दिल्ली: प्रचंड ठंड में कमरे में अंगीठी जालकर सो रहा था परिवार, दम घुटने से 4 लोगों की मौत, भूलकर भी न करें ये काम!

घर में अंगीठी जालकर से रहे चार लोगों की दम घुटने से मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि अंगीठी की वजह से कमरे में धुंआ भर गया था। कमरे में सो रहे लोगों का दम घुट गया।

दिल्ली में अंगीठी जलाकर सो रहे 4 लोगों की मौत।
दिल्ली में अंगीठी जलाकर सो रहे 4 लोगों की मौत।
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नवजीवन डेस्क

देश की राजधानी दिल्ली में हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ी रही है। पारा 4 डिग्री तक गिर गया है। ऐसे में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव और अंगीठी का सहारा ले रहे हैं। नॉर्थ दिल्ली के खेड़ा इलाके में यही अंगीठी चार लोगों के लिए काल बन गई है। घर में अंगीठी जालकर से रहे चार लोगों की दम घुटने से मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि अंगीठी की वजह से कमरे में धुंआ भर गया था। कमरे में सो रहे लोगों का दम घुट गया।

सुबह जब पूरा परिवार देर तक नहीं उठा। आसपास के लोगों ने इस बात की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा। जब पुलिस अंदर पहुंची तो देखर दंग रह गई। चारों लोगों की मौत हो चुकी थी। इनमें पति-पत्नी और दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि घर का दरवाजा अंदर से बंद था और कमरे में अंगीठी जली हुई थी। चार लोगों में जिन दो बच्चों की मौत हुई है, उनमें एक की उम्र 7 साल और दूसरे की 8 साल है। फिलहाल पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।


सुबह जब पूरा परिवार देर तक नहीं उठा तो आसपास के लोगों ने इस बात की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा। जब पुलिस अंदर पहुंची तो देखकर दंग रह गई। चारों लोगों की मौत हो चुकी थी। इनमें पति-पत्नी और दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि घर का दरवाजा अंदर से बंद था और कमरे में अंगीठी जली हुई थी। चार लोगों में जिन दो बच्चों की मौत हुई है, उनमें एक की उम्र 7 साल और दूसरे की 8 साल है। फिलहाल पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

कमरे में अगर सो रहे हैं तो न करें ये काम

जानकारों के मुताबिक, कमरे में कभी भी अंगीठी जालकर न सोएं। कोयला डालकर अंगीठी जलाने के बाद कार्बन मोनो-ऑक्साइड जैसी गैस निकलती है। यह जहरीली होती है। अगर कोई बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोता है तो वहां कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की मात्रा काफी बढ़ जाती है।

कार्बन मोनोऑक्साइड में कार्बन की मात्रा होती है, जो ब्रेन को प्रभावित करती है। कमरे में सोया इंसान बेहोश भी हो सकता है। जब व्यक्ति सांस लेता है तो सांस के साथ ही खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड गैस फेफड़ों में पहुंच जाती है और खून में मिल जाती है। काफी देर तक ऐसा होता रहता है तो खून में हीमोग्लोबिन कम होने लगता है। ऐसे में व्यक्ति की मौत हो जीती है।

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