दिल्ली यूनिवर्सिटी में कोर्सेज की फीस नहीं बढ़ेगी, सीट छोड़ने पर भी नहीं लगेगा कोई शुल्क

दिल्ली विश्वविद्यालय में जहां अंडरग्रेजुएट कोर्सेज के लिए दाखिला प्रक्रिया सोमवार 2 अगस्त से शुरू हुई है, वहीं पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रम के लिए दाखिला प्रक्रिया 26 जुलाई से शुरू हो चुकी है। विश्वविद्यालय द्वारा शुरू दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है।

फोटोः IANS
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नवजीवन डेस्क

देश में कोरोना महामारी के चलते कई लोगों की आमदनी में गिरावट आई है तो कई का रोजगार चला गया है। इसी देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस बार फीस नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इसके अलावा भी छात्रों को एक और राहत दी है। दाखिला फीस भरने के बाद यदि कोई छात्र अपना नाम वापस लेना चाहे तो विश्वविद्यालय ऐसे छात्रों को पूरी फीस वापस करेगा। छात्र का यदि किसी अन्य पाठ्यक्रम, शिक्षण संस्थान में दाखिला हो गया है और इस वजह से वह दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं लेना चाहता तो ऐसी स्थिति में भी छात्र की फीस वापस कर दी जाएगी।

डीयू दाखिला समिति का कहना है कि छात्रों को 31 अक्टूबर से पहले इस बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित करना होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला पा चुके छात्र यदि 31 अक्टूबर से पहले अपना नाम वापस लेते हैं तो उनको पूरी फीस वापस की जाएगी। दूसरी ओर यदि कोई छात्र 31 अक्टूबर के बाद अपनी सीट छोड़ना चाहता है तो ऐसी स्थिति में प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में 1000 का शुल्क विश्वविद्यालय वसूलेगा।


गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कालेजों में दाखिले की प्रक्रिया 2 अगस्त से शुरू हो गई है। इस बार बड़ी संख्या में 12वीं के छात्रों ने 95 से अधिक अंक अर्जित किए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के मुताबिक ऐसे में कॉलेजों में एडमिशन बढ़ाए जा सकते हैं। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेज की मेरिट लिस्ट भी पहले के मुकाबले और अधिक ऊपर जा सकती है।

यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए 31 अगस्त तक आवेदन फार्म भरा जा सकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा शुरू की गई यह दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है। दिल्ली विश्वविद्यालय में जहां अंडरग्रेजुएट कोर्सेज के लिए दाखिला प्रक्रिया सोमवार 2 अगस्त से शुरू हुई है, वहीं पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रम के लिए दाखिला प्रक्रिया 26 जुलाई से शुरू हो चुकी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष कोविड महामारी के कारण सामने आई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, इस वर्ष, छात्रों के लाभ के लिए पात्रता मानदंड को पिछले वर्ष की तरह बनाए रखने का निर्णय लिया है।

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