नोटबंदी योजनाबद्ध तरीके से किया गया एक आपराधिक आर्थिक घोटाला: राहुल गांधी

‘नोटबंदी एक आपराधिक आर्थिक घोटाला था’

भारत को इसके बारे में पता चल जाएगा चाहे सरकार कितना भी इसे छुपाने की कोशिश करे कि नोटबंदी सिर्फ एक बगैर सोचे-समझे ‘मासूम इरादे’ से लागू की गई आर्थिक नीति नहीं थी, बल्कि बहुत योजनाबद्ध तरीके से किया गया एक आपराधिक आर्थिक घोटाला था।

नोटबंदी पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस नोट जारी किया है, जिसमें उन्होंने इसे योजनाबद्ध तरीके से किया गया एक आपराधिक आर्थिक घोटाला करार दिया है। हम उस प्रेस नोट का पूरा हिंदी अनुवाद यहां प्रकाशित कर रहे हैं। -नवजीवन

भारत के इतिहास में 8 नवंबर, 2016 का दिन एक कुख्यात दिन के तौर हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा। दो साल पहले इसी दिन पीएम मोदी ने नोटबंदी का अत्याचार राष्ट्र पर थोपा था। उस रात 8 बजे वे एकतरफा घोषणा करने के लिए टेलीविजन पर अवतरित हुए। अब हम जानते हैं कि उसे फैसले को उनके आर्थिक सलाहकारों का समर्थन भी नहीं प्राप्त था। नोटबंदी की उस घोषणा के साथ पीएम मोदी ने भारत की 86 फीसदी मुद्रा को प्रतिबंधित करते हुए हमारी अर्थव्यवस्था को ठप्प कर दिया।

नोटबंदी एक त्रासदी थी। भारत ने अतीत में कई त्रासदियों को झेला है। कई बार बाहरी दुश्मनों ने हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। लेकिन हमारी त्रासदियों के इतिहास में नोटबंदी एक अलग तरह की घटना है जो खुद पर थोपा गया खुदकुशी जैसा हमला था। इसने करोड़ों लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर दी और भारत के हजारों छोटे व्यापार को नष्ट कर दिया।

120 से ज्यादा लोगों की कतारों में खड़े-खड़े जान चली गई। हमें उनको कभी नहीं भूलना चाहिए। छोटे और मध्यम किस्म के लाखों व्यापारियों को जोरदार झटका लगा और पूरा संगठित क्षेत्र तबाह हो गया।

2016 के बाद से पूरी दुनिया के कई अर्थशास्त्रियों ने नोटबंदी के प्रभावों का विश्लेषण किया है और उनका निष्कर्ष यह है कि नोटबंदी लगातार चलने वाली एक आपदा है जिसका एक भी घोषित लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। और उन उद्देश्यों की सूची समय के साथ बढ़ती रही है। जाली मुद्रा और आतंकवाद पर चोट पहुंचाने से लेकर काले धन को मिटाने तक; बचत बढ़ाने से लेकर डिजिटल लेन-देन की व्यवस्था में जाने तक; सरकार का एक घोषित उद्देश्य भी पूरा नहीं हुआ।

इस सबसे सिर्फ एक आपदा ही हासिल हुई।

पीएम मोदी की नोटबंदी से 15 लाख से ज्यादा नौकरियों का नुकसान हुआ और कम से कम 1 प्रतिशत जीडीपी कम खत्म हो गई।

प्रधानमंत्री की इस भयानक गलती की दूसरी सालगिरह पर लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाले हमारे अयोग्य वित्त मंत्री समेत सरकार के प्रतिनिधियों के पास एक आपराधिक नीति को सही ठहराने का एक कभी न पूरा हो सकने वाला काम है।

भारत को इसके बारे में पता चल जाएगा चाहे सरकार कितना भी इसे छुपाने की कोशिश करे कि नोटबंदी सिर्फ एक बगैर सोचे-समझे ‘मासूम इरादे’ से लागू की गई आर्थिक नीति नहीं थी, बल्कि बहुत योजनाबद्ध तरीके से किया गया एक आपराधिक आर्थिक घोटाला था।

नोटबंदी की सच्चाई अभी तक पूरी तरह बाहर नहीं आई है। भारत के लोग चुप नहीं बैठेंगे जब तक यह बाहर नहीं आ जाती।

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