महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है दिल्ली: नाबालिग के साथ गैंगरेप से आक्रोश, छात्राओं ने निकाला यूनिटी मार्च

सीसीटीवी निगरानी की कमियों, खराब पुलिसिंग और बढ़ते डर को उजागर करते हुए एलएसआर की छात्राओं ने यूनिटी मार्च निकाला और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

फोटो - विपिन
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  • एनएसयूआई ने लेडी श्रीराम कॉलेज के पास 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप मामले में तुरंत कानूनी कार्रवाई और तय समय-सीमा के भीतर जांच की मांग की है।

  • सुरक्षा चिंताओं के कारण एलएसआर ने फिजिकल क्लास सस्पेंड कीं

  • छात्राएं नाकाफी सीसीटीवी निगरानीऔर कम पुलिस पर आक्रोशित हैं

  • छात्र संगठनों ने एलएसआर और पार्क, मेट्रो स्टेशन और सड़कों जैसे इलाकों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग उठाई है

दक्षिण दिल्ली में राजधानी के मशहूर लेडी श्रीराम कॉलेज (एलएसआर) के पास एक पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप की हतप्रभ कर देने वाली घटना ने एक बार फिर राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के बढ़ते संकट को सामने रख दिया है। छात्र संगठन और नागरिक इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्थाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनएसयूआई) ने बुधवार, 23 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से आरोपियों के ख़िलाफ़ तुरंत कानूनी कार्रवाई करने और एक पारदर्शी, समय-सीमा वाली जांच की मांग की। एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि हनुमान पांडे ने कहा, "अगर लड़कियां सुरक्षित माहौल में पढ़ाई, काम और आज़ादी से घूम-फिर नहीं सकतीं, तो सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।"

फोटो - विपिन
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इस घटना से हड़कंप मच गया है, खासकर एलएसआर कम्युनिटी में। सुरक्षा कारणों से कॉलेज ने मंगलवार को फिजिकल क्लास सस्पेंड कर दीं और बुधवार के सेशन ऑनलाइन कर दिए। हालांकि, स्टूडेंट्स और फैकल्टी के साथ मीटिंग के बाद, कॉलेज ने गुरुवार से ऑफलाइन क्लास फिर से शुरू करने का ऐलान किया। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि स्टूडेंट्स की सुरक्षा और अतिरिक्त काउंसलिंग रिसोर्स उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया जाएगा।

एलएसआर की छात्राओं ने कॉलेज के बाहर यूनिटी मार्च निकालकर अपना आक्रोश और निराशा ज़ाहिर की। उन्होंने इलाके में सीसीटीवी की नाकाफी निगरानी और पुलिस की कम मौजूदगी को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं और कॉलेज के पिछले गेट के पास पीछा करने (स्टॉकिंग) और उत्पीड़न की घटनाओं के लंबे इतिहास की ओर इशारा किया। मार्च के दौरान एक पोस्टर पर लिखा था, "रात की ताज़ी हवा का आनंद लेना मेरी गलती नहीं है; इसे मुझसे छीनने की चाहत रखना आपकी गलती है।" इस पोस्टर के ज़रिए महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक जगहों की माँग पर ज़ोर दिया गया।


इस मामले में एनएसयूआई ने एलएसआर और उसके आस-पास के इलाकों—जिनमें पार्क, मेट्रो स्टेशन और छात्रों की ज़्यादा आवाजाही वाली सड़कों जैसे इलाकों में सुरक्षा का व्यापक ऑडिट करने की भी मांग की। उन्होंने अधिकारियों से पुलिस गश्त बढ़ाने, स्ट्रीट लाइटिंग बेहतर करने और तेज़ी से आपातकालीन प्रतिक्रिया देने वाले सिस्टम लागू करने का आग्रह किया।

दिल्ली में बीते वर्षों के दौरान कई दिल दहला देने वाले अपराधों के कारण महिलाओं की सुरक्षा के रिकॉर्ड पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है और छात्रों व नागरिकों में डर का माहौल है। शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज की बार-बार की अपीलों के बावजूद, कई इलाके महिलाओं के लिए असुरक्षित बने हुए हैं। इससे मौजूदा कानून-व्यवस्था के असरदार होने और ज़रूरी सुधार लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े होते हैं।

फोटो - विपिन
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महिलाओं के ख़िलाफ़ बार-बार हो रही हिंसा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच, एक्टिविस्ट, छात्र और आम नागरिक इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि अगर कोई ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाया गया, तो शहर महिलाओं को सुरक्षित रूप से जीने, काम करने और पढ़ने की बुनियादी आज़ादी देने में नाकाम रहेगा।

अब मांग यह है कि पीड़ित महिला को तुरंत न्याय मिले और ऐसे स्थायी सुधार किए जाएं जिनसे दिल्ली में सभी महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक जगहों की गारंटी हो।

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