सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद उत्साह में दिल्ली सरकार, अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग पर जारी किए आदेश

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि, ‘मोदी सरकार ने हमारे अधिकारों को कम किया था, लेकिन अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक काम करेगी। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही दिल्ली सरकार के हौसले बुलंद हो गए हैं। फैसला आने के बाद आनन-फानन बुलाई गई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने ऐलान किया है कि दिल्ली के अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग अब मुख्यमंत्री की इजाजत से होगी, साथ ही दिल्ली में राशन की घर-घर डिलीवरी और सीसीटीवी लगाने का काम तुरंत शुरु कराने के लिए मुख्य सचिव को आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दिल्ली सरकार अपने पक्ष में बता रही है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि, ‘मोदी सरकार ने हमारे अधिकारों को कम किया था, लेकिन अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक काम करेगी। उन्होंने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से दिल्ली के लोगों से माफी मांगने की बात भी कही।

सिसोदिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा के लिए दिल्ली कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी और तय किया गया कि अब सरकार के सारे फैसले इसी के मुताबिक होंगे। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि राशन की घर-घर डिलीवरी और सीसीटीवी का काम तुरंत शुरू किया जाए।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि, “दो साल पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार से ट्रांसफर-पोस्टिंग की ताकत छीनकर उपराज्यपाल और मुख्य सचिव को दे दी गई थी। बतौर सर्विसेज विभाग मंत्री मैंने आदेश जारी किया है कि इस व्यवस्था को बदलकर आईएएस और दानिक्स समेत तमाम अधिकारियों की ट्रांसफर या पोस्टिंग के लिए अब मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी होगी।” उन्होंने बताया कि सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की पूरी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से बदल दी है और इस बारे में सर्विसेस विभाग को आदेश जारी कर दिया गया है।

सिसोदिया ने आरोप लगाया कि दो साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में उपराज्यपाल को प्रशासनिक मुखिया बना दिया गया था और उपराज्यपाल हर फाइल रोक देते थे, जबकि संविधान के मुताबिक उनके पास यह अधिकार था ही नहीं थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार के फैसलों में उपराज्यपाल से आदेश लेने की जरूरत नहीं रह गई है।

सिसोदिया ने कहा कि उपराज्यपाल द्वारा अधिकारों के असंवैधानिक इस्तेमाल के चलते दिल्ली की जनता का दो साल तक नुकसान किया गया, फाइलों को रोका गया, अधिकारियों को धमकियां दी गईं और मंत्रियों पर सीबीआई के मामले थोपे गए, लेकिन अब तस्वीर साफ हो गई है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि जमीन, पुलिस और पब्लिक ऑर्डर छोड़कर सभी मसलों पर कानून बनाने का अधिकार दिल्ली सरकार और दिल्ली विधानसभा के पास रहेगा। मोदी सरकार और उपराज्यपाल ने मौजूदा कानून की गलत व्याख्या कर हमारे अधिकारों को कम किया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्हासित सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार और उपराज्यपाल को दिल्ली वालों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल से हमारी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, लेकिन हम दिल्ली की जनता के काम में रोड़ा अटकाने वालों से टकराए।

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