दिल्ली दंगों पर पीएम मोदी और अमित शाह में थे मतभेद? इसलिए अजित डोवाल को दी गई ये जिम्मेदारी, वरिष्ठ पत्रकार का दावा

राजधानी दिल्ली में हुए दंगों ने न सिर्फ केंद्र सरकार की छवि खराब की है, बल्कि दुनिया भर में भारत का नाम बदनाम हुआ है। तीन दिन तक सरकार दंगों पर काबू पाने में नाकाम रही। जिसके बाद आनन-फानन में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल को इसकी जिम्मेदारी दी।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

राजधानी दिल्ली में हुए दंगों ने न सिर्फ केंद्र सरकार की छवि खराब की है, बल्कि दुनिया भर में भारत का नाम बदनाम हुआ है। तीन दिन तक सरकार दंगों पर काबू पाने में नाकाम रही। जिसके बाद आनन-फानन में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल को इसकी जिम्मेदारी दी। अजीत डोवाल अब तक दो बार दंगा ग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके हैं। इसी बीच दिल्ली दंगों को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह के बीच मतभेद की खबरें आ रही हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि एनएसए अजीत डोवाल को दिल्ली दंगों के बाद स्थिति नियंत्रित करने की जिम्मेदारी दिया जाना केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए एक झटका माना जा रहा है।

आरोप है कि दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस ने दंगों को नियंत्रित करने में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई! ऐसे में इसे गृह मंत्री अमित शाह से जोड़ा जा रहा है क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर गृह मंत्री को रिपोर्ट करती है।


न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में वरिष्ठ पत्रकार अनिता कात्याल ने दावा किया है कि दिल्ली दंगे को जिस तरह से दिल्ली पुलिस द्वारा हैंडल किया गया, उससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुश नहीं हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए एनएसए अजीत डोवाल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी।

अनिता कात्याल की लेख के मुताबिक, इस बात से अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैबिनेट में उनके करीबी सहयोगी अमित शाह के बीच मतभेद उभरे हैं। विपक्षी दलों ने दिल्ली दंगे को गृहमंत्री अमित शाह की नाकामी बताया है। उनसे इस्तीफे की मांग की जा रही है। दंगा प्रभावित इलाके का दौरा न करने की वजह से भी उन निशाना साधा जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार अनिता कात्याल के मुताबिक, एनएसए अजीत डोवाल को दंगे शांत करने की जिम्मेदारी देने से पीएम मोदी और अमित शाह दोनों को फायदा हो सकता है। एनएसए अजीत डोवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है और यही वजह है कि पीएम ने अपनी ग्लोबल स्टेट्समैन की छवि को बचाने के लिए अजीत डोवाल को यह जिम्मेदारी सौंपी, ताकि स्थिति पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।

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