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि जो मजदूर असंगठित क्षेत्र के हैं उनके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट सकता है। इस बात के संकेत कई दिनों पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने दिए थे। दोनों ही नेताओं ने दिहाड़ी मजदूरों के लिए पीएम मोदी से आर्थिक पैकेज की मांग की थी। सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में मजदूरों की रोजी-रोटी को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने पीएम मोदी से मांग की थी कि जल्द से जल्द करोड़ों दिहाड़ी मजदूरों के लिए सरकार आर्थिक पैकेज का ऐलान करे, लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।

वहीं, राहुल गांधी ने भी इस ओर मोदी सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने कहा था कि दिहाड़ी मजदूरों को फौरन सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि उनके अकाउंट में सीधे कैश ट्रांसफर किया जाए। राशन मुफ्त उपलब्ध हो। राहुल गांधी ने कहा था कि इसमें कोई भी देरी विनाशकारी साबित होगा। बावजूद इसके पीएम मोदी और उनकी सरकार की ओर से दिहाड़ी मजदूरों के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

Published: 26 Mar 2020, 10:53 AM
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