दिल्ली नाइट कर्फ्यू: 8 बजे से ही बंद होने लगीं दुकानें, स्टाफ की नौकरी पर भी खतरा, दिन में भी सड़कों पर घटी भीड़

दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट पैलेस स्थित दुकानें बुधवार को 8 बजे से ही बंद होने लगीं। स्टाफ का घर दूर होने की वजह से भी दुकान संचालकों को ये कदम उठाना पड़ रहा है। वहीं कुछ कर्मचारियों की नौकरी पर भी खतरा मंडराने लगा है।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

कोरोना का खतरा बढ़ने पर दिल्ली सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगाया तो इसका असर दिन में भी दिखने लगा है। बुधवार को सेंट्रल दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर वाहनों की संख्या कम दिखाई दी। मेट्रो के जिन प्रमुख स्टेशनों पर अमूमन भीड़ देखी जाती थी, वहां भी हलचल कम रही। मंडी हाउस, राजीव चौक जैसे मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ पहले से कम दिखी। माना जा रहा है कि कोरोना के बढ़ते मामलों और सरकार की ओर से नाइट कर्फ्यू लगा दिए जाने से अब लोग बहुत जरूरी कार्य होने पर ही दिन में घर से निकल रहे हैं।

यात्रियों की संख्या कम होने से सेंट्रल दिल्ली में ऑटो चलाने वाले राजकुमार परेशान दिखे। राजकुमार ने कहा, "लोगों में अब कोरोना का और डर फैल गया है। नाइट कर्फ्यू के कारण लोग कम निकल रहे हैं। पिछले साल कोरोना संकट के कारण रोजी-रोटी बुरी तरह प्रभावित हुई थी, किसी तरह से अब जिंदगी पटरी पर लौट रही है, लेकिन फिर से कोरोना का खतरा बढ़ने से पिछले साल की दशा में पहुंचने की आशंका डराती है।"

दूसरी ओर दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट पैलेस स्थित दुकानें बुधवार को 8 बजे से ही बंद होने लगीं। स्टाफ का घर दूर होने की वजह से भी दुकान संचालकों को ये कदम उठाना पड़ रहा है। वहीं कुछ कर्मचारियों की नौकरी पर भी खतरा मंडराने लगा है। कनॉट प्लेस स्थित हल्दीराम के मैनेजर रमेश शर्मा ने बताया, "मंगलवार को नाइट कर्फ्यू का पहला दिन था, घर के लिए निकलने में देर हो गई। मुझे चांदनी चौक पर पुलिसकर्मियों ने रोक लिया और आगे से रात में जल्दी घर पहुंचने के लिए कहा।"

शर्मा ने बताया, "हम अपनी दुकान अब रात 9 बजे ही बंद कर देते हैं, ताकि स्टाफ जल्दी अपने घर पहुंच सकें। हालांकि अभी तक किसी स्टाफ ने जल्दी छोड़ने की गुजारिश की है, क्योंकि सभी आस-पास ही रहते हैं।"

कनॉट प्लेस स्थित स्नो व्हाइट दुकान के मैनेजर सुनील दत्त ने बताया, "हमारी दुकान पर 90 कर्मचारी हैं, सभी की समस्या को देखते हुए हम साढ़े 8 बजे ही दुकान बंद करना शुरू कर देते हैं। हालांकि जो लड़कियां हैं, उनको हम 8 बजे ही छोड़ दे रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "दिल्ली मेट्रो को भी इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि 10 बजे आखिरी एंट्री रखोगे तो लोग अपने घर कब पहुंचेंगे, उन्हें इस कम कर 9 बजे आखिरी एंट्री करनी चाहिए, ताकि व्यक्ति घर अपने समय से पहुंच सके और नियमों का पालन कर सकें।"

हालांकि कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने मालिकों आए साढ़े 7 बजे ही दुकान से घर जाने के लिए कह दिया है। कनॉट प्लेस की एक दुकान में कार्यकर्त कर्मचारी राजू ने बताया, "मैं पहले एक घंटे में घर पहुंचता था, लेकिन मंगलवार को जाम के कारण मुझे 2 घंटे से भी अधिक समय लग गया। नाइट कर्फ्यू के कारण मुझे पुलिसकर्मियों ने दो से तीन बार रोका, जिसकी वजह से मुझे काफी दिक्कत हुआ।" उन्होंने कहा, "कल का अनुभव देख मैंने अपने मालिक से कहा है कि मुझे साढ़े 7 बजे तक दुकान से चले जाने दें।"

नाइट कर्फ्यू के कारण देर रात तक चलने वाले रेस्तरां और कैफे के व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है। इतना ही नहीं, कैफे में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी जाने के संकट मंडराने लगे हैं।

बता दें कि बुधवार को दिल्ली में कोरोना के 5506 नए मामले सामने आए, वहीं पूरे देश में एक लाख 26 हजार केस दर्ज हुए। लगातार मामले बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली और हरियाणा यानी कुल 11 राज्य कोरोना का सर्वाधिक खतरा झेल रहे हैं। कुल संक्रमण के 91 प्रतिशत मामले इन 11 राज्यों में हैं।

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