मुंबई बैंक में डायरेक्टर बनने के लिए बीजेपी के करोड़पति नेता बन गए मजदूर, सरकार ने नोटिस भेजकर मांगा है स्पष्टीकरण

मलाईदार पद हासिल करने के लिए नेता कुछ भी कर गुजरने को तत्पर रहते हैं। इसी की मिसाल सामने आई है मुंबई बैंक के निदेशक मंडल के चुनाव में। इस चुनाव में डायरेक्टर पद हासिल करने के लिए बीजेपी के करोड़पति नेता ने खुद को मजदूर दिखाया है। अब उनसे इस बाबत स्पष्टीकरण मांग गया है।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवीन कुमार

मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक मर्यादित को मुंबई बैंक के नाम से भी जाना जाता है। यह बैंक कथित घोटालों की वजह से भी सुर्खियों में है। इस बैंक का निदेशक बनने के लिए बीजेपी के एक नेता श्रमिक बन गए हैं जबकि वह करोड़पति हैं। उस नेता के करोड़पति होने का खुलासा तब हुआ जब शिकायत मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने नोटिस भेजकर उस नेता को यह साबित करने को कहा कि वह किस आधार पर श्रमिक हैं। बीजेपी के यह नेता प्रवीण दरेकर हैं जो महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता हैं। दरेकर को पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से तोड़कर बीजेपी में शामिल किया और पार्टी के निष्ठावान नेताओं को दरकिनार कर उन्हें विधान परिषद में विपक्ष का नेता भी बना दिया। जब दरेकर को बीजेपी में शामिल किया गया था, उस वक्त भी वह मुंबई बैंक के कथित घोटालों में घिरे हुए थे। उस वक्त दरेकर बैंक के अध्यक्ष पद पर थे और इस वक्त भी वह इसी पद पर हैं। घोटालों का मामला फिलहाल अदालत में है।

मुंबई बैंक के निदेशक मंडल के लिए हो रहे चुनाव के नतीजे 3 जनवरी को आएंगे। 21 निदेशकों वाले इस निदेशक मंडल का कार्यकाल पांच साल का होगा। इसी निदेशक मंडल के चुनाव के लिए दरेकर ने श्रमिक श्रेणी के अलावा बैंकिंग समूह (नागरिक बैंक) से भी अपना नामांकन दाखिल किया है। निदेशक पद के लिए चुनाव लड़ने वाले सारे उम्मीदवारों की ओर से निर्विरोध चुनाव कराने की कवायद हो रही है। दरेकर के साथ बीजेपी के विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड और आनंदराव गोले के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं है इसलिए माना जा रहा है कि ये तीनों निर्विरोध चुने जाएंगे। बाकी 18 उम्मीदवारों के भी निर्विरोध चुनाव की कोशिश हो रही है।

लेकिन श्रमिक वर्ग से दरेकर ने जिस तरीके से अपना नामांकन दाखिल किया है, उसके खिलाफ सहकारी सुधार पैनल के अंकुश जाधव और संभाजी भोसले ने मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष 12 दिसंबर को शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सहकारिता विभाग के मुंबई सह-निबंधक केदार जाधव ने नोटिस भेजकर दरेकर को श्रमिक साबित करने को कहा है। नोटिस में सवाल किया गया है कि विधायक के रूप में वह हर महीने ढाई लाख का वेतन और भत्ता लेते हैं, तो आप श्रमिक कैसे हैं?

इधर, दरेकर ने अपने आवेदन में खुद को अंधेरी (पूर्व) स्थित प्रतिज्ञा मजदूर संस्था का श्रमिक बताया है। सहकारिता विभाग को प्रतिज्ञा मजदूर संस्था का वह रजिस्टर नहीं मिला है जिसमें काम वितरण का विवरण है। हाजिरी रजिस्टर के मुताबिक, दरेकर ने सुपरवाइजर के रूप में नकद रकम ली है। उनके शारीरिक श्रम करके श्रमिक होने का जिक्र नहीं है। दरेकर ने 2017 में 60 दिनों तक मजदूरी की है और 25,750 रुपये मजदूरी के रूप में हासिल किए हैं।


दरेकर पहली बार मनसे के टिकट पर 2009 में विधायक बने थे। 2014 में वह चुनाव हार गए थे। लेकिन दरेकर बीजेपी में शामिल हो गए और 2016 से विधान परिषद सदस्य हैं और अभी परिषद में विपक्ष के नेता हैं। दरेकर ने विधान परिषद के चुनाव के समय दाखिल अपने हलफनामे में अपने परिवार की संपत्ति दो करोड़ 9 लाख रुपये बताए हैं। इस हलफनामे में दरेकर के श्रमिक होने का जिक्र नहीं है। वैसे भी, वह 2017 में अपने श्रमिक होने का दावा कर रहे हैं जबकि 2016 से वह विधान परिषद सदस्य हैं। उन्हें विधायक के रूप में हर महीने ढाई लाख रुपये वेतन और भत्ते मिलते हैं इसलिए प्रथम दृष्ट्या वह श्रमिक श्रेणी में नहीं आते हैं।

शायद दरेकर को भी आशंका थी कि इस बार के निदेशक मंडल के चुनाव में उनके श्रमिक होने को चुनौती मिल सकती है, इसलिए उन्होंने विकल्प के तौर पर बैंकिंग समूह (नागरिक बैंक) से भी अपना नामांकन भरा है। अगर उन्हें श्रमिक श्रेणी वाला नामांकन वापस लेना पड़ा, तो वह बैंकिंग समूह से भी निदेशक बन सकते हैं। इससे पहले भी दरेकर श्रमिक श्रेणी से हीचुनाव लड़कर निदेशक बने हैं और अध्यक्ष पद हासिल किया है। लेकिन उस समय उनके खिलाफ किसी ने शिकायत नहीं की थी और वह 2015 से 2000 तक अध्यक्ष पद पर रहे। दरेकर के कार्यकाल में ही बैंक में 123 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ियां हुई हैं।

रोचक यह भी है कि बीजेपी नेता विवेकानंद गुप्ता ने बैंक की कथित गड़बड़ियों को लेकर दरेकर सहित बैंक के पदाधिकारियों के खिलाफ मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दिया था। लेकिन मामले के एक अन्य शिकायतकर्ता पंकज कोटेचा कीआपत्ति के चलते मजिस्ट्रेट कोर्ट और सत्र न्यायालय में दरेकर को राहत नहीं मिली, तो दरेकर ने निचली अदालत के आदेश को बांबे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई 11 जनवरी को होगी।

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